पानीपत शहर स्थित एसडी विद्या मंदिर सिटी के प्रांगण में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की ओर से 'सुरक्षित बचपन अभियान' के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को उनके मौलिक अधिकारों, बाल सुरक्षा, व्यक्तिगत शारीरिक सुरक्षा तथा लैंगिक अपराधों (पॉक्सो एक्ट) से बचाव के प्रति व्यावहारिक रूप से सचेत करना रहा।
सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि उन्हें किसी भी परिस्थिति में असुरक्षा, अनुचित स्पर्श या भय का अहसास हो, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के अपने माता-पिता, शिक्षकों अथवा किसी अन्य विश्वसनीय व्यक्ति के समक्ष बात रखें। इस महत्वपूर्ण आयोजन में न्यायपालिका, बाल कल्याण समिति, पुलिस साइबर सेल और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी देखने को मिली।
कार्यक्रम का आयोजन व प्रशासनिक गरिमा
यह जागरूकता शिविर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष केडी शर्मा, जिला कानूनी साक्षरता समन्वयक डॉ. हितेश चंद शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता, पैनल अधिवक्ता सक्षम शर्मा, पुलिस साइबर सेल थाना प्रभारी सोमबीर और मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता रवि ने उपस्थित रहकर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया।
संबोधन के दौरान वक्ताओं ने किशोरावस्था की नाजुक उम्र में बनने वाली मित्रता और सामाजिक संबंधों के प्रति बेहद सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि किसी भी सहपाठी या बाहरी व्यक्ति के अनुचित दबाव, लालच या बहकावे में न आएं। यदि कोई उन्हें डराने या मानसिक रूप से दबाने का प्रयास करे, तो उसकी सूचना तत्काल वरिष्ठजनों को देनी चाहिए।
| प्रमुख बिंदु | विवरण / जानकारी |
|---|---|
| कार्यक्रम का नाम | सुरक्षित बचपन अभियान जागरूकता सत्र |
| आयोजक संस्था | जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पानीपत |
| स्थान | एसडी विद्या मंदिर सिटी, पानीपत शहर |
| मुख्य वक्ता व विशेषज्ञ | अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पीयूष शर्मा, CWC चेयरमैन केडी शर्मा, साइबर SHO सोमबीर |
| मुख्य विषय | बाल अधिकार, पॉक्सो सुरक्षा, साइबर क्राइम, एआई दुरुपयोग व मानसिक स्वास्थ्य |
साइबर अपराध, एआई का दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य पर मंथन
साइबर सेल के थाना प्रभारी सोमबीर ने आधुनिक दौर में बढ़ते डिजिटल खतरों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को सतर्क किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जरिए बनाए जाने वाले भ्रामक, डीपफेक और आपत्तिजनक वीडियो व फोटो के खतरनाक पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, निजी तस्वीरों और सिम कार्ड का उपयोग अत्यधिक सावधानी से करें। अपनी कोई भी निजी जानकारी, ओटीपी या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को देना गंभीर कानूनी व व्यक्तिगत मुसीबत का कारण बन सकता है।
वहीं मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता रवि ने बाल शोषण के गंभीर मानसिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की हिंसा या शोषण की घटना से बच्चों के मस्तिष्क पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे वे चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression) और विभिन्न मनोविकृतियों का शिकार हो सकते हैं। इसलिए शुरुआती स्तर पर ही सही परामर्श और संबल मिलना बेहद आवश्यक है।
"शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सामाजिक कर्तव्यों और स्वयं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सक्षम व जागरूक बनाना भी है। ऐसे अभियान बच्चों में आत्मविश्वास भरते हैं।"
- जयश्री गर्ग, प्रधानाचार्या, एसडी विद्या मंदिर सिटी
प्रबंधन की उपस्थिति और भावी रणनीति
कार्यक्रम के अंत में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष केडी शर्मा ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी किसी भी समस्या या झिझक को माता-पिता के सामने खुलकर साझा करें और कोई भी बात न छिपाएं। विद्यालय की प्रधानाचार्या जयश्री गर्ग ने सभी अतिथियों का धन्यवाद व्यक्त किया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति के चेयरमैन सतीश चंद्रा, वाइस चेयरमैन ईश्वर गर्ग, ऑडिटर नीरज, सेक्रेटरी सुरेंद्र गुप्ता, एमएएसडी के अध्यक्ष अश्वनी मित्तल तथा एसडीवीएम हुडा के चेयरमैन तुलसी सिंगला विशेष रूप से मौजूद रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया गया कि पानीपत जिले के अन्य निजी व सरकारी विद्यालयों में भी इस तरह के 'सुरक्षित बचपन अभियान' लगातार चलाए जाएंगे ताकि हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिल सके।




