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पानीपत के वार्ड-9 में संकट मोचन हनुमान मंदिर का 58वां वार्षिकोत्सव शुरू, ध्वजारोहण के साथ गूंजी शहनाई

पानीपत के वार्ड-9 स्थित श्री शक्तिपीठ संकट मोचन हनुमान मंदिर का 58वां वार्षिकोत्सव बुधवार को हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ। स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कथा का वाचन किया।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
4 नवंबर 2026 को 02:57 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पानीपत के वार्ड-9 में संकट मोचन हनुमान मंदिर का 58वां वार्षिकोत्सव शुरू, ध्वजारोहण के साथ गूंजी शहनाई
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •वार्ड-9 स्थित श्री शक्तिपीठ संकट मोचन हनुमान मंदिर में 58वें वार्षिकोत्सव का हुआ भव्य आगाज।
  • •हरिद्वार से पधारे श्रीगीता भागवत व्यास डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को सुनाई कथा।
  • •गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण और दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
  • •शहनाई की पारंपरिक और मधुर धुनों के बीच आध्यात्मिक माहौल में गूंजे प्रभु श्रीराम के जयकारे।

पानीपत जिले के स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण आयोजन के तहत, वार्ड-9 स्थित प्रतिष्ठित श्री शक्तिपीठ संकट मोचन हनुमान मंदिर का 58वां वार्षिकोत्सव बुधवार को पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ आरंभ हो गया। इस पावन धार्मिक अनुष्ठान के पहले दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया। कार्यक्रम का विधिवत श्रीगणेश पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

उत्सव के इस पहले दिन को विशेष बनाने के लिए कई धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य आकर्षण हरिद्वार से पधारे प्रख्यात श्रीगीता भागवत व्यास डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज का सान्निध्य रहा। उनके मार्गदर्शन में आयोजित इस धार्मिक महोत्सव को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर कमेटियों और आयोजकों द्वारा पिछले कई दिनों से इस आयोजन की तैयारियां की जा रही थीं, जो आज भव्य रूप में फलीभूत होती नजर आईं।

ध्वजारोहण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ विधिवत शुभारंभ

वार्षिकोत्सव के पहले सत्र की शुरुआत मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में ध्वजारोहण के साथ हुई। समारोह के मुख्य अतिथि गजेंद्र सलूजा, अरुण सेठी और वरुण सेठी ने संयुक्त रूप से मंदिर परिसर में ध्वजारोहण किया और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आधिकारिक श्रीगणेश किया। इस दौरान गूंजती शहनाई की मधुर धुनों ने पूरे क्षेत्र में एक अलौकिक और आनंददायक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। दीप प्रज्वलन के पश्चात संतों और अतिथियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मंच का कुशल संचालन वेद बांगा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी शैली से सभी उपस्थित जनों को जोड़े रखा। इस अवसर पर हेमंत लखीना, पंकज सेठी, कुसुम धीमान, श्रवण लखीना, वेद सेठी, अशोक चुघ, संत लाल जुनेजा, अशोक जुनेजा, महेश जुनेजा, जवाहर डुडेजा, पंकज ढींगड़ा और शिव जुनेजा सहित शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस वार्षिकोत्सव को सफल बनाने और इसमें अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम विवरणमुख्य जानकारी
स्थानश्री शक्तिपीठ संकट मोचन हनुमान मंदिर, वार्ड-9, पानीपत
आयोजन58वां वार्षिक उत्सव एवं धार्मिक अनुष्ठान
प्रमुख वक्ताडॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज (हरिद्वार)
मुख्य अतिथिगजेंद्र सलूजा, अरुण सेठी, वरुण सेठी

संतों के प्रवचन और श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों की व्याख्या

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में हरिद्वार से आए डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने रामचरितमानस के अंतर्गत श्रीसुंदरकांड की अत्यंत प्रसिद्ध चौपाई 'कुछक दिवस जननी धरू धीरा, कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा' की विस्तृत और भावपूर्ण व्याख्या की। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक चौपाई तब कही गई थी जब हनुमान जी अशोक वाटिका में माता सीता को सांत्वना दे रहे थे। महाराज ने कहा कि यह प्रसंग और चौपाई महान मनोविज्ञान से ओतप्रोत है, जो कठिन समय में भी मानसिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

स्वामी जी ने अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए समझाया कि उस कालखंड में माता सीता अत्यंत भयभीत और व्यथित थीं। ऐसे में हनुमान जी ने अपनी अद्वितीय वाकपटुता का परिचय देते हुए पहले माता का ध्यान रावण के भय से पूरी तरह हटाकर प्रभु श्रीराम की भक्ति में केंद्रित किया। इसके पश्चात उन्होंने अपना विशाल स्वरूप प्रदर्शित कर माता के मन से सारे डर को समाप्त कर दिया। महाराज ने उपस्थित जनसमूह को संदेश दिया कि मनुष्य के जीवन में धर्म का सबसे पहला और महत्वपूर्ण लक्षण 'धीरज' यानी धैर्य धारण करना है। उतावलेपन में उठाया गया कोई भी कदम हमेशा पछतावे का कारण बनता है।

धर्म का सबसे पहला लक्षण धैर्य धारण करना है। उतावलेपन में लिए गए निर्णय कभी भी सार्थक परिणाम नहीं देते, बल्कि वे सदैव पछतावे का कारण बनते हैं। कठिन समय में प्रभु भक्ति और संयम ही मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है। - डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज, श्रीगीता भागवत व्यास

स्थानीय जनजीवन और धार्मिक संस्कृति पर प्रभाव

इस प्रकार के आयोजनों से पानीपत शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक एकजुटता को नया बल मिलता है। मंदिर के वार्षिकोत्सव जैसे आयूषनों से न केवल नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों से जुड़ने का अवसर मिलता है, बल्कि आपसी भाईचारा भी मजबूत होता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे धार्मिक अनुष्ठान समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को मानसिक शांति प्रदान करते हैं। मंदिर कमेटी द्वारा आने वाले दिनों में भी कई अन्य धार्मिक कार्यक्रमों और भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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