मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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रेवाड़ी और अलवर जंक्शन पर यात्रियों को मिलेगा डिजिटल नेविगेशन का आधुनिक सहारा

उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल ने रेवाड़ी और अलवर जंक्शन पर यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल मार्गदर्शक और टच स्क्रीन कियोस्क लगाने की मंजूरी दी है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
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27 अक्टूबर 2026 को 03:57 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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रेवाड़ी और अलवर जंक्शन पर यात्रियों को मिलेगा डिजिटल नेविगेशन का आधुनिक सहारा
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर मंडल के रेवाड़ी और अलवर जंक्शन पर लगेंगे आधुनिक डिजिटल एक्सेस मैप व टच स्क्रीन कियोस्क।
  • •नागपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के सफल मॉडल की तर्ज पर तैयार की गई है यात्रियों की दुविधा दूर करने वाली यह विशेष तकनीक।
  • •मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगने वाले इन कियोस्क से क्यूआर कोड स्कैन कर यात्री सीधे अपने मोबाइल पर पा सकेंगे सही रास्तों की जानकारी।
  • •इसी चालू वित्तीय वर्ष के भीतर परियोजना को पूरा कर हजारों दैनिक रेल यात्रियों को तनावमुक्त सफर की बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद।

भारतीय रेलवे द्वारा स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही को सुगम और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। नागपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन की तर्ज पर अब उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले दो प्रमुख जंक्शनों—रेवाड़ी और अलवर पर अत्याधुनिक तकनीक का विस्तार होने जा रहा है। रेलवे प्रशासन ने इन दोनों स्टेशनों पर यात्रियों को भटकने से बचाने के लिए डिजिटल मार्गदर्शक और टच स्क्रीन कियोस्क स्थापित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के मूर्त रूप लेने से अनजान राहगीरों, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को प्लेटफॉर्म या अन्य सुविधाओं की तलाश में अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

इस संपूर्ण परियोजना के तहत दोनों जंक्शनों के मुख्य सर्कुलेटिंग एरिया यानी प्रवेश द्वार के बिल्कुल नजदीक इन डिजिटल कियोस्क को लगाया जाएगा। स्टेशन परिसर में कदम रखते ही यात्री इनका उपयोग करके अपनी जरूरत के गंतव्य तक का मार्ग तलाश सकेंगे। रेलवे अधिकारियों का लक्ष्य इसी चालू वित्तीय वर्ष के भीतर इस कार्य को पूरी तरह से धरातल पर उतारने का है, जिससे प्रतिदिन आवागमन करने वाले हजारों यात्रियों को आधुनिक नेविगेशन सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सके और उनका सफर अधिक आरामदायक बन सके।

डिजिटल तकनीक और इंटरैक्टिव लेआउट से लैस होंगे स्टेशन

नागपुर रेलवे स्टेशन पर पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित नेविगेशन तकनीक की तर्ज पर ही इन दोनों स्टेशनों पर भी व्यवस्था विकसित की जा रही है। यह डिजिटल मार्गदर्शक एक बेहद उन्नत इंटरैक्टिव टच स्क्रीन कियोस्क के रूप में कार्य करेगा, जिसके सॉफ्टवेयर में पूरे स्टेशन परिसर का विस्तृत 3डी और चित्रात्मक यानी पिक्टोग्राफिक लेआउट फीड रहेगा। स्क्रीन को अपनी उंगलियों से छूकर या फिर उस पर प्रदर्शित विशेष क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके यात्री प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, वेटिंग हॉल और विश्राम कक्ष की सटीक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

इतना ही नहीं, इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, केटरिंग स्टॉल और निकास द्वारों का सटीक रास्ता सीधे यात्रियों के मोबाइल फोन पर नेविगेट हो जाएगा। पारंपरिक तरीकों से पूछताछ करने या स्टेशन परिसर में रास्ता पूछते फिरने की मजबूरी अब इस तकनीक के आने से पूरी तरह खत्म हो जाएगी। विशेषकर भारी भीड़भाड़ वाले त्योहारी या व्यस्त समय के दौरान यह प्रणाली स्टेशन पर यात्रियों के आवागमन को सुचारू और व्यवस्थित बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होगी।

