हरियाणा के परिवहन और सड़क ढांचे को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भिवानी जिले में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए फोरलेन बाईपास प्रोजेक्ट की दिशा में काम तेज हो गया है। इस महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना के अंतर्गत अवार्ड प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से प्रस्तावित इस रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने से न केवल स्थानीय नागरिकों को शहर के भीतर लगने वाले ट्रैफिक जाम से स्थायी मुक्ति मिलेगी, बल्कि आसपास के जिलों और राज्यों से आने वाले यातायात का आवागमन भी अत्यंत सुगम हो जाएगा।
प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर इस परियोजना से जुड़े सभी आवश्यक चरणों को सिलसिलेवार तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रिंग रोड कनेक्टिविटी की इस कड़ी को पूर्ण करने के उद्देश्य से हांसी रोड से लेकर लोहारू रोड के बीच लगभग 11 किलोमीटर लंबे शेष बाईपास के निर्माण के लिए भूमि चिह्नीकरण का कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को संबंधित राजस्व विभाग से भी आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के वितरण का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टेंडर प्रक्रिया की तरफ अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए हैं।
| परियोजना का विवरण | मुख्य बिंदु एवं तथ्य |
|---|---|
| कुल अनुमानित लागत | लगभग 800 करोड़ रुपये |
| नया प्रस्तावित हिस्सा | हांसी रोड से लोहारू रोड (11 किलोमीटर) |
| रिंग रोड की कुल लंबाई | 41 किलोमीटर फोरलेन |
| प्रमुख नए बाईपास | लोहानी (2.7 किमी), जुई (5.5 किमी), लोहारू (10.8 किमी) |
| संभावित लाभ | समय की बचत (लगभग 45 मिनट), भारी वाहनों की नो-एंट्री |
इस वृहद सड़क परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल स्थानीय यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी पंख लगेंगे। अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। राजस्व विभाग द्वारा किसानों और उनकी जमीनों को चिह्नित कर उसका ड्राफ्ट संबंधित प्राधिकरण को सौंप दिया गया है। गजट नोटिफिकेशन की औपचारिकताएं पूरी होने के तुरंत बाद किसानों के बैंक खातों में मुआवजा राशि सीधे ट्रांसफर किए जाने की पुख्ता तैयारी है। वित्तीय मोर्चे पर यह प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा, जिससे तय समयसीमा के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा किया जा सके।
"भिवानी, लोहानी, जुई और लोहारू बाइपास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अधिकांश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संबंधित किसानों को मुआवजा राशि के जल्द भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी।" - हिमेंद्रा सिंह, परियोजना निदेशक (पीडी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
इस बाईपास नेटवर्क के निर्माण से आम जनता और वाहन चालकों के सफर में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। राजस्थान, गुजरात, दिल्ली के साथ-साथ हिसार, जींद और रोहतक की ओर आने-जाने वाले चालकों को अब शहर के घनी आबादी वाले इलाकों से नहीं गुजरना पड़ेगा। भारी वाहनों को भिवानी शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता न होने से सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और दुर्घटनाओं की आशंका न्यूनतम होगी। जींद और हिसार से आने वाले भारी वाहन सीधे इस नए बाईमार्ग से होते हुए लोहारू और दादरी हाईवे मार्ग तक पहुंच सकेंगे। इस वैकल्पिक मार्ग के उपयोग से यात्रियों के लगभग 45 मिनट के सफर के समय की बचत होगी और उन्हें 41 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने के बजाय महज 11 किलोमीटर के सफर में ही अपने गंतव्य की ओर जाने का विकल्प मिल जाएगा।
आगामी समय में इस आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकसित होने से क्षेत्र के भू-मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी। दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709ई को भिवानी से लोहारू तक फोरलेन के रूप में विकसित करने की इस योजना से राजस्थान के राजगढ़ से लेकर पिलानी, लोहारू, भिवानी, रोहतक और गोहाना होते हुए पानीपत तक का सफर करने वाले यात्रियों को एक सहज और निर्बाध राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारा प्राप्त होगा। स्थानीय स्तर पर व्यापारिक और परिवहन गतिविधियों के लिहाज से यह पहल मील का पत्थर साबित होगी, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच आर्थिक संपर्क और अधिक मजबूत होगा।




