दृढ़ संकल्प और पारिवारिक समर्थन के बल पर जीवन की हर कठिन चुनौती को पार किया जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के छोटे से गांव सजनपाली की होनहार बेटी नंदनी साहू ने प्रस्तुत किया है। विषम पारिवारिक परिस्थितियों और पिता के असमय देहांत के बावजूद नंदनी ने हिम्मत नहीं हारी और राज्य लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) परीक्षा में पूरे प्रदेश में 5वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है।
नंदनी की यह उपलब्धि उन लाखों युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े प्रशासनिक पदों पर पहुंचने का सपना संजोते हैं। उन्होंने अपने पिता स्व. मेघनाथ साहू के उस सपने को हकीकत में बदला है, जो उन्होंने अपनी बेटी को एक बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बनाने के लिए देखा था। इस पूरी यात्रा में उनकी मां रामप्यारी साहू उनकी सबसे बड़ी संबल और प्रेरणा बनकर साथ खड़ी रहीं।
असफलताओं से सीखकर तय किया शीर्ष तक का सफर
नंदनी साहू की यह कामयाबी रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का अनवरत त्याग और कड़ा संघर्ष छिपा है। उन्होंने वर्ष 2019 में प्रशासनिक सेवा की तैयारी का औपचारिक संकल्प लिया था। जब उन्होंने पहली बार राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी, तो उन्हें 179वीं रैंक प्राप्त हुई थी। हालांकि यह रैंक चयन के लिए पर्याप्त नहीं थी, लेकिन नंदनी ने इस परिणाम से निराश होने के बजाय अपनी कमियों का सूक्ष्म विश्लेषण किया।
अपनी गलतियों को सुधारते हुए उन्होंने दूसरे और फिर तीसरे प्रयास में दोगुनी ऊर्जा के साथ मेहनत की। नंदनी ने अपनी रणनीति में बुनियादी बदलाव किए और उत्तर लेखन शैली को अधिक तार्किक और तथ्यपरक बनाया। आखिरकार उनकी इस सतत तपस्या का सुखद परिणाम सामने आया और उन्होंने तीसरे प्रयास में प्रदेश की मेरिट सूची में शीर्ष पांच में स्थान बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| सफल अभ्यर्थी | नंदनी साहू |
| गृह क्षेत्र | गांव सजनपाली, जिला महासमुंद (छत्तीसगढ़) |
| परीक्षा एवं रैंक | राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) - 5वीं रैंक |
| आवंटित पद | डिप्टी कलेक्टर (प्रशासनिक सेवा) |
| प्रयासों की संख्या | तीसरे प्रयास में शीर्ष सफलता (पहले प्रयास में 179वीं रैंक) |
| तैयारी का केंद्र | बिलासपुर (किराए के मकान में मां के साथ रहकर) |
किराए के कमरे में मां का संबल और 3 साल का डिजिटल संन्यास
प्रशासनिक सेवा की गहन तैयारी के उद्देश्य से नंदनी वर्ष 2019 में अपनी मां रामप्यारी साहू के साथ बिलासपुर शहर आ गई थीं। आर्थिक और भावनात्मक चुनौतियों के बीच मां ने अपनी बेटी के अध्ययन में कोई बाधा नहीं आने दी। किराए के एक छोटे से कमरे में मां ने नंदनी के खान-पान और दिनचर्या का पूरा ध्यान रखा ताकि वह चौबीसों घंटे केवल अपनी पुस्तकों और अध्ययन पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
वर्तमान दौर में जहां युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया पर समय व्यतीत करता है, वहीं नंदनी ने अनुशासन की मिसाल पेश करते हुए लगातार 3 वर्षों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों से पूर्ण दूरी बनाए रखी। उनका मानना था कि डिजिटल विकर्षण तैयारी की निरंतरता को खंडित करता है, इसलिए उन्होंने केवल संदर्भ सामग्री और परीक्षा उपयोगी सूचनाओं तक ही तकनीक का सीमित उपयोग किया।
"मेरे पिता का हमेशा से सपना था कि मैं समाज की सेवा के लिए एक उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनूं। उनके जाने के बाद मां ने हर मोड़ पर मेरा मनोबल बढ़ाया। असफलताएं केवल आपकी कमियां उजागर करती हैं, यदि आप उनसे सीख लें तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।"
- नंदनी साहू, 5वीं रैंक प्राप्त डिप्टी कलेक्टर
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मार्गदर्शन
नंदनी साहू की यह प्रेरक सफलता ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले उन छात्र-छात्राओं में नया विश्वास जगाती है जो संसाधनों के अभाव को अपनी नियति मान लेते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और दिशा सही हो तो किसी भी बड़े कोचिंग संस्थान के तामझाम के बिना भी स्वाध्याय और समर्पण से सर्वोच्च रैंक अर्जित की जा सकती है।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का कहना है कि नंदनी की कहानी उन सभी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन देती है जो शुरुआती प्रयासों में मिली विफलता से हताश हो जाते हैं। धैर्य, समय प्रबंधन, सोशल मीडिया से दूरी और अपने माता-पिता के त्याग के प्रति जवाबदेही ही किसी भी अभ्यर्थी को उसकी वास्तविक मंजिल तक पहुंचाने की सबसे अचूक कुंजी है।




