सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
विज्ञापन • ADVERTISEMENT
इसरानापानीपत ब्रेकिंग

इसराना अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद और उठान की सुस्त रफ्तार से बढ़ी अन्नदाताओं की परेशानी

इसराना अनाज मंडी में पीआर धान का उठान तय समय पर नहीं होने से किसानों का भुगतान अटक गया है। आढ़तियों ने भी प्रशासन से जल्द निस्तारण की मांग की है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
26 अक्टूबर 2026 को 02:50 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
शेयर करें:
इसराना अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद और उठान की सुस्त रफ्तार से बढ़ी अन्नदाताओं की परेशानी
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •इसराना अनाज मंडी में अब तक 31,621 क्विंटल पीआर धान की कुल आवक दर्ज की गई है।
  • •हैफेड एजेंसी द्वारा खरीदे गए अनाज का समय पर उठान न होना मुख्य समस्या बना हुआ है।
  • •निजी एजेंसियों ने अपना खरीदा हुआ धान तुरंत प्रभाव से मंडियों से उठवा लिया है।
  • •धान का उठान न होने के कारण किसानों को उनकी फसल का भुगतान मिलने में देरी हो रही है।

पानीपत जिले के इसराना उपमंडल की मुख्य अनाज मंडी में इन दिनों धान खरीद और उसके बाद के उठान की व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है। कृषि जिंस की सुस्त उठाव प्रक्रिया के चलते स्थानीय किसानों और आढ़ती वर्ग दोनों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। किसानों का कहना है कि उनकी गाढ़ी कमाई का उत्पाद काफी समय पहले ही बिक चुका है, लेकिन गोदामों या मिलों तक ढुलाई न होने के कारण उनके खातों में अब तक भुगतान की राशि नहीं पहुंच सकी है। इस व्यवस्थागत नाकामी के कारण अन्नदाताओं को आर्थिक तंगी और प्रशासनिक चक्करों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण अंचल के कृषि समुदाय में गहरा रोष व्याप्त है।

प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इसराना की इस प्रमुख कृषि मंडी में इस सीजन के दौरान अब तक कुल 31 हजार 621 क्विंटल पीआर धान की आवक हो चुकी है। इसमें से विभिन्न क्रय एजेंसियों द्वारा अब तक 28 हजार 335 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। हालांकि, कागजों में खरीद का यह आंकड़ा भले ही संतोषजनक प्रतीत हो, लेकिन धरातल पर भंडारण और ढुलाई की स्थिति बेहद लचर बनी हुई है, जिसके कारण मंडी परिसरों में किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

क्रय एजेंसियों के कार्यकौशल में अंतर और भंडारण की गंभीर समस्या

मंडी से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, सरकारी खरीद एजेंसी 'हैफेड' ने अब तक कुल 22 हजार 875 क्विंटल पीआर धान की खरीद की है। वहीं दूसरी ओर, निजी क्षेत्र की एजेंसियों ने 5 हजार 460 क्विंटल धान खरीदा है। हैरानी की बात यह है कि निजी एजेंसियों ने अपनी खरीद का शत-प्रतिशत यानी सभी 5 हजार 460 क्विंटल धान का उठान तय समय के भीतर ही मंडी से करवा लिया है। इसके विपरीत, सरकारी एजेंसी हैफेड द्वारा खरीदे गए कुल धान में से अभी तक केवल 16 हजार 159 क्विंटल का ही उठान संभव हो पाया है।

बाकी बचा हुआ हजारों क्विंटल धान अभी भी खुले आसमान के नीचे या मंडी के शैडों के नीचे खुले में पड़ा हुआ है। इस भारी अंतराल के कारण इसराना मंडी का एक बड़ा हिस्सा धान के बोरों से अटा पड़ा है, जिससे नए आने वाले किसानों और अन्य व्यापारियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खुले में पड़े इस अनाज के खराब होने का अंदेशा भी लगातार बना हुआ है, जिसे लेकर स्थानीय व्यापार मंडल और किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

