पानीपत लाइव ब्यूरो: पानीपत और जींद को आपस में जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित हाईवे के चारमार्गीय (फोरलेन) निर्माण का रास्ता एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में फंस गया है। जींद-पानीपत हाईवे के निर्माण की इस महत्वकांक्षी योजना में लगातार हो रही देरी से न केवल प्रशासनिक अमला चिंतित है, बल्कि पानीपत और आसपास के जिलों के आम नागरिक भी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। हालांकि इस परियोजना से जुड़ी तमाम प्रशासनिक और वित्तीय औपचारिकताएं काफी पहले पूरी की जा चुकी हैं, लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित एक याचिका के चलते धरातल पर काम पूरी तरह रुका हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर अब आगामी 28 अक्टूबर को अदालत में अहम सुनवाई होनी है, जिस पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि जींद-पानीपत रोड केवल दो शहरों को जोड़ने वाला मार्ग नहीं है, बल्कि यह सड़क आधे हरियाणा को उत्तर प्रदेश और व्यस्त जीटी रोड (National Highway) से जोड़ने वाला एक बेहद अहम गलियारा है। इस रूट पर हर समय भारी संख्या में व्यावसायिक और निजी वाहनों का दबाव रहता है। इसके बावजूद वर्तमान में यह सड़क काफी संकरी है, जिसके कारण आए दिन भयानक जाम और भीषण सड़क हादसे होते रहते हैं। स्थानीय निवासियों और व्यापारिक संगठनों द्वारा इस मार्ग को चौड़ा करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब इस सड़क को चारमार्गीय बनाने की प्रक्रिया कागजों में तो आगे बढ़ी है, लेकिन इसके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा पेड़ों की कटाई बनी हुई है। इस परियोजना के तहत जींद और सफीदों के बीच आने वाले करीब छह हजार पेड़ों को काटा जाना आवश्यक है।
पेड़ों की भरपाई और वैकल्पिक जमीन पर उठे सवाल
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए हरियाणा और पंजाब में पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट की कड़ी रोक है। इसी कानूनी दायरे के कारण सरकार को पेड़ों के विकल्प के रूप में वनीकरण के लिए जमीन तलाशने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। सरकार ने काटे जाने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए जिला के 3 गांवों में वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई है। इसमें अलेवा खंड का बधाना गांव भी शामिल है। हालांकि, स्थानीय जानकारों और पर्यावरणविदों द्वारा इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि प्रशासन द्वारा जहां जमीन उपलब्ध कराई गई है, वह सफीदों रोड से काफी दूरी पर स्थित है। इस भौगोलिक दूरी और प्रशासनिक समन्वय की कमी के चलते इस योजना की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
| परियोजना का विवरण | स्थिति एवं मुख्य बिंदु |
|---|---|
| मार्ग का नाम | जींद-पानीपत हाईवे (फोरलेन परियोजना) |
| दूरी और महत्व | आधे हरियाणा को यूपी और जीटी रोड से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग |
| बाधा का कारण | हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर रोक और लंबित याचिका |
| अगली कोर्ट तारीख | 28 अक्टूबर |
| योजना की अवधि | पिछले लगभग 7 वर्षों से अटकी हुई है परियोजना |
| वित्तीय स्थिति | केंद्रीय रोड फंड से राशि पहले ही जारी हो चुकी है |
7 साल से फाइलों में कैद है योजना, जनता में बढ़ रहा आक्रोश
पानीपत और जींद के बीच यात्रा करने वाले आम लोगों का कहना है कि यह महत्वकांक्षी योजना पिछले करीब 7 साल से फाइलों में कैद होकर रह गई है। इस रोड को चौड़ा करने की घोषणा तत्कालीन मनोहर लाल सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान की गई थी। इसके बाद एक लंबी अवधि तक तो केवल वन विभाग को पौधे लगाने या पेड़ रोपण के लिए उपयुक्त जमीन ही नहीं मिल सकी थी। स्थिति यह थी कि सरकार ने एक बार फरीदाबाद जिले में भी इसके एवض में जमीन देने की योजना पर विचार किया था, जो अपने आप में एक अजीब प्रशासनिक निर्णय साबित हुआ था। इस देरी के कारण परियोजना की लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका सीधा असर जनता के टैक्स के पैसों पर पड़ रहा है।
राहत की बात यह है कि इस सड़क के निर्माण के लिए केंद्रीय रोड फंड (Central Road Fund) से भारी-भरकम राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। इसके लिए टेंडर और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं भी पूरी हो चुकी हैं। लेकिन अब अदालत में मामला विचाराधीन होने के कारण निर्माण एजेंसियों के हाथ बंधे हुए हैं। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अदालत के समक्ष इस सड़क को चौड़ा करने की अनिवार्य आवश्यकता और जनहित से जुड़े पहलुओं को रखते हुए अपना विस्तृत पक्ष दाखिल किया जा चुका है। अब आगामी 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर ही यह तय होगा कि पानीपत-जींद हाईवे के निर्माण का रास्ता कब तक साफ हो पाता है।




