पानीपत जिले के समालखा क्षेत्र में आयोजित किए जा रहे विशाल निरंकारी समागम में इस बार मानवता और निस्वार्थ समर्पण का एक अत्यंत प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला है। देश के दूरदराज हिस्सों से पहुंच रहे श्रद्धालुओं की सुविधा और अनुशासन को बनाए रखने के लिए विभिन्न राज्यों से स्वयंसेवक पहुंचे हैं, जिनमें महाराष्ट्र से आए सेवादारों के दल ने विशेष सुर्खियां बटोरी हैं। इस दल के करीब 700 सदस्यों ने समागम परिसर के अंतर्गत आने वाले सभी दस ब्लॉकों के विशाल लंगर हॉल की संपूर्ण कमान अपने हाथों में ले रखी है। सुबह की पहली किरण के साथ यानी आठ बजे से लेकर आधी रात बारह बजे तक यह पूरा दस्ता निरंतर अपनी डयूटी पर मुस्तैद रहकर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से भोजन कराने की पवित्र जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहा है।
समागम स्थल पर उमड़ने वाले भारी जनसैलाब और भीड़भाड़ के बावजूद लंगर प्रबंधन में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अफरातफरी का माहौल नजर नहीं आ रहा है। महाराष्ट्र से आए इन सेवादारों ने जिस उच्च कोटि के अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया है, वह हर आने वाले आगंतुक के लिए कौतूहल और प्रशंसा का विषय बना हुआ है। कोई स्वयंसेवक पूरी निष्ठा के साथ सब्जियों की कटाई के कार्य में जुटा है, तो कोई कतारबद्ध बैठे श्रद्धालुओं को गरमा-गरम दाल और रोटियां परोस रहा है। इसके अलावा, पेयजल की सुलभता, बर्तनों की सफाई और बुजुर्गों व महिलाओं के बैठने की समुचित व्यवस्था का जिम्मा भी इसी दल के युवा और बुजुर्ग सदस्य पूरी शिद्दत के साथ संभाल रहे हैं।
पद और प्रतिष्ठा को पीछे छोड़ अपनाई सादगी की राह
इस संपूर्ण आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि महाराष्ट्र से पहुंचे इस सेवा दल में कई ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति भी शामिल हैं जो अपने गृह राज्य में अत्यंत उच्च पदों पर आसीन हैं। दल के कई सदस्य जिला अदालतों में वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों और बड़ी सरकारी कंपनियों में उच्च जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। परंतु समागम की इस पावन भूमि पर कदम रखते ही वे अपनी तमाम पेशेवर उपलब्धियों, सामाजिक प्रतिष्ठा और भौतिक सुख-सुविधाओं को पूरी तरह भूल जाते हैं। यहां वे किसी वीआईपी संस्कृति का हिस्सा बनने के बजाय एक साधारण और आम सेवादार की भांति फर्श पर बैठकर कार्य करने में गर्व महसूस करते हैं।
इस दल में सेवा दे रहे सरकारी विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना है कि यहां कोई भी व्यक्ति किसी से बड़ा या छोटा नहीं है, बल्कि हर कोई एक ही परमपिता परमात्मा की संतान के रूप में मानवता की सेवा में समर्पित है। लंगर हॉल में आने वाले आम श्रद्धालु इन प्रतिष्ठित पदों पर बैठे लोगों को अपनी सहजता और विनम्रता से रोटियां सेकते और बर्तन साफ करते देख अभिभूत हो रहे हैं। यह दृश्य नई पीढ़ी को अहंकार त्यागकर मिलजुलकर काम करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक बहुत बड़ा और व्यावहारिक सबक सिखा रहा है.
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| आयोजन स्थल | समालखा (पानीपत, हरियाणा) |
| महाराष्ट्र से आए सेवादार | लगभग 700 स्वयंसेवक |
| मुख्य जिम्मेदारी | 10 ब्लॉकों के लंगर हॉल की व्यवस्था |
| सेवा का समय | प्रातः 8:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक |
| प्रमुख भागीदारी | अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी |
अनुभव साझा करते हुए सेवादारों ने बताई आत्मीय शांति की अनुभूति
सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर रहते हुए भी बरसों से इस आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़े सेवादारों का उत्साह देखते ही बनता है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में चालक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे शिवाजी महाले बताते हैं कि वे वर्ष 1993 से निरंतर निरंकारी समागमों से जुड़े चले आ रहे हैं। अपने परिवार के साथ गत 21 अक्टूबर को समागम में पहुंचे महाले का कहना है कि आगामी 28 अक्टूबर तक उनकी यह लंगर सेवा अनवरत जारी रहेगी। उनके अनुसार, यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन परोसने से जो आंतरिक संतुष्टि और आत्मिक आनंद प्राप्त होता है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी भौतिक सुख या ऐश्वर्य से नहीं की जा सकती है।
इसी प्रकार, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) में कार्यरत बाल चंद्र यादव ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार के सदस्य देश के किसी भी कोने में आयोजित होने वाले समागम में अपनी उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज कराते हैं। वर्ष 2000 से लगातार इस परंपरा का हिस्सा बन रहे यादव का मानना है कि अब यह सेवा कार्य उनके परिवार के संस्कारों का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि उनके बच्चे भी इसी सेवा भाव और आदर के संस्कारों के साथ बड़े हो रहे हैं, जो भविष्य में समाज निर्माण के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी साबित होंगे।
"हम अपने पद और ओहदे को भूलकर केवल मानवता की भलाई और सेवा में विश्वास रखते हैं। यहाँ मिलने वाली शांति अतुलनीय है।" - शिवाजी महाले, सेवादार
समागम व्यवस्था और स्थानीय जनजीवन पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव
समालखा में आयोजित इस वार्षिक समागम और महाराष्ट्र से आए सेवादारों के इस अनुकरणीय प्रदर्शन ने न केवल आयोजन को सफल बनाया है, बल्कि स्थानीय निवासियों और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं पर भी एक गहरी छाप छोड़ी है। पानीपत जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले आयोजनों में देश भर से आने वाले लोग आपसी भाईचारे और निस्वार्थ श्रमदान की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। लंगर हॉल में जाति, धर्म, पद और भाषा की सीमाओं से परे हटकर जिस प्रकार सभी लोग एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन ग्रहण कर रहे हैं, वह भारतीय संस्कृति की मूल भावना 'वसुधैव कुटुंबकम' को पूर्णतः चरितार्थ कर रहा है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने भी महाराष्ट्र के इस सेवा दल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। उनका मानना है कि आज की भौतिकवादी दौड़ में जहां लोग अपने निजी स्वार्थों तक सीमित रह जाते हैं, वहीं ऐसे आध्यात्मिक समागम समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी इस बात से संतुष्ट है कि इतनी भारी भीड़ के बावजूद स्वयंसेवकों के कड़े अनुशासन के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ रहा है, और सारा कार्यक्रम अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहा है।




