पानीपत जिले के इसराना अनाज मंडी परिसर इन दिनों धान की खरीद के बाद उसके सुस्त उठान को लेकर चर्चाओं में है। मंडियों में किसानों की मेहनत पसीना एक करके पहुंचाई गई फसल समय पर न उठ पाने के कारण अब प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। हालात यह हैं कि खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद किसानों और आढ़तियों को अपनी उपज के सुरक्षित भंडारण और भुगतान को लेकर चिंता सताने लगी है। इस गंभीर समस्या के चलते स्थानीय कृषि जगत में नाराजगी का माहौल लगातार गहराता जा रहा है, जिससे कभी भी स्थिति के तूल पकड़ने की आशंका बनी हुई है।
प्राप्त ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इसराना की इस प्रमुख अनाज मंडी में सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 33,768 क्विंटल पीआर धान की बम्पर आवक हो चुकी है। इसमें से विभिन्न क्रय एजेंसियों द्वारा अब तक कुल 30,595 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। हालांकि धान की खरीद का यह आंकड़ा संतोषजनक नजर आता है, परंतु धरातल पर उठान की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जिससे मंडी परिसर में जगह-जगह धान के बड़े-बड़े अंबार लगे दिखाई दे रहे हैं और किसान अपनी फसल की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
खरीद एजेंसियों के रवैये में अंतर और हैफेड की सुस्ती
इस पूरी व्यवस्था में एजेंसियों के कार्य करने के तरीकों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। मंडी में सक्रिय प्राइवेट एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए खरीदी गई कुल 5,707 क्विंटल पीआर धान का शत-प्रतिशत उठान समय पर पूरा कर लिया है। इसके विपरीत, सरकारी खरीद एजेंसी 'हैफेड' द्वारा की गई खरीद का बड़ा हिस्सा अभी भी खुले आसमान के नीचे शेड या खुले प्रांगण में ही धूल फांक रहा है। हैफेड ने कुल 28,061 क्विंटल धान की खरीद तो जरूर की है, जिसमें से अभी तक मात्र 14,815 क्विंटल धान का ही उठान संभव हो पाया है।
इस धीमी कार्यप्रणाली का परिणाम यह है कि अकेले हैफेड द्वारा खरीदा गया 13,246 क्विंटल पीआर धान अभी भी इसराना अनाज मंडी में ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है। उठान की यह कछुआ चाल न केवल मंडी में जगह की भारी किल्लत पैदा कर रही है, बल्कि आगामी आवक के लिए आने वाले किसानों की राह भी मुश्किल कर रही है। आढ़तियों का कहना है कि जब तक पिछला स्टॉक पूरी तरह से गोदामों या राइस मिलों तक नहीं पहुंच जाता, तब तक नए किसानों की उपज को रखने के लिए मंडी में पर्याप्त जगह मिलना नामुमकिन साबित होगा।
| विवरण (Particulars) | आंकड़ा (Quantity in Quintals) |
|---|---|
| कुल पीआर धान आवक | 33,768 क्विंटल |
| कुल धान खरीद | 30,595 क्विंटल |
| हैफेड द्वारा खरीद | 28,061 क्विंटल |
| हैफेड द्वारा धान उठान | 14,815 क्विंटल |
| प्राइवेट एजेंसी द्वारा खरीद व उठान | 5,707 क्विंटल |
| हैफेड का लंबित धान उठान | 13,246 क्विंटल |
आढ़ती एसोसिएशन और किसानों का फूटा गुस्सा
धान के उठान में हो रही इस भीषण देरी के विरोध में अब इसराना के स्थानीय आढ़तियों और अन्नदाताओं का सब्र जवाब देने लगा है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान जयकरण जागलान ने इस पूरी स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन और संबंधित खरीद एजेंसी के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक अमले ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो किसानों और व्यापारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
व्यापारियों और किसानों की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि जब तक मंडियों से खरीदी गई फसल का आधिकारिक उठान नहीं होता, तब तक सरकारी नियमों के अनुसार किसानों के बैंक खातों में फसल का भुगतान नहीं भेजा जा सकता। धान मंडी में ही पड़ा रहने के कारण किसानों के भुगतान की फाइलें अटक गई हैं, जिससे उन्हें अपनी अगली फसलों की बुआई और अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
"हैफेड एजेंसी को कई बार सूचित किए जाने के बावजूद हमारी धान का उठान तय समय सीमा में नहीं किया जा रहा है। मंडी में 13 हजार क्विंटल से अधिक धान उठान का इंतजार कर रहा है, जिससे न केवल जगह की समस्या हो रही है बल्कि किसानों का भुगतान भी अटका हुआ है। जिला प्रशासन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर उठान की गति को युद्ध स्तर पर बढ़ाना चाहिए।" - जयकरण जागलान, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन, इसराना
प्रशासनिक सुस्ती और भविष्य की चुनौतियां
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर मंडियों में प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फासलों को उजागर कर दिया है। धान के सीजन के दौरान इस तरह की ढिलाई अमूमन व्यवस्था की पोल खोल देती है। मौसम के मिजाज को देखते हुए खुले में पड़ा हजारों क्विंटल धान किसी भी समय बेमौसम बारिश या अन्य प्राकृतिक आपदा का शिकार हो सकता है, जिसका खामियाजा अंततः किसान और आढ़ती को ही भुगतना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों और किसान यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी एक-दो दिनों के भीतर हैफेड और जिला प्रशासन ने मिलकर इसराना मंडी से लंबित धान के उठान के लिए अतिरिक्त वाहनों और लेबर की व्यवस्था नहीं की, तो वे मजबूरन किसी बड़े आंदोलन का रास्ता चुनने को विवश होंगे। फिलहाल, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेते हुए कब तक ठोस कदम उठाता है।




