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पानीपत शहर

पानीपत के आईबी (एल) पब्लिक स्कूल में मूक अभिनय से बच्चों ने दिया पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश

पानीपत के आईबी एल पब्लिक स्कूल में आयोजित मूक अभिनय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और जल संचय का अनूठा संदेश दिया.

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
24 अक्टूबर 2026 को 01:07 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पानीपत के आईबी (एल) पब्लिक स्कूल में मूक अभिनय से बच्चों ने दिया पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •आईबी (एल) पब्लिक स्कूल में पेड़ बचाओ और जल बचाओ विषय पर मूक अभिनय का हुआ आयोजन।
  • •कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के नन्हे विद्यार्थियों ने बिना बोले हाव-भाव से उकेरी पर्यावरण की गंभीर स्थिति।
  • •पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और पानी की बर्बादी के परिणामों को मंच पर जीवंत रूप से किया गया प्रस्तुत।
  • •प्रधानाचार्या अमिता चोपड़ा ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए पर्यावरण को जीवन का आधार बताया।

पानीपत के प्रतिष्ठित आईबी (एल) पब्लिक स्कूल परिसर में शनिवार को बाल मन की गहराई से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यालय प्रांगण में 'पेड़ बचाओ, जल बचाओ' विषय आधारित मूक अभिनय प्रतियोगिताओं का विधिवत संचालन किया गया, जिसने उपस्थित सभी शिक्षकों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आधुनिक युग में लगातार विकराल होती पर्यावरण संबंधी समस्याओं के प्रति बाल अवस्था से ही भावी पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से इस रचनात्मक गतिविधि को रूपरेखा दी गई थी। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के भीतर एक सकारात्मक और संवेदनशीलता से परिपूर्ण शैक्षणिक माहौल देखने को मिला, जहां नन्हें कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से समाज को एक गहरा संदेश देने का प्रयास किया।

इस संपूर्ण रचनात्मक आयोजन में प्राथमिक वर्ग के तहत कक्षा तीसरी से लेकर पांचवीं तक के छोटे-छोटे विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विभिन्न प्रस्तुतियों के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आयोजन का मुख्य ध्येय बाल गोपालों के मन-मस्तिष्क में प्रकृति के प्रति प्रेम, वृक्षों की महत्ता और जल संरक्षण की अनिवार्य आवश्यकता को गहराई से स्थापित करना था। वर्तमान समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और जल संकट जैसी विकट चुनौतियां पूरी मानवता के सामने मुंह बाए खड़ी हैं, ऐसे में स्कूली स्तर पर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम अत्यंत प्रासंगिक और समाजोपयोगी साबित हो रहे हैं। पानीपत लाइव की ग्राउंड टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों से यह साबित कर दिया कि वे पर्यावरण के प्रति कितने संवेदनशील हैं।

मूक अभिनय के जरिए उकेरी गई पेड़ों और जल की पुकार

प्रतियोगिता का सबसे आकर्षक पहलू यह रहा कि इसमें भाग लेने वाले नन्हे-मुन्ने छात्रों ने बिना एक भी शब्द बोले, केवल अपने चेहरे के भावों, शारीरिक मुद्राओं और मूक अभिनय के बल पर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर बच्चों ने जिस कलात्मकता के साथ वनों की अंधाधुंध कटाई और पेयजल की बेहिसाब बर्बादी के दुष्परिणामों को दर्शाया, उसने वहां मौजूद हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। किसी ने पेड़ काटने से उजड़ते आशियानों और बेघर होते परिंदों का दर्द अपने अभिनय से बयां किया, तो किसी ने नल से बहती पानी की एक-एक बूंद को सहेजने की गुहार लगाई। छात्रों की इस निष्कपट और प्रभावशाली प्रस्तुति ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ की पीड़ा को कितनी गहराई से महसूस कर रहे हैं।

इस विशेष आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों और मार्गदर्शकों की भूमिका भी उतनी ही सराहनीय रही, जिन्होंने बच्चों को इस गंभीर विषय पर अभिनय करने के लिए न केवल प्रशिक्षित किया, बल्कि उनके भीतर छिपी कला को मंच प्रदान किया। विशेष तौर पर अध्यापिका प्रियंका के मार्गदर्शन में तैयार की गई प्रस्तुतियां इतनी जीवंत थीं कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इसके अलावा, पूरे कार्यक्रम के दौरान मंच का कुशल संचालन निधि पुनानी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी परिपक्व और प्रवाहमयी शैली से कार्यक्रम की गतिशीलता को बनाए रखा। विद्यार्थियों के इस सामूहिक प्रयास ने यह दिखा दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा और मंच मिले, तो वे समाज में बदलाव की एक मजबूत बयार ला सकते हैं।

