पानीपत लाइव ब्यूरो: जब लक्ष्य के प्रति समर्पण अटूट हो और मेहनत में ईमानदारी हो, तो कोई भी बाधा आपके सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक छोटे से गांव डगडौआ की बेटी समीक्षा द्विवेदी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। समीक्षा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 की परीक्षा में देश भर में 56वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने जिले बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने बैंक की चुनौतीपूर्ण नौकरी के साथ अपनी तैयारी जारी रखी और पांचवें प्रयास में अपने IAS बनने के सपने को साकार किया।
समीक्षा द्विवेदी की यह यात्रा संघर्ष, धैर्य और अटूट आत्मविश्वास की एक मिसाल है। उनके पिता श्रीनिवास द्विवेदी, जो स्वयं पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में अधिकारी हैं, और माता सुनीता द्विवेदी ने अपनी बेटी के इस कठिन सफर में हर कदम पर उसका मनोबल बढ़ाया। बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखने वाली समीक्षा को अपनी मंजिल पाने में करीब चार साल का लंबा समय लगा, लेकिन इस दौरान उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और करियर का शुरुआती मोड़
समीक्षा द्विवेदी की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर से हुई, जिसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित प्रतिष्ठित SRM यूनिवर्सिटी से बीटेक (इंजीनियरिंग) की डिग्री प्राप्त की। एक मेधावी छात्रा होने के नाते, उन्हें तुरंत सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरी मिल गई। लगभग दो वर्षों तक कोडिंग और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में काम करने के बावजूद, उनका मन हमेशा समाज सेवा और प्रशासनिक सुधारों की ओर लगा रहा। इसी जुनून के कारण उन्होंने अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और अपनी शैक्षणिक योग्यता को और निखारने के लिए IIT कानपुर का रुख किया, जहाँ से उन्होंने MBA की डिग्री हासिल की।
| वर्ष | प्रयास संख्या | परीक्षा का चरण / परिणाम |
|---|---|---|
| 2021 | प्रथम प्रयास | प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में असफल |
| 2022 | द्वितीय प्रयास | मुख्य परीक्षा (Mains) तक पहुँचीं, पर चयन नहीं |
| 2023 | तृतीय प्रयास | इंटरव्यू (साक्षात्कार) तक पहुँचीं, पर अंतिम सूची में जगह नहीं |
| 2025 | पांचवां प्रयास | अखिल भारतीय रैंक (AIR) 56 - IAS चयनित |
असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी
समीक्षा की UPSC यात्रा 2021 में शुरू हुई थी। पहले प्रयास में उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में ही असफलता हाथ लगी। 2022 में उन्होंने प्रीलिम्स पास किया लेकिन मेन्स की बाधा पार नहीं कर सकीं। 2023 में वह साक्षात्कार (इंटरव्यू) तक पहुँचने में सफल रहीं, लेकिन अंतिम चयन से चूक गईं। किसी भी सामान्य अभ्यर्थी के लिए इंटरव्यू के बाद असफल होना मानसिक रूप से तोड़ने वाला होता है, लेकिन समीक्षा ने इसे अपनी तैयारी की कमी के रूप में देखा और नए सिरे से मेहनत शुरू की।
"सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जब आप असफल होते हैं, तो वह आपको आपकी कमजोरियों से रूबरू कराता है। मैंने बस अपनी गलतियों को सुधारा और कभी हार नहीं मानी।" - समीक्षा द्विवेदी (IAS अधिकारी)
कार्य-जीवन संतुलन: बैंक की नौकरी और पढ़ाई
समीक्षा द्विवेदी के सफर की सबसे बड़ी चुनौती बैंक की नौकरी के साथ पढ़ाई का तालमेल बिठाना था। बैंक की जिम्मेदारी और फिर घर आकर घंटों UPSC के कठिन पाठ्यक्रम को पढ़ना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया और अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से दूरी बनाए रखी। 2025 के अपने पांचवें प्रयास में, उन्होंने न केवल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि 56वीं रैंक लाकर यह साबित कर दिया कि यदि आप अनुशासित हैं, तो कामकाजी पेशेवर होते हुए भी दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास किया जा सकता है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण और भविष्य के लक्ष्य
समीक्षा का मानना है कि एक सिविल सर्वेंट के रूप में उनके पास समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करने का अवसर होगा। वह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करना चाहती हैं। उनके पिता श्रीनिवास द्विवेदी कहते हैं कि समीक्षा ने बचपन से ही जो ठान लिया था, उसे पूरा करके दिखाया है। आज उनके गांव डगडौआ में जश्न का माहौल है और समीक्षा की यह जीत उन लाखों युवाओं के लिए एक संदेश है जो संसाधनों की कमी या शुरुआती असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं।




