पानीपत जिले के जिला नागरिक अस्पताल में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को अपने दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार करवाने की प्रक्रिया किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं साबित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आयोजित होने वाले विशेष चिकित्सीय शिविरों में व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है, जहां दूर-दराज से पहुंचने वाले दिव्यांग जनों को घंटों लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है। इसके बावजूद कई बार उन्हें मायूस होकर बिना प्रमाण पत्र के ही वापस लौटना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बुधवार को अस्पताल परिसर में दिव्यांगता परीक्षण को लेकर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया था। इस दौरान कुल 20 जरूरतमंदों के ही प्रमाण पत्र बन पाए, जबकि चार गंभीर मामलों को उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ गया। स्थिति तब और अधिक दयनीय हो गई जब ओपीडी ब्लॉक में सभी संबंधित विभागों के डॉक्टर एक ही छत के नीचे या एक साथ उपलब्ध नहीं मिले। परिणाम यह हुआ कि मरीजों को अपनी शारीरिक विवशता के साथ अस्पताल की बहुमंजिला इमारतों की सीढ़ियां चढ़ने और उतरने पर मजबूर होना पड़ा।
चिकित्सकों की अनुपलब्धता और विभागों के चक्कर काटते मरीज
बुधवार को आयोजित हुए इस विशेष जांच शिविर में विभिन्न श्रेणियों के डॉक्टरों द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए गए। आंकड़ों पर नजर डालें तो नेत्र रोग विशेषज्ञ के दो, मनोरोग विशेषज्ञ के दस, फिजिशियन का एक, ईएनटी विशेषज्ञ का एक और हड्डी रोग विशेषज्ञ के छह प्रमाण पत्र बनाए गए। हालांकि, नेत्र रोग और कान-नाक-गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक साथ बोर्ड में मौजूद न होने के कारण मरीजों को ओपीडी ब्लॉक के भूतल से लेकर प्रथम तल तक के अनगिनत चक्कर लगाने पड़े। एक विभाग से दूसरे विभाग की दौड़ लगाने में दिव्यांगों की शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का भारी ह्रास हुआ।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि दिव्यांगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न उठानी पड़े। कई मामलों में तो स्थिति यह है कि एक अदद प्रमाण पत्र के लिए लोगों को चार से पांच बार अस्पताल के धक्के खाने पड़ते हैं। बुजुर्गों और गंभीर रूप से असमर्थ लोगों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक बन चुकी है।
| विभाग / स्पेशलिस्ट | बने प्रमाण पत्र | मुख्य समस्या / स्थिति |
|---|---|---|
| मनोरोग विशेषज्ञ | 10 | सर्वाधिक प्रमाण पत्र इसी श्रेणी में बने |
| हड्डी रोग विशेषज्ञ | 6 | दिव्यांगों को ओपीडी में करना पड़ा लंबा इंतजार |
| नेत्र रोग विशेषज्ञ | 2 | विशेषज्ञ बोर्ड में एक साथ उपलब्ध नहीं |
| ईएनटी विशेषज्ञ | 1 | तल बदलने की मजबूरी से मरीज परेशान |
| फिजिशियन | 1 | सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया गया |
एक महिला का दर्द: चार सप्ताह से लगा रही हैं अस्पताल के चक्कर
शहर के देवी मंदिर रोड की रहने वाली दर्शना का मामला इस व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। उनके बाएं हाथ में गंभीर समस्या है, जिसके निवारण और प्रमाण पत्र के लिए वह पिछले चार हफ्तों से लगातार बुधवार के दिन अस्पताल आ रही हैं। बुधवार को वह सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंच गई थीं, लेकिन जांच करने वाले डॉक्टर दोपहर एक बजे के आसपास शिविर में पहुंचे। इसके बाद जाकर उनका चिकित्सीय परीक्षण शुरू हो सका। डॉक्टरों के आने के इंतजार में उन्हें करीब तीन घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते हुए बेंच पर बैठना पड़ा।
दर्शना जैसी तमाम अन्य परेशानियां झेल रहे लोगों का कहना है कि जब सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष दिन निर्धारित किए गए हैं, तो उस दिन समय पर सभी संबंधित डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य क्यों नहीं की जाती? प्रशासनिक दावों और धरातल पर दिख रही हकीकत के बीच का यह अंतर आम जनता के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। बार-बार आने-जाने के कारण दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों के लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
"बुधवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए चिकित्सकों का आधिकारिक बोर्ड बैठता है। इसमें डॉक्टर पूरी गंभीरता से दिव्यांगों के स्वास्थ्य की जांच कर प्रक्रिया को पूरा करते हैं। कागजी कार्रवाई में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन हमारा पूरा प्रयास यह रहता है कि किसी भी दिव्यांगजन को अनावश्यक रूप से परेशानी का सामना न करना पड़े।" - डॉ. बिजेंद्र हुड्डा, कार्यक्रम नोडल अधिकारी
व्यवस्था सुधारने की मांग और प्रशासनिक उत्तरदायित्व
पानीपत लाइव की ग्राउंड पड़ताल से यह साफ जाहिर होता है कि कागजों में चलने वाली योजनाएं धरातल पर कितनी जटिल हो जाती हैं। जिला नागरिक अस्पताल प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है। सिंगल विंडो सिस्टम या एक ही हॉल में सभी संबंधित डॉक्टरों की संयुक्त बैठने की व्यवस्था करके इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और सरलीकृत किया जाए ताकि लोगों को अस्पताल के बार-बार चक्कर न काटने पड़ें।




