पानीपत जिले के मतलौडा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव सुताना के शाखा डाकघर में गाढ़ी कमाई जमा कराने वाले ग्रामीण वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार हो गए हैं। डाकघर की पासबुक में दर्ज जमा राशि और विभागीय कंप्यूटरीकृत ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्शाए गए आंकड़ों के बीच लाखों रुपये का भारी अंतर देखने को मिल रहा है। इस चौंकाने वाले मामले में अब पीड़ित परिवारों ने न्याय की आस में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की शरण ली है। ग्रामीण इलाकों में सरकारी बचत योजनाओं पर विश्वास करके अपनी जमा-पूंजी लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक बन गई है।
प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, सुताना उप-डाकघर में पदस्थ रहे तत्कालीन ग्रामीण डाक सेवक सह शाखा डाकपाल विजय कुमार के कार्यकाल के दौरान यह पूरा फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डाक विभाग द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में 7 अक्तूबर 2024 तक कुल 37 लाख 62 हजार 145 रुपये की सरकारी एवं उपभोक्ता राशि के गबन का खुलासा हुआ है। विभाग ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि संबंधित तत्कालीन डाकपाल ने सुसाइड नोट छोड़कर गबन की बात कबूल की थी। फिलहाल विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है और सभी प्रभावित खातों का मिलान किया जा रहा है।
शाखा डाकघर सुताना में सामने आए गड़बड़ी के तीन प्रमुख मामले
सुताना गांव के पीड़ितों ने अलग-अलग शिकायतों के जरिए अपनी आपबीती आयोग के सामने रखी है। इन मामलों में बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना से लेकर बुजुर्ग महिलाओं के बचत खाते तक शामिल हैं। पासबुक में शाखा डाकपाल की मुहर, हस्ताक्षर और जमा प्रविष्टियां तो मौजूद हैं, लेकिन जब उपभोक्ता मुख्य या थर्मल शाखा में पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। ऑनलाइन सर्वर पर उनकी जमा राशि नाममात्र की दिखाई दे रही थी।
| शिकायतकर्ता का नाम | खाते का प्रकार | पासबुक के अनुसार कुल जमा | ऑनलाइन रिकॉर्ड में मौजूद राशि | दावा की गई गबन राशि |
|---|---|---|---|---|
| राकेश (गीतिका व वेदिका) | सुकन्या समृद्धि खाता | ₹2,00,000 (लगभग जमा) | ₹42,685 (दोनों खाते मिलाकर) | ₹1,58,006 |
| रामरत्ती | बचत खाता (Savings Account) | ₹1,83,231 | ₹15,773 | ₹1,71,458 |
| नर्मला (पति धर्मपाल) | बचत खाता (Savings Account) | ₹2,17,169 | ₹32,605 | ₹1,84,564 |
सिलसिलेवार ढंग से समझिए कैसे हुआ उपभोक्ताओं की गाढ़ी कमाई का गबन
पहला मामला सुताना निवासी राकेश का है, जिन्होंने अपनी दो मासूम बेटियों गीतिका और वेदिका के सुरक्षित भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाते खुलवाए थे। गीतिका का खाता अप्रैल 2019 और वेदिका का खाता अक्तूबर 2020 में शुरू हुआ था। राकेश प्रति माह दोनों खातों में दो-दो हजार रुपये नियमित जमा करवाते थे। अक्तूबर 2023 तक पासबुक में प्रविष्टियां भी दर्ज थीं। परंतु जब वह थर्मल शाखा पहुंचे तो पता चला कि गीतिका के खाते में केवल 40,296 रुपये और वेदिका के खाते में मात्र 2,389 रुपये ही जमा हैं। राकेश ने 1,58,006 रुपये की रिकवरी और मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये के मुआवजे की मांग की है।
दूसरा मामला सुताना की ही रामरत्ती का है, जिन्होंने वर्ष 2017 में डाकघर में बचत खाता शुरू किया था। 9 अक्तूबर 2023 को पांच हजार रुपये जमा कराने के पश्चात उनकी पासबुक के अनुसार कुल बैलेंस 1,83,231 रुपये होना चाहिए था। किंतु ऑनलाइन सर्वर पर महज 15,773 रुपये का आंकड़ा दर्ज मिला। पीड़ित महिला ने 1,71,458 रुपये का अंतर स्पष्ट करते हुए ब्याज और मुआवजे सहित अपने पैसे वापस दिलाए जाने की गुहार लगाई है।
"ग्रामीण डाकघरों में जनता का भरोसा सरकारी सुरक्षा पर टिका होता है। सुताना शाखा में जिन उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी हुई है, उसकी गहनता से जांच की जा रही है। विभागीय प्रक्रिया के तहत साक्ष्यों का मिलान कर नियमानुसार त्वरित राहत प्रदान की जाएगी।" - डाक विभाग आधिकारिक पक्ष
प्रशासनिक जांच एवं कानूनी प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति
तीसरा मामला दिवंगत निर्मला देवी के खाते से जुड़ा है, जिनकी सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाने पर उनके पति धर्मपाल नामांकित उत्तराधिकारी के रूप में केस की पैरवी कर रहे हैं। निर्मला ने जनवरी 2022 में खाता खुलवाया था। जुलाई 2023 तक पासबुक प्रविष्टि के अनुसार 2,17,169 रुपये जमा थे, जबकि ऑनलाइन सिस्टम में केवल 32,605 रुपये दिखाए गए। इस तरह 1,84,564 रुपये का चूना लगाया गया। धर्मपाल का आरोप है कि डाकपाल हाथ से तो पासबुक में एंट्री कर देता था, लेकिन उस राशि को विभागीय मुख्य सर्वर में जमा ही नहीं करता था।
डाक विभाग ने उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष रखते हुए माना है कि सुताना शाखा में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला हुआ है। विभाग का कहना है कि तत्कालीन डाकपाल की कार्यप्रणाली के कारण यह स्थिति पैदा हुई और विभागीय स्तर पर फॉरेंसिक व ऑडिट जांच जारी है। आयोग इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें और दस्तावेजों का अवलोकन कर रहा है ताकि पीड़ितों को उनकी वास्तविक राशि ब्याज सहित दिलाई जा सके।




