पानीपत जिले में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। मौसम के बदलते मिजाज और स्थानीय कारकों के चलते शहर की आबोहवा में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। महज एक दिन पहले प्रदूषण के स्तर में कुछ हद तक सुधार दर्ज किया गया था, लेकिन शुक्रवार को हवा की गुणवत्ता ने एक बार फिर गोता लगाया और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 238 के गंभीर आंकड़े को छू गया। हालांकि शाम के वक्त इसमें आंशिक सुधार जरूर देखा गया और यह 226 पर दर्ज किया गया, परंतु यह स्तर भी आमजन के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक श्रेणी में ही आता है।
इस अस्थिर स्थिति के कारण शहरवासियों को एक बार फिर आंखों में तेज चुभन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बीते बुधवार को शहर का AQI खतरनाक स्तर यानी 321 तक जा पहुंचा था। हालांकि, इसके अगले दिन यानी गुरुवार को हवा की गति में बदलाव के चलते प्रदूषण स्तर में कुछ गिरावट आई थी और यह 165 पर आ गया था, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन यह राहत बेहद कम समय के लिए साबित हुई और शुक्रवार को प्रदूषण के मोर्चे पर हालात फिर से बिगड़ गए।
प्रशासनिक सक्रियता और ग्रैप नियमों का कड़ाई से पालन
बढ़ती जहरीली हवा और सड़कों पर उड़ने वाली धूल-मिट्टी के गुबार पर रोक लगाने के लिए अब नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है। निगम अधिकारियों द्वारा शहर के संवेदनशील क्षेत्रों और मुख्य परिवहन मार्गों पर एंटी स्मॉग गन के माध्यम से पानी का छिड़काव युद्ध स्तर पर शुरू कराया गया है। इसके अलावा, वायु गुणवत्ता को और अधिक खराब होने से बचाने के वास्ते ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया गया है। इसके तहत शहर में किसी भी प्रकार की निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि उड़ने वाले धूल कणों को नियंत्रित किया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर सक्रिय विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही हवा की रफ्तार बेहद धीमी हो चुकी है, जिसके कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं और औद्योगिक इलाकों का कचरा वातावरण के ऊपरी स्तर पर जाने के बजाय निचले हिस्से में ही ठहर रहा है। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में हवा की गति में तेजी नहीं आई, तो वायु गुणवत्ता सूचकांक में और अधिक उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यधिक आवश्यकता होने पर ही निजी वाहनों का प्रयोग करें और खुले में किसी भी प्रकार का कचरा जलाने से पूरी तरह परहेज करें।
| दिन / तिथि | दर्ज किया गया AQI स्तर | शहर की वायु स्थिति |
|---|---|---|
| बुधवार | 321 | अति गंभीर / खतरनाक |
| वीरवार (गुरुवार) | 165 | मध्यम / राहत भरा |
| शुक्रवार (सुबह) | 238 | खराब / चिंताजनक |
| शुक्रवार (शाम) | 226 | खराब श्रेणी में बरकरार |
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पैनी नजर और निगरानी तंत्र
दूसरी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी शहर की बिगड़ती आबोहवा को लेकर पूरी तरह गंभीर नजर आ रहा है। बोर्ड के उपमंडल अधिकारी (SDO) कुलदीप सिंह ने जानकारी दी है कि विभागीय टीमें जिले भर में प्रदूषण के हर एक कारक पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। विशेष तौर पर उन औद्योगिक इकाइयों की औचक जांच की जा रही है जो नियमों का उल्लंघन करती हैं। इसके अतिरिक्त, खुले में निर्माण सामग्री या राख आदि का परिवहन करने वाले ढके हुए और बिना ढके वाहनों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि पर्यावरण नियमों की अवहेलना करने वाले किसी भी संस्थान या वाहन चालक को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त चालान काटने से लेकर सीलिंग तक की कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
"प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए हमारे मैदानी दल पूरी तरह मुस्तैद हैं। औद्योगिक क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी, और उल्लंघनकर्ताओं पर भारी जुर्माने व सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।" - कुलदीप सिंह, एसडीओ, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
नागरिकों की सेहत पर मंडराता खतरा और एहतियाती उपाय
बढ़ते प्रदूषण का यह दौर विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से ही श्वसन संबंधी बीमारियों (जैसे अस्थमा) से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है। चिकित्सकों ने इस मौसम में सुबह और शाम के वक्त वॉक या जॉगिंग के लिए बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बाहर निकलते वक्त मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाना चाहिए ताकि प्रदूषित कणों को शरीर के भीतर जाने से रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि नागरिकों को इस जहरीली हवा के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके, लेकिन इसके लिए प्रशासनिक पाबंदियों के साथ-साथ आम जनता का जागरूक होना भी उतना ही आवश्यक है।




