पानीपत जिले के नागरिकों के लिए न्याय और उनके अधिकारों की सुरक्षा को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम और सख्त फैसला सुनाया है। एक बीमा क्леम से जुड़े विवाद की सुनवाई करते हुए आयोग की पीठ ने संबंधित निजी बीमा कंपनी को तय समयसीमा के भीतर पूरे मामले का निस्तारण करने के निर्देश जारी किए हैं। यह पूरा मामला एक पॉलिसीधारक की चिकित्सा के दौरान हुए खर्च और उसके उपरांत हुई दुखद मृत्यु से जुड़ा हुआ है, जिस पर लंबे समय से पेंच फंसा हुआ था।
न्यायालय के इस हस्तक्षेप के बाद अब पीड़ित परिवार को एक निश्चित समयावधि में न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कागजी प्रक्रिया को समय पर पूरा कर बीमा कंपनी को पारदर्शिता के साथ इस मामले का निपटारा करना होगा ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से कानूनी लड़ाइयों का सामना न करना पड़े। पानीपत लाइव की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम इस बात पर लगातार नजर बनाए हुए है कि कैसे स्थानीय उपभोक्ता फोरम आम जनमानस के वित्तीय अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं।
घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम
इस पूरे मामले की शुरुआत पानीपत जिले के अंतर्गत आने वाले गांव ददलाना से जुड़ी है। स्थानीय निवासी सुमित कुमार ने गत 3 जनवरी 2023 को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय तेज सिंह ने 13 मार्च 2019 को एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 'सर्व सुरक्षा प्लस' पॉलिसी क्रय की थी, जो कि नियमानुसार 12 मार्च 2024 तक पूरी तरह वैध थी।
वर्ष 2022 के जून महीने में अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण तेज सिंह को दिल की बीमारी यानी हृदय संबंधी समस्या के चलते शहर के एक प्रतिष्ठित निजी चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराना पड़ा था। इस दौरान उनके इलाज में कुल 1,85,300 रुपये की भारी राशि खर्च हुई। दुर्भाग्यवश, उपचार प्रक्रिया के दौरान ही 26 जून 2022 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, और जब बेटे सुमित कुमार ने बीमा कंपनी से नियमानुसार क्लेम की मांग की, तो उन्हें कथित तौर पर टालमटोल रवैये का सामना करना पड़ा।
| मामले का विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| शिकायतकर्ता | सुमित कुमार (गांव ददलाना, पानीपत) |
| पॉलिसीधारक | स्वर्गीय तेज सिंह (पिता) |
| बीमा कंपनी | एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड |
| पॉलिसी का प्रकार | सर्व सुरक्षा प्लस पॉलिसी |
| इलाज का खर्च | 1,85,300 रुपये |
| घटना की तिथि | 26 जून 2022 |
| आयोग के निर्देश | 15 दिन में दस्तावेज जमा, 60 दिन में फैसला |
दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अस्पताल की डिस्चार्ज समरी के मुताबिक मरीज को गंभीर हृदयाघात के साथ-साथ मधुमेह की पुरानी शिकायत भी थी। कंपनी का यह भी तर्क था कि संबंधित पॉलिसी एक बेनिफिट पॉलिसी की श्रेणी में आती है, न कि पारंपरिक मेडिक्लेम पॉलिसी में, और इसके अतिरिक्त उन्हें आवश्यक मूल दस्तावेज भी विधिवत उपलब्ध नहीं कराए गए थे, जिसके कारण प्रक्रिया में विलंब हुआ।
"आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की संयुक्त पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता पंद्रह दिनों के भीतर अपने सभी मूल दस्तावेज कंपनी के पास जमा कराएं। दस्तावेज मिलने के ठीक साठ दिन के भीतर बीमा कंपनी को क्लेम पर अपना अंतिम निर्णय लेना होगा। यदि इसके बाद भी भुगतान नहीं होता है, तो उपभोक्ता दोबारा कानूनी दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होगा।"
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव
पानीपत जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले जिले में जहां हजारों लोग विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करते हैं, ऐसे फैसले बहुत दूरगामी प्रभाव डालते हैं। अक्सर देखने में आता है कि बीमा कंपनियां क्लेम देने के समय छोटी-छोटी तकनीकी खामियों या दस्तावेजों की आड़ लेकर उपभोक्ताओं को परेशान करती हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के इस सख्त आदेश से शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के उन तमाम पॉलिसीधारकों का हौसला बढ़ा है जो बीमा कंपनियों के रवैये से त्रस्त हैं।
इस प्रकार के न्यायिक निर्णय यह सुनिश्चित करते हैं कि वित्तीय संस्थान अपनी जिम्मेदारियों से मुंह न मोड़ सकें। पानीपत लाइव के साथ बातचीत में स्थानीय नागरिकों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी। जब आम आदमी अस्पताल के बिलों के बोझ तले दबा होता है और अपनों को खोने का गम झेल रहा होता है, ऐसे समय में बीमा कंपनियों की संवेदनहीनता के खिलाफ इस तरह के कड़े निर्देश एक मजबूत ढाल का काम करते हैं।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आयोग के निर्देशानुसार अब शिकायतकर्ता सुमित कुमार को आगामी पंद्रह दिनों के भीतर सभी जरूरी मूल कागजात एचडीएफसी एर्गो बीमा कंपनी के कार्यालय में जमा कराने होंगे। जैसे ही दस्तावेज कंपनी को प्राप्त होंगे, वैसे ही साठ दिन की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में यह भी बहुत स्पष्ट कर दिया है कि तय सीमा में न्याय न मिलने की स्थिति में शिकायतकर्ता के पास पुनः अदालत आने का अधिकार सुरक्षित है। पानीपत लाइव इस मामले की हर अपडेट पर अपनी पैनी निगाह बनाए रखेगा और धरातल की हर सच्चाई पाठकों के सामने लाता रहेगा।




