हरियाणा के जींद स्थित नागरिक अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था और सुरक्षाकर्मियों के रवैये को लेकर बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर उपचार की आस में आए एक पीड़ित मरीज के साथ हुई मारपीट का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा और पुलिस अधीक्षक (एसपी) उपासना ने तुरंत अस्पताल परिसर का रुख किया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ होने वाले अमानवीय व्यवहार और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है, जिस पर जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों ने खासी नाराजगी जताई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोहतक रोड स्थित भगवान नगर के रहने वाले सन्नी अपनी पत्नी भावना को लेकर वीरवार को जींद के नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे थे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि वहां तैनात चिकित्सकों ने करीब तीन घंटे तक उनकी कोई सुध नहीं ली और न ही उनकी एमएलआर काटी गई। लगातार दर्द बढ़ने पर जब उन्होंने डॉक्टर से दवा या राहत देने की गुहार लगाई, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब मरीज ने बार-बार गुहार लगाई तो एक निजी गार्ड ने उस पर थप्पड़ और मुक्कों से बेरहमी से हमला कर दिया, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्रशासनिक अमले की त्वरित कार्रवाई और मौके पर निरीक्षण
घटना की भनक लगते ही विधानसभा उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने चंडीगढ़ से जींद लौटते ही सीधे सिविल अस्पताल का रुख किया। उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली को मौके पर तलब किया और अस्पताल की लचर कार्यप्रणाली पर जमकर खरी-खोटी सुनाई। डॉ. मिड्ढा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक बीमार मरीज और उसके परिजनों के साथ इस तरह का क्रूर बर्ताव किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मामले में शामिल दोषी चिकित्सकों और मारपीट करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
दूसरी ओर, पुलिस अधीक्षक उपासना ने भी इस पूरे प्रकरण में बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए कड़ा कदम उठाया है। जब जांच में यह सामने आया कि जिस वक्त अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक नागरिक को पीटा जा रहा था, उस वक्त वहां कुछ होमगार्ड भी तैनात थे जो पूरी घटना के दौरान मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे। एसपी उपासना ने कर्तव्य में भारी लापरवाही बरतने वाले दोनों होमगार्ड्स को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। इसके साथ ही मारपीट की इस पूरी घटना में संलिप्त पाए गए अन्य दोषी कर्मियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक और कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया है।
| घटना का पहलू | विवरण व प्रशासनिक कार्रवाई |
|---|---|
| स्थान | नागरिक अस्पताल, इमरजेंसी वार्ड, जींद |
| पीड़ित पक्ष | सन्नी और उनकी पत्नी भावना (निवासी भगवान नगर, रोहतक रोड) |
| मुख्य घटना | उपचार में देरी और एमएलआर की मांग पर निजी गार्ड द्वारा मरीज के साथ मारपीट |
| प्रमुख प्रशासनिक एक्शन | दोषी होमगार्ड लाइन हाजिर, एक अन्य कर्मचारी टर्मिनेट और उच्च स्तरीय जांच शुरू |
| निरीक्षणकर्ता | डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा एवं एसपी उपासना |
स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
जींद सिविल अस्पताल की इस शर्मनाक घटना ने एक बार फिर सरकारी चिकित्सा संस्थानों में आने वाले आम मरीजों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। रोजाना दूर-दराज से अपनी उम्मीदें लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को यदि इस तरह के भय और हिंसा का सामना करना पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक विषय है। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि केवल कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से बात नहीं बनेगी, बल्कि पूरे अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों और डॉक्टरों की जवाबदेही को पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित करना होगा ताकि आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर से भरोसा न उठे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के भीतर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। अस्पताल के भीतर तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली की भी नए सिरे से समीक्षा किए जाने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे सुरक्षाकर्मियों को अस्पतालों में तैनात किया जाना चाहिए जो मरीजों के साथ संयम और मानवता से पेश आएं, न कि उन पर हाथ उठाएं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें इस मामले के हर एक पहलू की गहराई से जांच-पड़ताल कर रही हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की अमानवीय घटनाओं को पूरी तरह से रोका जा सके।
"सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे एक नागरिक और उसके परिजनों के साथ इस तरह की मारपीट बेहद शर्मनाक है। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली को गंभीर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" - डॉ. कृष्ण मिड्ढा, विधानसभा उपाध्यक्ष एवं विधायक
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
प्रशासन की ओर से इस मामले में स्पष्ट कर दिया गया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को राहत नहीं दी जाएगी। पुलिस वायरल वीडियो और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को आधार बनाकर आगे की तफ्तीश में जुटी है ताकि घटना में शामिल अन्य चेहरों की भी शिनाख्त की जा सके। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इमरजेंसी सेवाओं में तैनात स्टाफ की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और मरीजों की शिकायतों का तुरंत समाधान करें। पानीपत लाइव इस सनसनीखेज और संवेदनशील मामले की पल-पल की अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।




