पानीपत शहर की स्वच्छता व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के लिए नगर निगम प्रशासन ने एक बार फिर वैकल्पिक मार्ग अपनाया है। शहर के विभिन्न जोनों में कचरा उठाने और साफ-सफाई के लिए तैयार किया गया पांच करोड़ रुपये का पांच वर्षीय वृहद प्रस्ताव पिछले तीन महीनों से शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशालय में स्वीकृति की प्रतीक्षा में लंबित है। इस बीच, वर्तमान में कार्यरत दोनों सफाई एजेंसियों पीसीसी और आईएनडी का अनुबंध आगामी 31 दिसंबर को समाप्त होने जा रहा है। पिछली बार समयानुसार प्रक्रिया पूरी न होने पर नगर निगम हाउस की बैठक में खासा विरोध देखने को मिला था, जिससे प्रशासनिक अमले ने सीख लेते हुए इस बार समय रहते ही अंतरिम व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
इसी क्रम में निगम ने आगामी चार महीनों के लिए एक नया और अल्पकालिक टेंडर जारी किया है, जिसके तहत मुख्य मार्गों की मैकेनाइज्ड यानी मशीनीकृत सफाई के साथ-साथ भीतरी वार्डों व गलियों की मैनुअल सफाई भी सुनिश्चित की जाएगी। इस चार महीने की अवधि के दौरान करीब 10 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें प्रतिमाह लगभग ढाई करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने की संभावना है। इस अल्पकालिक टेंडर में भाग लेने वाली इच्छुक एजेंसियों के लिए 25 हजार रुपये टेंडर शुल्क और 20 लाख रुपये की भारी-भरकम बयाना राशि (सिक्योरिटी) जमा कराना अनिवार्य किया गया है, जबकि इस बोली की कुल वैधता 180 दिन तय की गई है।
विस्तृत टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी तथा वित्तीय बोलियों की तिथियां
प्रशासनिक पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए नगर निगम कार्यालय ने पूरी प्रक्रिया का खाका तैयार कर लिया है। आगामी 30 अक्टूबर को दोपहर ठीक दो बजे देवी लाल कॉम्प्लेक्स स्थित नगर निगम के मुख्य सभाकक्ष में एक विशेष प्री-बिड मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाली संभावित एजेंसियों के मन में उठने वाले तकनीकी सवालों और शंकाओं का संतोषजनक समाधान करना है। इसके पश्चात, सभी निर्धारित नियमों को पूरा करते हुए 16 नवंबर को दोपहर के बाद तकनीकी और वित्तीय बोलियों को आधिकारिक रूप से खोला जाएगा, जिसके आधार पर सबसे योग्य एजेंसी का चयन किया जाएगा।
वर्तमान में पीसीसी और आईएनडी एजेंसियों को शहर के चार अलग-अलग जोनों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मई 2024 में इन एजेंसियों का मूल अनुबंध पूरा हो चुका था, जिसके बाद से नए टेंडर की प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण इनके अनुबंध को हर बार कुछ समय के लिए बढ़ाया जाता रहा है। मौजूदा स्थिति में दोनों एजेंसियों को प्रतिमाह लगभग सवा तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। जब तक निदेशालय से पांच साल के दीर्घकालिक एवं बड़े प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक यह चार महीने की व्यवस्था ही शहर की साफ-सफाई का मुख्य आधार रहेगी।
| विषय / विवरण | वर्तमान स्थिति / आंकड़े |
|---|---|
| लंबित मुख्य प्रस्ताव | पांच वर्ष, 40 करोड़ रुपये (निदेशालय में विचाराधीन) |
| अस्थायी टेंडर अवधि | चार महीने (अनुमानित लागत: 10 करोड़ रुपये) |
| वर्तमान एजेंसियां | पीसीसी और आईएनडी (अनुबंध समाप्ति: 31 दिसंबर) |
| वर्तमान मासिक भुगतान | लगभग 3.25 करोड़ रुपये |
| अस्थायी टेंडर मासिक खर्च | लगभग 2.50 करोड़ रुपये |
| सिक्योरिटी राशि (बयाना) | 20 लाख रुपये |
| प्री-बिड बैठक तिथि | 30 अक्टूबर, दोपहर 2:00 बजे (देवी लाल कॉम्प्लेक्स) |
| तकनीकी व वित्तीय बोली तिथि | 16 नवंबर, दोपहर बाद |
