हरियाणा में बिजली वितरण के क्षेत्र में निजी कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का असर पहले ही दिन राज्य के कई जिलों में व्यापक रूप से दिखाई देने लगा। बुधवार रात 12 बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के चलते गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, पंचकूला, रोहतक, सोनीपत, जींद, झज्जर, कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ समेत कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। जिन इलाकों में रात के वक्त बिजली की लाइनों में फॉल्ट आए, वहां मरम्मत कार्य समय पर न होने के कारण लोगों को लंबे समय तक अंधेरे में रहना पड़ा।
बिजली कटौती का यह असर केवल आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों तक फैल गया। कई इलाकों में इन्वर्टर और बैटरियां भी जवाब दे गईं, जिससे सुबह के वक्त पानी की मोटरें न चलने से लोगों को भारी जल संकट का सामना करना पड़ा। जींद के नागरिक अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं जारी रखने के लिए जनरेटर चलाना पड़ा, वहीं झज्जर सचिवालय में भी बिजली गुल रहने से कामकाज बाधित हुआ।
निजीकरण के खिलाफ मुखर हुए कर्मचारी संगठन
कर्मचारियों और इंजीनियर संगठनों का मुख्य विरोध गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर’ को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के फैसले के खिलाफ है। यूनियनों का तर्क है कि इस प्रकार के फैसलों से सार्वजनिक बिजली वितरण निगमों की वित्तीय सेहत और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस हड़ताल में करीब 40 हजार नियमित और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो इस तीन दिवसीय सांकेतिक आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है।
| जिला | प्रभावित क्षेत्र | प्रमुख समस्या / स्थिति |
|---|---|---|
| गुरुग्राम | सेक्टर-5, 7, पालम विहार, दौलताबाद | 8 से 10 लाख लोग प्रभावित, पॉश व अफोर्डेबल सोसाइटियों में जनरेटर-इन्वर्टर ठप। |
| जींद | शहर के अधिकांश हिस्से, उचाना, जुलाना | नागरिक अस्पताल में जनरेटर चलाना पड़ा, रात 11 बजे से बिजली गुल। |
| झज्जर | बेरी गेट, शिव कॉलोनी, सचिवालय | पानी की किल्लत, सचिवालय में सरकारी कामकाज प्रभावित। |
| यमुनानगर | 39 सबस्टेशन और 504 फीडर | 4.42 लाख उपभोक्ता प्रभावित होने की आशंका, धारा 163 लागू। |
प्रशासनिक तैयारियां और सरकार का रुख
हड़ताल के मद्देनजर राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की और कर्मचारियों से आंदोलन वापस लेने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में अपीलेंट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। इसके अलावा, संवेदनशील पावर हाउसों और सबस्टेशनों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
विशेषज्ञों और खाप पंचायतों ने भी इस बिजली संकट पर चिंता जताई है। सर्वजातीय कंडेला खाप और हरियाणा सोलर एसोसिएशन ने भी बिजली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए निजीकरण के फैसलों को जनविरोधी करार दिया है। विभाग में पहले से ही करीब 48 प्रतिशत पद खाली होने के कारण कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव है, जिससे यह संकट और अधिक गंभीर रूप लेता जा रहा है।


