पानीपत जिले के बापौली क्षेत्र के लिए एक बेहद गौरवांवित करने वाली खबर सामने आई है। गांव बापौली की होनहार बेटी विजेता रावल ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता का परचम लहराते हुए असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (एडीए) का पद हासिल किया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद जब विजेता पहली बार अपने पैतृक गांव बापौली पहुंचीं, तो वहां उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों और परिजनों ने उनकी इस कामयाबी पर ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार अभिनंदन किया।
विजेता रावल की यह सफलता इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने शिक्षण कार्य और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए यह मुकाम हासिल किया है। वह वर्तमान में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्य कर रही थीं। नौकरी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उनके मजबूत इरादों और निरंतर अध्ययन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
सफलता का सफर: 8 साल की अनवरत मेहनत और अटूट धैर्य
अपनी सफलता पर बात करते हुए विजेता रावल ने बताया कि प्रशासनिक या न्यायिक सेवा में जाने का सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था। इस मुकाम तक पहुँचने के लिए उन्हें लगभग आठ वर्षों तक निरंतर प्रयास करना पड़ा। इस दौरान कई बार उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने अकादमिक करियर यानी विश्वविद्यालय में अध्यापन के साथ-साथ उन्होंने समय का सही प्रबंधन किया और हर दिन नियमानुसार अध्ययन जारी रखा।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाने के लिए निरंतरता और धैर्य सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास पूरी निष्ठा से किए जाएं, तो देर से ही सही, सफलता अवश्य मिलती है। परिवार की ओर से मिले निरंतर प्रोत्साहन और मानसिक सहयोग ने भी उनकी इस यात्रा को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई।
| महत्वपूर्ण विवरण | तथ्य व जानकारी |
|---|---|
| चयनित अभ्यर्थी का नाम | विजेता रावल |
| चयनित पद | असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ADA) |
| चयन निकाय | हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) |
| गृह क्षेत्र/गांव | बापौली (जिला पानीपत) |
| पूर्व कार्य अनुभव | असिस्टेंट प्रोफेसर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी |
| संघर्ष अवधि | लगभग 8 वर्ष का निरंतर प्रयास |
बापौली पहुंचने पर भव्य स्वागत और नागरिक अभिनंदन
विजेता रावल के असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी बनने की सूचना जैसे ही बापौली गांव में फैली, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव आगमन पर पंचायत समिति की वाइस चेयरपर्सन सीमा रावल की अगुवाई में दर्जनों महिलाओं व ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस मौके पर ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाई बांटी गई और एक-दूसरे को बधाई दी गई।
"आठ साल के लंबे संघर्ष और निरंतर अध्ययन के बाद मुझे यह सफलता मिली है। शिक्षण कार्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग और ईश्वर के आशीर्वाद से यह संभव हो पाया। मैं अपनी इस सेवा के माध्यम से न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का प्रयास करूंगी।"
- विजेता रावल, नवनियुक्त ADA
स्थानीय युवाओं और ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
इस सम्मान समारोह के दौरान क्षेत्र के प्रमुख प्रबुद्ध नागरिक और रिश्तेदार भी मौजूद रहे। समारोह में मौजूद एडवोकेट जयपाल रावल, डॉ. रामवीर रावल, नीरज रावल तथा अनिल रावल ने विजेता को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उच्च विधिक सेवा में स्थान बनाना पूरे पानीपत जिले के लिए सम्मान की बात है।
ग्रामीणों का कहना था कि विजेता रावल की यह उपलब्धि बापौली और आसपास के ग्रामीण अंचलों की बेटियों के लिए एक बड़ी मिसाल कायम करेगी। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों के लिए उच्च शिक्षा और लंबी प्रतियोगी परीक्षाओं की राह कठिन मानी जाती है, लेकिन विजेता ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
न्यायिक प्रणाली में निष्पक्ष सेवा देने का संकल्प
अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर नवनियुक्त असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी विजेता रावल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सौंपी जाने वाली प्रशासनिक व कानूनी जिम्मेदारियों का वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन करेंगी। कानून के दायरे में रहते हुए न्याय प्रक्रिया में सहयोग देना और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने में अपना योगदान देना ही उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी।



