रविवार, 25 अक्टूबर 2026
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पैरा एशियन गेम्स में सिल्वर पदक जीत हरियाणा पहुंचीं कोकिला कौशिक, 2028 लॉस एंजिल्स में स्वर्ण पर निशाना

जापान में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में रजत पदक जीतकर लौटीं उचाना के कसूहन गांव की बेटी कोकिला कौशिक का ढोल-नगाड़ों और भंडारे के साथ भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
25 अक्टूबर 2026 को 01:00 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पैरा एशियन गेम्स में सिल्वर पदक जीत हरियाणा पहुंचीं कोकिला कौशिक, 2028 लॉस एंजिल्स में स्वर्ण पर निशाना
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •जापान में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में उचाना क्षेत्र की बेटी कोकिला कौशिक ने जीता रजत पदक।
  • •खटकड़ टोल प्लाजा से कसूहन गांव तक विशाल काफिले और ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ भव्य स्वागत।
  • •वर्ष 2023 के कांस्य पदक के बाद इस बार सिल्वर जीता, अब 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में गोल्ड का लक्ष्य।
  • •माता सुमन शर्मा और पिता कृष्ण कुमार ने कहा- बेटियों को बेटों से कम न समझें, सही अवसर मिले तो इतिहास रचती हैं।

अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा करने वाली हरियाणा की खेल प्रतिभाओं की श्रृंखला में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। जापान में आयोजित हुए पैरा एशियन गेम्स में उचाना तहसील के कसूहन गांव की होनहार एथलीट कोकिला कौशिक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर मेडल) हासिल किया है। पदक जीतकर स्वदेश लौटने पर रविवार को उनके गृह क्षेत्र और पैतृक गांव में ग्रामीणों एवं खेल प्रेमियों द्वारा ऐतिहासिक स्वागत किया गया।

कोकिला के गांव में प्रवेश से पूर्व ही खटकड़ टोल प्लाजा पर सैकड़ों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों और युवाओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनकी अगवानी की। वहां से गाड़ियों के काफिले के साथ कोकिला को उनके पैतृक गांव कसूहन लाया गया। गांव के ऐतिहासिक मंदिर परिसर में बेटी के सम्मान में एक विशाल नागरिक अभिनंदन समारोह एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के कई गांवों के गणमान्य लोग और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

खेल के मैदान से गांव के आंगन तक: कोकिला का शानदार स्वागत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराकर लौटीं कोकिला कौशिक ने ग्रामीणों और परिजनों द्वारा दिए गए इस भव्य स्नेह पर गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी वैश्विक मंच पर पदक जीतकर अपने गांव और मिट्टी में लौटता है और लोग उसे इतना मान-सम्मान देते हैं, तो वह ऊर्जा शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। यह स्नेह और आशीर्वाद भविष्य में और अधिक कड़ी मेहनत करने का संबल प्रदान करता है।

कोकिला ने अपनी खेल यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी कमियों को निरंतर सुधारा है। इससे पहले वर्ष 2023 में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया था। इस बार कड़ी मेहनत के बल पर वे कांस्य को रजत में बदलने में सफल रहीं। यद्यपि स्वर्ण पदक से थोड़ा चूक जाने का मलाल अवश्य है, परंतु वे अपनी तकनीकों में सुधार कर आगामी प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।

खिलाड़ी का नामस्पर्धा / प्रतियोगिताआयोजन स्थलहासिल उपलब्धिआगामी लक्ष्य
कोकिला कौशिकपैरा एशियन गेम्सजापानरजत पदक (Silver Medal)2028 लॉस एंजिल्स पैरा ओलंपिक (गोल्ड)
पूर्व रिकॉर्डपैरा एशियन गेम्स 2023अंतरराष्ट्रीयकांस्य पदक (Bronze Medal)निरंतर प्रदर्शन में सुधार
मूल निवास/पारिवारिक पृष्ठभूमिकसूहन (उचाना, हरियाणा)वर्तमान निवास: आजाद नगर (हिसार)पिता: कृष्ण कुमारमाता: सुमन शर्मा

स्टेप बाय स्टेप तैयारी: 2028 लॉस एंजिल्स में गोल्ड का संकल्प

अपनी भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए कोकिला ने स्पष्ट किया कि उनका अंतिम लक्ष्य ओलंपिक मंच पर भारत के लिए राष्ट्रगान की धुन बजवाना है। वे कदम-दर-कदम अपनी रणनीति पर काम कर रही हैं। 2023 में कांस्य और 2026 में रजत पदक जीतने के बाद अब उनका पूरा ध्यान वर्ष 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों पर केंद्रित है, जहां वे केवल स्वर्ण पदक के ध्येय के साथ मैदान में उतरेंगी।

"पिछली बार मेरे पास ब्रॉन्ज मेडल था, इस बार मैंने सिल्वर मेडल हासिल किया है। स्वर्ण पदक से चूकने की कमियों का विश्लेषण कर लिया गया है। अब मेरी पूरी मेहनत और ट्रेनिंग 2028 के लॉस एंजिल्स पैरा ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर केंद्रित है।"
- कोकिला कौशिक, अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट

पारिवारिक प्रोत्साहन और बेटियों को आगे बढ़ाने का संदेश

यद्यपि कोकिला का परिवार वर्तमान में हिसार के आजाद नगर क्षेत्र में निवास करता है, परंतु उनकी जड़ें उचाना के कसूहन गांव से जुड़ी हुई हैं। कोकिला के पिता कृष्ण कुमार ने कहा कि उनकी बेटी ने निरंतर अनुशासन और तपस्या से यह मुकाम हासिल किया है। जब बेटी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करती है, तो एक पिता के रूप में जीवन का सबसे बड़ा संतोष मिलता है।

कोकिला की माता सुमन शर्मा ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि समाज को अब अपनी संकीर्ण मानसिकता से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि बेटियों को कभी भी बेटों से कम नहीं आंकना चाहिए। यदि बेटियों को उचित संसाधन, सही अवसर और परिवार का नैतिक समर्थन मिले, तो वे दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर तिरंगा फहरा सकती हैं। कसूहन गांव के ग्रामीणों ने भी घोषणा की कि कोकिला की इस उपलब्धि से प्रेरणा लेकर गांव की अन्य बेटियों के लिए भी खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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