विशेष विवरणतथ्य एवं जानकारी
आयोजन स्थलआईबी (एल) पब्लिक स्कूल, पानीपत
मुख्य विषयपेड़ बचाओ, जल बचाओ (पर्यावरण संरक्षण)
प्रतिभागी छात्रकक्षा तीसरी से पांचवीं तक के विद्यार्थी
विशेष प्रस्तुति मार्गदर्शनअध्यापिका प्रियंका
मंच संचालननिधि पुनानी
प्रमुख वक्ताअमिता चोपड़ा (प्रधानाचार्या)

विद्यालय प्रबंधन और शिक्षाविदों के विचार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या अमिता चोपड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए विद्यार्थियों के इस उत्कृष्ट और संवेदनशील प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि हमारे जीवन का वास्तविक आधार हरे-भरे पेड़ हैं और मनुष्य के बुनियादी अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी अनिवार्य शर्त बन चुका है। प्रधानाचार्या ने कहा किशोरावस्था और बाल्यकाल से ही यदि बच्चों में प्रकृति के प्रति आदर और संवेदनशीलता का भाव जागृत कर दिया जाए, तो भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण स्वतः हो जाता है। उन्होंने अध्यापकों की मेहनत की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार की सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों का होना न केवल विद्यार्थियों के बौद्धिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने में भी मददगार साबित होता है। पानीपत के शैक्षणिक परिदृश्य में आईबी (एल) पब्लिक स्कूल द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य संस्थानों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए मूक अभिनय के इस माध्यम नेता केवल विद्यालय के भीतर बल्कि अभिभावकों के बीच भी यह संदेश प्रसारित किया कि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए आज ही पर्यावरण को संरक्षित करना होगा। इस तरह के कार्यक्रम समाज में वैचारिक परिवर्तन लाने की दिशा में एक ठोस और सकारात्मक शुरुआत माने जाते हैं।

"पेड़ हमारे जीवन का मुख्य आधार हैं और जल हमारे अस्तित्व के लिए सबसे अनिवार्य तत्व है। बच्चों ने मूक अभिनय के माध्यम से जो संदेश दिया है, वह समाज की आंखें खोलने के लिए काफी है। हमें मिलकर प्रकृति को सहेजना होगा।" - अमिता चोपड़ा, प्रधानाचार्या, आईबी (एल) पब्लिक स्कूल

पानीपत के स्थानीय परिवेश पर प्रभाव और भविष्य की आवश्यकता

पानीपत जिले में औद्योगिक विकास और शहरीकरण के बढ़ते दबाव के कारण पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण संतुलन और भूजल स्तर पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा है। ऐसे समय में जब शहर कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रहा है और जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है, स्कूली स्तर पर इस तरह के जागरूकता अभियान सामाजिक चेतना जगाने का कार्य करते हैं। जबोधर और कम उम्र के बच्चे जब मंच के माध्यम से पानी बचाने और पेड़ लगाने की अपील करते हैं, तो इसका मनोवैज्ञानिक असर सीधे तौर पर बड़े बुजुर्गों और अभिभावकों के दिलो-दिमाग पर पड़ता है। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि पानीपत की युवा पीढ़ी अपनी प्राकृतिक धरोहर के प्रति जागरूक हो रही है और आने वाले कल की चुनौतियों से निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रही है।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का भी मानना है कि केवल सरकारी नीतियों या कागजी योजनाओं से पर्यावरण को नहीं बचाया जा सकता, जब तक कि इसमें जन-भागीदारी और जमीनी स्तर पर स्कूली बच्चों का जुड़ाव न हो। आईबी (एल) पब्लिक स्कूल के इस अनुकरणीय प्रयास ने पानीपत शहर के अन्य विद्यालयों को भी प्रेरित किया है कि वे किताबी ज्ञान से बाहर निकलकर व्यावहारिक और सामाजिक मुद्दों पर आधारित गतिविधियों को अपने पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं। आने वाले दिनों में यदि पानीपत जिले के प्रत्येक विद्यालय और संस्थान में इस प्रकार की रचनात्मक पहलों को बढ़ावा दिया जाए, तो वह दिन दूर नहीं जब जिले का भूजल स्तर और हरित आवरण दोनों ही बेहतर स्थिति में लौट सकेंगे।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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