हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। स्टेट फाइनेंस कमीशन के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए सिरसा जिले की ग्रामीण विकास योजनाओं को हरी झंडी मिल गई है। इसके तहत जिले की कुल 339 ग्राम पंचायतों के खाते में 29.02 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ग्रांट राशि आबंटित की गई है। इस वित्तीय अनुदान से गांवों में रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी और स्थानीय नागरिकों को मूलभूत नागरिक सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी।
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर बदलने के उद्देश्य से यह वित्तीय आवंटन किया गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार जिले के सभी सातों ब्लॉकों में आबादी और पंचायतों की संख्या के आधार पर बजट का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया गया है। इस ग्रांट के आने से सरपंचों और स्थानीय ग्रामीण निकायों के पास विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने के लिए पर्याप्त वित्तीय बल मिल गया है, जिससे गांवों में बरसों से अटके सड़क और नाली निर्माण जैसे कार्य बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेंगे।
सातों ब्लॉकों में ब्लॉक-वार बजट वितरण और प्रमुख गांवों का विवरण
वित्तीय आबंटन की इस प्रक्रिया में जिले के सातों ब्लॉकों को उनकी जरूरत और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बजट का हिस्सा मिला है। डबवाली ब्लॉक की 48 पंचायतों के लिए सबसे ज्यादा 5.03 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जिसमें अकेले चौटाला गांव को 45.33 लाख रुपये मिले हैं। इसके अलावा गंगा को 30.66 लाख, अबूबशहर को 29.54 लाख, डबवाली गांव को 22.58 लाख और देशजोधा को 19.35 लाख रुपये आवंटित हुए हैं। सिरसा ब्लॉक की 56 पंचायतों के लिए 4.84 करोड़ का बजट है, जिसमें माधोसिंघाना को 25.44 लाख और कोटली को 24.46 लाख रुपये की राशि मिली है।
इसी प्रकार नाथूसरी चौपटा की 51 पंचायतों के लिए 4.83 करोड़ रुपये तय किए गए हैं, जहां जमाल और डिंग गांवों को करीब 29 लाख रुपये मिले हैं। रानियां ब्लॉक की 56 पंचायतों के हिस्से 4.10 करोड़ रुपये आए हैं, जिसमें खारियां को 28.70 लाख और बणी को 25.46 लाख रुपये का अनुदान मिला है। ऐलनाबाद की 47 पंचायतों को 3.55 करोड़ (मल्लेकां को 22.59 लाख), बड़ागुढ़ा की 44 पंचायतों को 3.51 करोड़ (रोड़ी को 35.82 लाख) और ओढ़ां की 37 पंचायतों को 3.15 करोड़ रुपये (पानीवाला मोटा और ओढ़ां को 25-25 लाख) आवंटित किए गए हैं। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत 7 पंचायत समितियों को 5.16 करोड़ और जिला परिषद को 3.44 करोड़ रुपये मिलने से कुल योग 37.62 करोड़ रुपये हो जाता है।
| विकास ब्लॉक | पंचायतों की संख्या | आवंटित ग्रांट राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|---|
| डबवाली | 48 | 5.03 |
| सिरसा | 56 | 4.84 |
| नाथूसरी चौपटा | 51 | 4.83 |
| रानियां | 56 | 4.10 |
| ऐलनाबाद | 47 | 3.55 |
| बड़ागुढ़ा | 44 | 3.51 |
| ओढ़ां | 37 | 3.15 |
बुनियादी विकास कार्यों पर होगा मुख्य फोकस, पेयजल और सफाई को प्राथमिकता
ग्रामीण आंचल में इस ग्रांट के आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों के साथ-साथ जीवन स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा। ग्राम पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस बजट का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों में किया जाए। प्राथमिक कार्यों में मुख्य रूप से टूटी हुई सड़कों की मरम्मत, गलियों का पक्का होना, गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना, गांवों में नियमित साफ-सफाई और रातों के समय सुरक्षा व सुगमता के लिए स्ट्रीट लाइट लगवाना शामिल है। सरपंचों को इन सभी कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने की कड़ी हिदायत दी गई है ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके।
स्थानीय स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से फंड के अभाव में कई विकास कार्य अटके पड़े थे, लेकिन इस दूसरी तिमाही की ग्रांट के जारी होने से अब गांवों का कायाकल्प होना तय माना जा रहा है। त्रिस्तरीय व्यवस्था में जिला परिषद और पंचायत समितियों को मिले फंड से बड़े स्तर के ग्रामीण मार्गों और सामुदायिक भवनों के निर्माण को बल मिलेगा। ग्रामीण जनता लंबे समय से इन बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रही थी, और प्रशासन की इस वित्तीय पहल से धरातल पर सकारात्मक बदलाव साफ नजर आने लगा है।
"राज्य सरकार की ओर से स्टेट फाइनेंस कमीशन के तहत मिला यह वित्तीय अनुदान ग्रामीण विकास की रीढ़ साबित होगा। सभी पंचायतों को पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से विकास कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि हर ग्रामीण तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके।" - प्रशासनिक प्रवक्ता
पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी के साथ आगे बढ़ेंगे विकास कार्य
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इन सभी विकास कार्यों की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न हो सके। प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र की आवश्यकतानुसार प्राथमिकता तय करने की छूट दी गई है, लेकिन कार्यों का सोशल ऑडिट भी अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के नियमित फंड प्रवाह से गांवों की सूरत बदलने के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाएं और अधिक आत्मनिर्भर बनेंगी। ग्रामीण इलाकों में इस बजट के पहुंचते ही स्थानीय ठेकेदारों और कामगारों में भी उत्साह का माहौल है, क्योंकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।




