पानीपत के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान आर्य पीजी कॉलेज ने एक बार फिर अपनी कलात्मक और सांस्कृतिक उत्कृष्टता का लोहा मनवाया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रांगण में आयोजित प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव 'रत्नावली' के हीरक जयंती समारोह में कॉलेज के विद्यार्थियों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए लगातार छठी बार ओवरऑल ट्रॉफी पर अपना कब्जा बरकरार रखा। एक से चार नवंबर तक चली इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में प्रदेशभर के तमाम विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के हुनुरमंद युवाओं ने हिस्सा लिया, जहाँ पानीपत की इस शिक्षण संस्था ने अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा से सभी को अचंभित कर दिया।
इस भव्य सांस्कृतिक महाकुंभ में आर्य कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। कुल 14 अलग-अलग विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने के साथ-साथ तीन स्पर्धाओं में द्वितीय स्थान भी अपने नाम किया। लूर डांस, हरियाणवी भजन, ड्यूट रागनी, हरियाणवी फैशन शो, हरियाणवी कोरियोग्राफी, हरियाणवी गजल, फोक कॉस्ट्यूम (महिला व पुरुष वर्ग), मोनो एक्टिंग, ग्रुप सॉन्ग हरियाणवी, हरियाणवी पोएट्री, वन एक्ट प्ले, रसिया ग्रुप डांस और सांग जैसी प्रमुख विधाओं में कॉलेज के प्रतिभागियों ने गोल्ड मेडल अपने नाम किए। वहीं, सोलो डांस मेल, हरियाणवी लोकगीत और पॉप सॉन्ग हरियाणवी में दूसरा स्थान हासिल कर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई।
सांस्कृतिक उत्कृष्टता का भव्य प्रदर्शन और पुरस्कार वितरण
महोत्सव के समापन अवसर पर आयोजित गरिमामयी समारोह में पहुंचे अतिथियों ने विजेता विद्यार्थियों की हौसला अफजाई की। इस दौरान श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय पलवल के कुलपति डॉ. दिनेश अग्रवाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा और रजिस्ट्रार वीरेंद्र पाल सिंह ने मंच से सभी विजेता प्रतिभागियों को प्रतीक चिन्ह व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। मंच पर विद्यार्थियों की प्रस्तुति इतनी जीवंत थी कि रसिया ग्रुप डांस के दौरान हरियाणा विमुक्त घुमंतू जाति विकास बोर्ड के चेयरमैन जसमेर सिंह बंजारा ने प्रभावित होकर विद्यार्थियों को 11 हजार रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की, जिससे छात्रों का उत्साह कई गुना बढ़ गया।
कॉलेज की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे विद्यार्थियों के महीनों के कड़े अभ्यास और प्राध्यापकों के सटीक मार्गदर्शन की बड़ी भूमिका रही है। सांस्कृतिक गतिविधियों के संयोजन और प्रशिक्षण में डॉ. रामनिवास, डॉ. नीलू खालसा, डॉ. विजय सिंह, डॉ. रजनी शर्मा और डॉ. अकरम खान जैसे अनुभवी शिक्षकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन गुरुओं की देखरेख में ही छात्र-छात्राओं ने हरियाणवी संस्कृति की मूल आत्मा को मंच पर जीवंत किया और एक बार फिर साबित कर दिया कि पानीपत के युवा कला के क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं हैं।
| स्थान (Position) | सांस्कृतिक विधाएं (Cultural Categories) |
|---|---|
| प्रथम स्थान (14 विधाएं) | लूर डांस, हरियाणवी भजन, ड्यूट रागनी, फैशन शो, कोरियोग्राफी, गजल, फोक कॉस्ट्यूम (मेल-फीमेल), मोनो एक्टिंग, ग्रुप सॉन्ग, पोएट्री, वन एक्ट प्ले, रसिया ग्रुप डांस, सांग |
| द्वितीय स्थान (3 विधाएं) | सोलो डांस (मेल), हरियाणवी लोकगीत, पॉप सॉन्ग हरियाणवी |
प्रबंध समिति और प्राचार्य का संदेश
इस शानदार उपलब्धि पर कॉलेज प्रबंध समिति के प्रधान सुरेंद्र शिंगला, उपप्रधान वीरेंद्र शिंगला, महासचिव सीए कमल किशोर और प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने संयुक्त रूप से सभी विजेता विद्यार्थियों, सांस्कृतिक विभाग की टीम और उनके अभिभावकों को बधाई दी। प्रबंधन ने अपने संदेश में कहा कि यह जीत केवल एक ट्रॉफी भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे युवा अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत के प्रति कितने समर्पित हैं। शिक्षकों की मेहनत और विद्यार्थियों का अनुशासन ही इस सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
"रत्नावली महोत्सव में लगातार छठी बार ओवरऑल ट्रॉफी जीतना पानीपत और पूरे कॉलेज परिवार के लिए गर्व का क्षण है। हमारे विद्यार्थियों ने हरियाणा की लोक संस्कृति को जिस शिद्दत से मंच पर उकेरा है, वह सराहनीय है। यह सफलता अनुशासन, कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास का परिणाम है।" - प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता, प्राचार्य
क्षेत्रीय युवा संस्कृति पर सकारात्मक प्रभाव
इस प्रकार की उपलब्धियां स्थानीय स्तर पर युवाओं के बीच कला, संस्कृति और लोक संगीत के प्रति रुझान को तेजी से बढ़ावा देती हैं। जब एक ही शिक्षण संस्थान बार-बार राज्य स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित करता है, तो वह अन्य कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। पानीपत जैसे औद्योगिक और व्यापारिक शहर में इस प्रकार की सांस्कृतिक उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि यहाँ के युवा आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी पारंपरिक जड़ों से भी उतनी ही गहराई से जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह जीत क्षेत्र के शैक्षणिक और सांस्कृतिक परिवेश को और अधिक समृद्ध करने का काम करेगी।