स्थानीय पार्षदों की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम पर वार्ड के जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी स्पष्ट राय रखी है। वार्ड-21 के पार्षद संजीव दहिया का कहना है कि शहरी क्षेत्र में स्वच्छता जैसी बुनियादी सेवा में किसी भी प्रकार का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि निगम प्रशासन द्वारा समय रहते वैकल्पिक टेंडर प्रक्रिया शुरू करने से वार्ड स्तर पर साफ-सफाई का कार्य बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा और आधुनिक मशीनों के साथ पारंपरिक तरीकों के मेल से अंदरूनी गलियों तक चमक दिखाई देगी। वहीं, वार्ड-7 के पार्षद अशोक कटारिया ने इस कदम को तात्कालिक राहत तो बताया, लेकिन साथ ही जोर दिया कि शहर के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान के लिए पांच साल के प्रस्ताव को जल्द से जल्द निदेशालय से मंजूरी मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक अनिश्चितताओं से बचा जा सके।
नगर निगम के आयुक्त डॉ. पंकज ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्वच्छता व्यवस्था को निर्बाध रूप से चलाने के लिए पांच साल का वृहद प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया था, जिस पर अंतिम स्वीकृति अभी आनी शेष है। चूंकि पुरानी एजेंसियों का कार्यकाल वर्ष के अंत में समाप्त हो रहा है, इसलिए शहरवासियों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाने और नागरिक सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चार महीने का यह नया टेंडर निकाला गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाया जाएगा ताकि शहर की स्वच्छता पर कोई आंच न आए।
"सफाई व्यवस्था के निरंतर संचालन के लिए पांच साल का प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया था, जिसकी मंजूरी अभी प्रतीक्षित है। नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलती रहें और कार्य प्रभावित न हो, इसलिए चार महीने का नया टेंडर लगाया गया है जिसे नियमानुसार जल्द पूरा कराया जाएगा।" - डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम पानीपत
स्वच्छता प्रबंधन और शहर की नागरिक व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव
पानीपत जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले शहर में कचरा प्रबंधन एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। यदि समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी न हो, तो शहर की सड़कों पर कूड़े के ढेर लग जाते हैं जिससे महामारी फैलने का खतरा पैदा हो जाता है। पिछले वर्षों में टेंडर में देरी के कारण उत्पन्न हुए गतिरोध से सबक लेते हुए इस बार नगर निगम ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है। चार महीने की यह अवधि निगम प्रशासन को एक तरफ जहां तात्कालिक राहत देगी, वहीं दूसरी तरफ निदेशालय स्तर पर पांच साल के बड़े टेंडर की फाइल को क्लियर करवाने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाएगा।
आगामी दिनों में होने वाली प्री-बिड मीटिंग और 16 नवंबर को खुलने वाली बोलियों से यह साफ हो जाएगा कि कौन सी एजेंसी आगामी चार महीनों तक पानीपत की सड़कों की बागडोर संभालती है। पार्षदों और नागरिकों की मांग है कि जो भी नई एजेंसी आए, उसकी जवाबदेही तय की जाए ताकि तय मानकों के अनुसार शहर की हर गली और सड़क की सफाई हो सके। पानीपत लाइव की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर भले ही दीर्घकालिक नीति में विलंब हुआ हो, परंतु स्थानीय स्तर पर जनता को राहत देने के लिए फौरी कदम उठा लिए गए हैं।




