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धान की फसल का भुगतान अटका, त्योहार से पहले पानीपत के किसानों की बढ़ी मुश्किलें

पानीपत की मंडियों में धान बेचने के बाद भी लाखों का भुगतान नहीं मिलने से अन्नदाताओं की दिवाली फीकी पड़ने की आशंका है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
3 नवंबर 2026 को 11:45 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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धान की फसल का भुगतान अटका, त्योहार से पहले पानीपत के किसानों की बढ़ी मुश्किलें
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •जिले की मंडियों में अब तक लाखों मीट्रिक टन धान की हो चुकी है बंपर आवक
  • •खरीद एजेंसियों के ढुलमुल रवैये से करोड़ों रुपये की राशि अभी तक है बकाया
  • •त्योहारी सीजन के बीच बैंकों और आढ़तियों के चक्कर काटने को विवश किसान
  • •प्रशासन ने जल्द ही शेष राशि खातों में ट्रांसफर कराने के दिए हैं निर्देश

पानीपत जिले के कृषि बाज़ारों में इस समय खरीफ की फसल की आवक चरम पर है, लेकिन अन्नदाताओं के चेहरों पर खुशी की बजाय गहरी चिंता साफ झलक रही है। धान की उपज मंडियों में बेचने के हफ्तों बीत जाने के बावजूद कई किसानों के खातों में मेहनत की गाढ़ी कमाई नहीं पहुंच पाई है। त्योहारों का सीजन नजदीक है और घरों में उत्सव की तैयारियां चल रही हैं, परंतु भुगतान न मिलने के कारण इस बार कई परिवारों में रोशनी के पर्व पर मायूसी छाने का अंदेशा बना हुआ है। सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर किए जा रहे तमाम दावों के विपरीत धरातल पर व्यवस्थाएं लड़खड़ाई नजर आ रही हैं, जिससे ग्रामीण अंचल में रोष व्याप्त है।

स्थानीय स्तर पर कृषि जिंसों के सुचारु संचालन और विपणन को लेकर तमाम बड़े दावे किए जाते हैं, मगर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती दिखती है। मंडियों के अंदर किसानों द्वारा लाई गई उपज का समयबद्ध उठान न हो पाना इस पूरी समस्या की मुख्य जड़ बना हुआ है। जब तक गोदामों या मिलों के लिए धान का उठान नहीं होता, तब तक खरीद का पोर्टल आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता और भुगतान अटक जाता है। इस तकनीकी और प्रशासनिक पेंच के बीच सीधा पिसने वाला वर्ग देश का मेहनतकश किसान है, जो अपनी ही फसल के दाम पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।

मंडियों में उमड़ी धान की बंपर आवक और तकनीकी बाधाएं

जिले की प्रमुख अनाज मंडियों में इन दिनों विशेषकर 1121 बासमती किस्म की आवक में भारी तेजी दर्ज की जा रही है। मंडियों के प्रांगण धान की बोरियों और ढेरों से अटे पड़े हैं, जिससे पैर रखने की भी जगह मुश्किल से मिल पा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीजन के दौरान मंडियों में कुल मिलाकर दो लाख मीट्रिक टन से अधिक धान आ चुका है, जिसमें बासमती की विभिन्न श्रेणियां भी शामिल हैं। खरीद एजेंसियों द्वारा करोड़ों रुपये के सौदे किए जा चुके हैं और बड़ा हिस्सा चुकाया भी जा चुका है, फिर भी एकमुश्त राशि अभी तक अटकने से प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

बावजूद इसके कि कई करोड़ का भुगतान जारी किया जा चुका है, करोड़ों रुपये की राशि अब भी कागजों और पोर्टलों के बीच झूल रही है। इसराना और समालखा समेत विभिन्न उपमंडलों की मंडियों में किसानों का दर्द खुलकर सामने आ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी फसल को बेचने के लिए कड़ा परिश्रम किया, लेकिन अब उसी फसल का मूल्य प्राप्त करने के लिए उन्हें आढ़तियों और बैंकों की चौखट पर मिन्नतें करनी पड़ रही हैं। बच्चों के लिए नए वस्त्र और दीपावली की अन्य बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए उनके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं है, जिससे पारिवारिक स्तर पर भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

विवरणआंकड़े / स्थिति
कुल धान आवक (अब तक)2,13,162.5 मीट्रिक टन
1121 बासमती आवक25,509 मीट्रिक टन
खरीदा गया 1121 धान20,162 मीट्रिक टन
एजेंसियों द्वारा कुल खरीद24.15 करोड़ रुपये
अब तक हुआ भुगतान20.86 करोड़ रुपये
बकाया लंबित राशि3.28 करोड़ रुपये से अधिक

किसान संगठनों और व्यापारिक वर्ग की तीखी प्रतिक्रिया

व्यापार मंडलों और आढ़ती एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी नाराजगी व्यक्त की है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते एजेंसियों ने ढुलाई और उठान के कार्य में तेजी दिखाई होती, तो आज इस तरह की विकट स्थिति उत्पन्न नहीं होती। मंडियों में काम करने वाले व्यापारियों का भी मानना है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकती। त्योहारी सीजन के समय किसानों के खातों का खाली रहना स्थानीय आर्थिकी पर भी विपरीत असर डालता है, क्योंकि ग्रामीण क्रय शक्ति कम होने से बाजार की चमक फीकी पड़ जाती है.

दूसरी ओर, किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर जब प्रशासनिक अमले से प्रतिक्रिया जानी गई, तो उच्चाधिकारियों की तरफ से स्थिति को जल्द नियंत्रित करने का आश्वासन दिया गया है। संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारियों का दावा है कि वे पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखे हुए हैं। खरीद एजेंसियों और बैंकों के प्रबंधकों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं ताकि किसी भी सूरत में किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। प्रशासन का कहना है कि शीघ्र ही सभी औपचारिकताएं पूरी करवाकर बकाया राशि सीधे पात्र किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी जाएगी ताकि वे अपने परिवार के साथ हर्षोल्लास से पर्व मना सकें।

"धान बेचने के पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी हमारी फसल का उठान नहीं हुआ है, जिससे भुगतान अटका पड़ा है। पर्व के इस मौके पर जेब खाली होना हमारे लिए बेहद कष्टदायक है।" - राममेहर सिंह, स्थानीय किसान

आगे की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और व्यवस्थागत सुधार की जरूरत

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजी व्यवस्थाओं और धरातलीय क्रियान्वयन के बीच एक बड़ा अंतराल अब भी मौजूद है। जब तक खरीद प्रक्रिया से जुड़े हर एक चरण—चाहे वह तौल हो, पोर्टल पर एंट्री हो, या फिर ट्रकों द्वारा उठान हो—को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध नहीं बनाया जाता, तब तक अन्नदाताओं का शोषण और परेशानी रुकने वाली नहीं है। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की देरी किसी भी सूरत में न दोहराई जाए, ताकि किसानों का विश्वास सरकारी तंत्र पर से न डगमगाए।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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