पानीपत जिले के ग्रामीण इलाकों में कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एग्री स्टैक फार्मर पंजीकरण अभियान को और अधिक गति दे दी है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के प्रत्येक अन्नदाता की डिजिटल पहचान स्थापित करना और उनके कृषि भूमि के रिकॉर्ड को ऑनलाइन मंच पर उपलब्ध कराना है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता प्राप्त करने में कोई अड़चन न आए।
जिला सचिवालय के सभागार में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस अभियान की वर्तमान स्थिति का बारीकी से जायजा लिया गया। प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जिले भर में अब तक कुल 27,799 किसानों ने अपनी डिजिटल प्रोफाइल का पंजीकरण पूरा कर लिया है। हालांकि, निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण रूप से हासिल करने के वास्ते अभी भी 18,210 किसानों का पंजीकरण किया जाना बाकी है, जिसे लेकर अधिकारियों ने कमर कस ली है।
गांवों में मुनादी और डिजिटल माध्यमों से बढ़ाई जाएगी जागरूकता
बाकी बचे हुए किसानों का पंजीकरण समय पर पूरा हो सके, इसके लिए जिला प्रशासन ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। रणनीति के तहत जिले के सभी गांवों में विशेष रूप से मुनादी करवाई जाएगी ताकि जिन किसानों ने अभी तक अपना पंजीकरण नहीं कराया है, वे तुरंत इस प्रक्रिया को पूरा कर सकें। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर बनाए गए विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी किसानों को इस मुहिम के प्रति जागरूक किया जा रहा है ताकि वे बिना किसी भ्रम के आगे आएं।
इस अभियान को धरातल पर पूरी तरह सफल बनाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं का भी भरपूर सहयोग लिया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी गांवों के सरपंचों और नंबरदारों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के पात्र किसानों को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने में प्रशासनिक टीमों की मदद करें। स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी से किसानों तक यह संदेश तेजी से पहुंचेगा और वे नजदीकी जनसेवा केंद्रों या संबंधित विभागों के माध्यम से अपनी प्रक्रिया पूरी करवा सकेंगे।
| पंजीकरण विवरण | आंकड़े / स्थिति |
|---|---|
| कुल पीएम किसान पंजीकृत किसान | 46 हजार से अधिक |
| अब तक पूरे हुए एग्री स्टैक पंजीकरण | 27,799 किसान |
| शेष बचे हुए किसानों की संख्या | 18,210 किसान |
| प्रमुख प्रशासनिक सहयोगी | सरपंच और नंबरदार |
प्रशासनिक अधिकारियों ने की समीक्षा, पारदर्शिता पर जोर
जिला सचिवालय में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे तय समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत पंजीकरण का कार्य हर हाल में पूरा करवाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आधुनिक प्रणाली के लागू होने से कृषि क्षेत्र में बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और शासन की हर योजना का लाभ सीधे पात्र किसान के बैंक खाते व डिजिटल वॉलेट तक पहुंचेगा।
बैठक में जिले के तमाम प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें एसडीएम मनदीप कुमार, समालखा एसडीएम अमित कुमार, इसराना एसडीएम नवदीप नैन, नगराधीश टीनू पोसवाल और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. बलवंत सहारण प्रमुख रूप से शामिल थे। इन सभी अधिकारियों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में चल रहे पंजीकरण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आश्वस्त किया कि ग्रामीण इलाकों में टीमों की सक्रियता और बढ़ाई जाएगी।
"एग्री स्टैक के माध्यम से किसानों की डिजिटल पहचान और भूमि का सटीक रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचेगा। सभी शेष किसानों से अपील है कि वे जल्द से जल्द अपना पंजीकरण करवाएं।" - जिला प्रशासन, पानीपत
किसानों के भविष्य और सरकारी योजनाओं पर सीधा प्रभाव
वर्तमान में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पानीपत जिले के भीतर 46 हजार से अधिक किसान पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग साठ प्रतिशत किसानों ने अपनी डिजिटल पहचान का खाका तैयार करवा लिया है। शेष किसानों का डेटाबेस तैयार होने से भविष्य में बीज, खाद, सब्सिडी और अन्य कृषि अनुदान प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रशासन की यह पहल न केवल कृषि विभाग के डेटा को दुरुस्त करेगी बल्कि किसानों को एक मजबूत डिजिटल पहचान भी प्रदान करेगी। पानीपत लाइव ब्यूरो की यह ग्राउंड रिपोर्ट दर्शाती है कि यदि ग्रामीण स्तर पर सरपंचों और नंबरदारों का सहयोग इसी तरह मिलता रहा, तो जल्द ही जिले में शत-प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र के किसानों का भविष्य और अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बन सकेगा।