स्टेशन का नाममंडल एवं जोनस्थापित होने वाली सुविधासमयसीमा
रेवाड़ी जंक्शनउत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर मंडलडिजिटल एक्सेस मैप व टच स्क्रीन कियोस्कचालू वित्तीय वर्ष के अंत तक
अलवर जंक्शनउत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर मंडलडिजिटल एक्सेस मैप व टच स्क्रीन कियोस्कचालू वित्तीय वर्ष के अंत तक

वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में यात्रियों की सहूलियत सर्वोपरि

रेलवे प्रशासन का यह कदम यात्रियों के यात्रा अनुभव को पूरी तरह से बदलने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर मंडल के सीनियर डीसीएम भूपेश यादव ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि रेल यात्रियों के सफर को अधिक आरामदायक, आधुनिक और सुगम बनाने के लिए मंडल लगातार प्रयासरत है। नागपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाया गया डिजिटल मार्गदर्शक नेविगेशन पोर्टल अत्यधिक सफल साबित हुआ है, जिसे देखते हुए जयपुर मंडल के इन अहम जंक्शनों पर भी इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए रूपरेखा तैयार कर ली गई है। अधिकारियों का मानना है कि बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ डिजिटल पहलों का जुड़ना यात्रियों के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस तकनीक के सुचारू संचालन से यात्रियों के बहुमूल्य समय की बचत होगी और वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी ट्रेनों को पकड़ सकेंगे।

"रेल यात्रियों के सफर को अधिक आरामदायक, आधुनिक और सुगम बनाने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे का जयपुर मंडल लगातार प्रतिबद्ध है। नागपुर रेलवे स्टेशन की तर्ज पर रेवाड़ी और अलवर जंक्शन पर डिजिटल मार्गदर्शक लगाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर लिया गया है, जिसे इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।" - भूपेश यादव, सीनियर डीसीएम, उत्तर पश्चिम रेलवे (जयपुर मंडल)

दिव्यांग जनों और बुजुर्गों के लिए वरदान साबित होगी तकनीक

इस आधुनिक डिजिटल नेविगेशन व्यवस्था के शुरू होने से सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ उन यात्रियों को मिलेगा जो पहली बार इन स्टेशनों पर आ रहे हैं या जिन्हें तकनीकी जानकारी कम है। बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को अब ट्रेन के डिब्बे या टिकट घर तक पहुंचने के लिए अनगिनत लोगों से रास्ते की जानकारी नहीं पूछनी पड़ेगी। इसके अलावा, दिव्यांग जनों के लिए यह प्रणाली एक बड़े वरदान के रूप में कार्य करेगी, क्योंकि उन्हें व्हीलचेयर रैंप, सुलभ शौचालय और स्पेशल लिफ्ट की लोकेशन महज एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाएगी।

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रेलवे के स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की दिशा में इस तरह के डिजिटल इंटरवेंशन मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर इस प्रकार के प्रस्तावों का स्वीकृत होना और उन पर तेज गति से कार्य होना यह दर्शाता है कि भविष्य के रेलवे स्टेशन पूरी तरह से स्मार्ट और पैसेंजर-फ्रेंडली बनने की ओर अग्रसर हैं। आगामी दिनों में इन दोनों जंक्शनों पर लगने वाले इन कियोस्क के परिणाम अन्य स्टेशनों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेंगे।

प्रशासनिक और तकनीकी मोर्चे पर आगामी कदम

रेवाड़ी और अलवर जंक्शनों पर इस डिजिटल बुनियादी ढांचे को स्थापित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने सर्वे का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। सर्कुलेटिंग एरिया में बिजली की आपूर्ति, इंटरनेट कनेक्टिविटी और कियोस्क की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतिम चरण की तैयारियां चल रही हैं। रेलवे प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का इंस्टॉलेशन पूरा कर इसका ट्रायल रन शुरू किया जा सके, ताकि यात्रियों को बिना किसी तकनीकी बाधा के इस नई सुविधा का सीधा लाभ मिल सके।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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