पानीपत जिले के ग्रामीण इलाकों में पराली प्रबंधन और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है। इसी बीच जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है जहां कृषि विभाग की तथ्यात्मक जांच के बाद एक स्थानीय किसान को बड़ी राहत प्रदान की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बराना गांव के एक खेत में धान के अवशेष जलने का मामला सामने आया था, जिसे लेकर शुरुआती दौर में पांच हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाए जाने की चर्चा थी। लेकिन विभागीय और तकनीकी पड़ताल में यह स्पष्ट हो गया कि आग किसान की लापरवाही से नहीं, बल्कि बिजली का तार टूटने के कारण लगी थी।
यह पूरा घटनाक्रम 23 अक्तूबर को उस समय शुरू हुआ जब स्पेस सैटेलाइट के माध्यम से बराना गांव के एक कृषि क्षेत्र में फसल अवशेष में आग लगने की थर्मल लोकेशन दर्ज की गई। इसके तुरंत बाद हरकत में आई कृषि विभाग की विशेष टीम ने अगले ही दिन मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान लगभग दो एकड़ क्षेत्रफल में धान की कटी हुई फसल के अवशेष जले हुए पाए गए। शुरुआत में इस मामले में किसान को दोषी मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी, परंतु प्रभावित किसान अंकित ने स्पष्ट तर्क दिया कि उसके खेत के ऊपर से गुजर रही हाई-वोल्टेज बिजली की लाइन का तार अचानक टूटकर नीचे गिर गया था, जिसकी चिंगारी से यह दुर्घटना घटी।
तकनीकी जांच और विभागीय संपुष्टि का क्रम
किसान द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने मामले की गहराई से छानबीन शुरू की। बिजली निगम के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान करने पर यह बात सौ फीसदी सच साबित हुई कि खेत में आग मानवीय भूल या जानबूझकर पराली जलाने के कारण नहीं लगी थी, बल्कि विद्युत शॉर्ट सर्किट इसका मुख्य कारण था। सहायक कृषि अभियंता सुधीर कुमार ने इस बाबत आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि चूंकि जांच में किसान की किसी भी प्रकार की गलती या संलिप्तता नहीं पाई गई है, इसलिए नियमानुसार उस पर किसी भी प्रकार का आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
प्रशासन की यह निष्पक्ष कार्रवाई स्थानीय किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे यह संदेश गया है कि बेकसूर किसानों को प्रशासनिक स्तर पर पूरा न्याय मिल रहा है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक दुर्घटनाओं और जानबूझकर पराली में आग लगाने के मामलों में स्पष्ट अंतर किया जा रहा है। यदि कोई भी भूस्वामी नियमों का उल्लंघन कर ইচ্ছাকৃত रूप से फसल अवशेषों को आग के हवाले करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त विधिक कार्रवाई और भारी जुर्माने का प्रावधान सख्ती से लागू रहेगा।
| विवरण बिन्दु | तथ्य एवं आंकड़े |
|---|---|
| घटना का स्थान | बराना गांव, पानीपत जिला |
| प्रभावित क्षेत्रफल | लगभग दो एकड़ धान के अवशेष |
| आग लगने का कारण | खेत के ऊपर से गुजरता विद्युत तार टूटना |
| जांच एजेंसी | कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पानीपत |
| कार्रवाई का परिणाम | किसान को क्लीन चिट, जुर्माना रद्द |
केंद्रीय अधिकारियों का मार्गदर्शन और तकनीकी निगरानी
धान कटाई के इस सीजन में पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) भी पूरी तरह सतर्क है। हाल ही में दिल्ली से आईं केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. विजयलक्ष्मी ने पानीपत जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर खेतों की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें पराली जलाने के गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए आधुनिक कृषि उपकरणों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके समझाए।
डॉ. विजयलक्ष्मी ने किसानों को प्रेरित किया कि वे पराली को नष्ट करने के बजाय उसे मिट्टी में ही मिलाने की तकनीक अपनाएं, जिससे खेतों की प्राकृतिक उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रह सके और वायु प्रदूषण के स्तर को भी नियंत्रित किया जा सके। इस सीजन में पानीपत जिले के भीतर कुल मिलाकर लगभग 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई थी, जिसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत हिस्से पर कटाई का कार्य पूरा हो चुका है। बचे हुए अवशेषों के उठान और गांठें तैयार करने के लिए पूरे जिले में 50 से अधिक आधुनिक बेलर मशीनें दिन-रात सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
बराना गांव में जो घटना सामने आई थी, उसमें प्रारंभिक और तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि आग किसी मानवीय लापरवाही से नहीं बल्कि विद्युत तार टूटने से लगी थी। किसान की कोई गलती नहीं मिलने के कारण उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। पराली जलाने से रोकने के लिए अब हम सैटेलाइट मैपिंग के साथ-साथ ड्रोन कैमरों की मदद से भी खेतों की सघन निगरानी कर रहे हैं।
ड्रोन तकनीक और भविष्य की प्रशासनिक रणनीति
पराली प्रबंधन को लेकर इस बार हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर दिया है। पारंपरिक सैटेलाइट मैपिंग के अतिरिक्त अब ग्रामीण अंचलों में ड्रोन कैमरों के जरिए भी खेतों की आसमान से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। विभागीय टीमें इन हाई-टेक उपकरणों से मिलने वाली रियल-टाइम फुटेज और कोऑर्डिनेट्स के आधार पर तुरंत संबंधित खेतों तक पहुंच रही हैं। इससे न केवल निगरानी में पारदर्शिता आई है, बल्कि किसानों और अधिकारियों के बीच संवादहीनता की स्थिति भी समाप्त हुई है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की सख्त और पारदर्शी व्यवस्था से धीरे-धीरे किसानों में भी जागरूकता बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञ लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण दूतावास बढ़ता है, बल्कि खेत की उपजाऊ मिट्टी के मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। पानीपत जिले में प्रशासन का यह रुख साफ दर्शाता है कि जहां एक ओर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर शिकंजा कसा जा रहा है, वहीं किसी भी निर्दोष किसान को बेवजह परेशान नहीं होने दिया जाएगा। आने वाले दिनों में धान कटाई का दायरा बढ़ने के साथ ही निगरानी टीमों की सक्रियता को और अधिक बढ़ाने की योजना तैयार की गई है।