विवरण (Details)मात्रा (क्विंटल में)
इसराना मंडी में कुल आवक31,621
कुल खरीद (सरकारी व निजी)28,335
हैफेड द्वारा कुल खरीद22,875
निजी एजेंसी द्वारा कुल खरीद5,460
निजी एजेंसी द्वारा कुल उठान5,460
हैफेड द्वारा कुल उठान16,159

किसान नेताओं और आढ़तियों की दो टूक मांग

इस पूरी व्यवस्था से आहत होकर इसराना मंडी के प्रधान जयकरण जागलान ने कड़े शब्दों में जिला प्रशासन और हैफेड के उच्चाधिकारियों को चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक एजेंसी द्वारा खरीदे गए एक-एक दाने का सुरक्षित उठान नहीं हो जाता, तब तक किसानों के चेहरों पर संतोष नहीं आ सकता। प्रधान ने मांग की है कि संबंधित एजेंसी तत्काल प्रभाव से परिवहन वाहनों (ट्रकों) की संख्या बढ़ाए ताकि युद्ध स्तर पर अनाज को मंडियों से उठाया जा सके।

मंडी के आढ़तियों का कहना है कि नियमों के मुताबिक जब तक गोदामों तक धान की खेप नहीं पहुंचती, तब तक पोर्टल पर ऑनलाइन वेरीफिकेशन और तदनुसार किसानों के बैंक खातों में भुगतान की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। यही तकनीकी पेंच किसानों के लिए जी का जंजाल बन गया है। किसानों का पसीना सूख चुका है, लेकिन उन्हें अभी तक अपनी फसल के दाम नसीब नहीं हुए हैं, जो कि व्यवस्था की पोल खोलता है।

"हैफेड द्वारा खरीदी गई पीआर धान का उठान बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। हमारी प्रशासन से मांग है कि ढुलाई के कार्य में तेजी लाई जाए ताकि किसानों को समय पर उनका भुगतान मिल सके।" - जयकरण जागलान, प्रधान, इसराना अनाज मंडी

अन्नदाताओं का दर्द और भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियां

इसराना मंडी में अपनी फसल बेचने पहुंचे किसान मुकेश, चंद्र और राजपाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी मेहनत की फसल को बहुत पहले ही मंडियों में बेच दिया था, इस उम्मीद के साथ कि समय पर पैसे मिलने से वे अपने अगले सीजन की बुआई और घर-परिवार की जरूरतें पूरी कर सकेंगे। लेकिन, उठान न होने के इस प्रशासनिक कुप्रबंधन ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो उन्हें खाद और बीज खरीदने के लिए भी साहूकारों या बैंकों के आगे हाथ फैलाने पड़ेंगे।

कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की देरी से न केवल किसानों का मनोबल गिरता है, बल्कि सरकारी व्यवस्थाओं पर से उनका भरोसा भी कम होता है। आने वाले दिनों में यदि हैफेड और जिला प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस और त्वरित कदम नहीं उठाया, तो इसराना क्षेत्र के किसान उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हो सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

प्रायोजित • SPONSORED
इस खबर को अपने दोस्तों व ग्रुप्स में शेयर करें:
व्हाट्सएप

पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

पानीपत शहर, समालखा, मतलौडा, इसराना, सनौली व टेक्सटाइल हब की 24x7 ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम

पानीपत लाइव (panipatlive.com) पानीपत जिले का प्रमुख और स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क है। हमारी संपादकीय टीम का मुख्य उद्देश्य पानीपत के नागरिकों, व्यापारियों, किसानों और युवाओं तक धरातल की हर प्रमाणित और निष्पक्ष खबर सबसे पहले पहुंचाना है।

इसराना अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद और उठान की सुस्त रफ्तार से बढ़ी अन्नदाताओं की परेशानी | पानीपत लाइव - Panipat Live