हरियाणा के कैथल जिले के अंतर्गत आने वाले ग्योंग गांव में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फैसला देखने को मिला है। जिला प्रशासन ने पंचायती जमीन पर अवैध कब्जे और चुनावी हलफनामे में गलत तथ्य प्रस्तुत करने के गंभीर आरोपों में घिरी महिला सरपंच मनजीत कौर को बर्खास्त कर दिया है। जिला उपायुक्त (डीसी) ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 51 (1) के तहत यह सख्त प्रशासनिक आदेश जारी किए हैं।
इस प्रशासनिक फैसले के बाद स्थानीय ग्रामीण राजनीति और पंचायती व्यवस्था में हलचल तेज हो गई है। पहले इस मामले में सरपंच को निलंबित किया गया था, जिसके बाद अपील प्रक्रिया और विस्तृत जांच संपन्न होने पर अंतिम बर्खास्तगी की मुहर लगाई गई। गांव के विकास कार्यों और दैनिक प्रशासनिक संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए जल्द ही बहुमत प्राप्त पंच को कार्यवाहक सरपंच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
ग्योंग पंचायत मामला: निलंबन से बर्खास्तगी तक का सिलसिलेवार घटनाक्रम
ग्योंग गांव की सरपंच मनजीत कौर के खिलाफ गांव के ही कुछ लोगों ने गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नामांकन दाखिल करते समय सरपंच पद की प्रत्याशी ने पंचायत भूमि पर बने अपने अवैध कब्जे की जानकारी छिपाई थी। इसके अतिरिक्त, सरपंच पर पंचायती कामकाज के दौरान विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं बरतने के भी आरोप लगाए गए थे। प्रारंभिक शिकायत के आधार पर जिला उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरपंच को निलंबित कर दिया था।
निलंबन आदेश के पश्चात सरपंच प्रतिनिधि की ओर से करनाल मंडल के आयुक्त के समक्ष अपील दायर की गई थी, जहां से अस्थायी रूप से निलंबन पर रोक मिल गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय और प्रशासनिक निर्देशों के तहत पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच दोबारा शुरू की गई। राजस्व विभाग और पंचायत विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट में अवैध कब्जे की पुष्टि हुई और चुनावी नामांकन में गलत हलफनामा देने के तथ्य पूरी तरह सही पाए गए, जिसके बाद डीसी ने बर्खास्तगी के अंतिम आदेश जारी कर दिए।
| मामले का विवरण | संबंधित जानकारी व तथ्य |
|---|---|
| प्रभावित गांव व जिला | ग्योंग गांव, जिला कैथल (हरियाणा) |
| कार्रवाई की शिकार सरपंच | मनजीत कौर |
| लागू विधिक धारा | हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 51 (1) |
| मुख्य आरोप | पंचायती भूमि पर अवैध कब्जा, गलत चुनावी शपथ पत्र, प्रशासनिक अनियमितताएं |
| वर्तमान स्थिति | सरपंच पद से बर्खास्त, बहुमत वाले पंच को कार्यवाहक प्रभार देने की तैयारी |
अधिकारियों का रुख और सरपंच पक्ष का बयान
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) रीतू लाठर ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है। पंचायत विभाग द्वारा गठित जांच दल ने राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया, जिसमें सरपंच प्रतिनिधि का पंचायती भूमि पर अवैध कब्जा स्पष्ट रूप से स्थापित हुआ। इसके साथ ही विकास कार्यों की फाइलों में भी कई खामियां पाई गईं। माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही जांच रिपोर्ट तैयार करके उपायुक्त कार्यालय को भेजी गई थी।
दूसरी ओर, सरपंच प्रतिनिधि कर्मवीर ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने पक्ष में बयान दिया है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्थानीय पंचायत अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को गुमराह करके यह बर्खास्तगी की कार्रवाई करवाई है। सरपंच पक्ष का दावा है कि उन्हें राजनीतिक रंजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है और वे इस आदेश के खिलाफ सक्षम कानूनी मंच पर अपील करेंगे।
blockquote>"जांच में पंचायती भूमि पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक कार्यों में अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार और हरियाणा पंचायती राज अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई गई है।"- रीतू लाठर, DDPO, कैथल
ग्रामीण विकास और स्थानीय शासन पर कार्रवाई का प्रभाव
सरपंच की बर्खास्तगी के बाद ग्योंग गांव में विकास कार्यों की गति को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ महीनों से जारी जांच और विधिक खींचतान के कारण गांव की अनेक विकास योजनाएं अधर में लटकी हुई थीं। सड़कों की मरम्मत, गलियों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति से जुड़े कई काम प्रभावित हो रहे थे।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पंचायती राज नियमों के तहत गांव के विकास कार्यों को रुकने नहीं दिया जाएगा। जल्द ही ग्राम पंचायत के निर्वाचित पंचों की बैठक बुलाकर सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर एक कार्यवाहक सरपंच का चयन किया जाएगा, जो नए चुनाव या आगामी आदेशों तक गांव के विकास कार्यों की कमान संभालेगा।
आगामी कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक कदम
इस फैसले के बाद जिला प्रशासन ने ग्योंग ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और वित्तीय खातों का नए सिरे से ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। पद से हटाई गई महिला सरपंच के पास अब वित्तीय शक्तियां नहीं रहेंगी। यदि सरपंच पक्ष इस आदेश के खिलाफ वित्तीय आयुक्त या उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है, तो कानूनी प्रक्रिया समानांतर चलती रहेगी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में प्रशासनिक प्रभार हस्तांतरित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।




