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पानीपत में फॉगिंग मशीनों की बदहाली से गहराया डेंगू का संकट, 62 तक पहुंची मरीजों की संख्या

पानीपत में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर 62 हुई। ग्रामीण इलाकों में आधे से अधिक फॉगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं, जिससे लार्वा पनप रहा है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
6 नवंबर 2026 को 11:55 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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पानीपत में फॉगिंग मशीनों की बदहाली से गहराया डेंगू का संकट, 62 तक पहुंची मरीजों की संख्या
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •जिले में पिछले तीन दिनों के भीतर डेंगू के पांच नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल संक्रमितों का आंकड़ा 62 पहुंच गया है।
  • •पंचायतों के पास उपलब्ध 96 फॉगिंग मशीनों में से 54 खराब पड़ी हैं, केवल 42 मशीनों से ही काम चलाया जा रहा है।
  • •सेक्टर-25, सेक्टर-11, राजाखेड़ी और स्थानीय स्लम बस्तियों से डेंगू के मरीज सामने आए हैं जिनका उपचार नागरिक अस्पताल में जारी है।
  • •स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि खराब मशीनों को ठीक कराने के लिए पत्र लिखा गया है और प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-लार्वा गतिविधियां तेज कर दी गई हैं।

पानीपत जिले में वेक्टर जनित बीमारियों, विशेषकर डेंगू और मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके मुकाबले स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही लाचारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पिछले कुछ दिनों में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि संक्रमण अब शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक अपने पैर पसार चुका है। राजाखेड़ी गांव और शहरी स्लम बस्तियों के साथ-साथ शहर के विकसित सेक्टरों से भी मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है, जिससे आम जनता में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं।

स्थानीय स्तर पर धरातल की स्थिति का जायजा लिया जाए तो प्रशासनिक तैयारियों की पोल खुलती नजर आती है। पंचायतों के पास मच्छरों के खात्मे के लिए कुल 96 फॉगिंग मशीनें मौजूद हैं, लेकिन इनमें से 54 मशीनें लंबे समय से तकनीकी खराबी के चलते धूल फांक रही हैं। धरातल पर केवल 42 मशीनें ही काम कर पा रही हैं, जो इतने बड़े क्षेत्रफल की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी साबित हो रही हैं। इसके अलावा, जिला नागरिक अस्पताल जैसी मुख्य स्वास्थ्य इकाई में भी दो में से एक फॉगिंग मशीन खराब पड़ी है, जो प्रशासनिक सुस्ती का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

संक्रमण का फैलता दायरा और मरीजों की बढ़ती संख्या

जिले में डेंगू के मरीजों का आंकड़ा अब बढ़कर 62 तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही मलेरिया के 12 और चिकनगुनिया के चार मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। बुधवार को जहां सेक्टर-25 और सेक्टर-11 जैसे पॉश इलाकों से डेंगू के मरीज सामने आए, वहीं शुक्रवार को राजाखेड़ी गांव और शहर के घनी आबादी वाले स्लम क्षेत्रों से नए संक्रमितों की पुष्टि हुई। इन सभी मरीजों का इलाज जिला नागरिक अस्पताल में चल रहा है। मौसम में बदलाव और लगातार खड़े पानी के कारण मच्छरों का प्रजनन तेजी से हो रहा है, जिससे हालात और भी चिंताजनक होते जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मलेरिया का संक्रमण मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है, जबकि डेंगू का वाहक मादा एडिज एजिप्टाई मच्छर होता है। इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों में तेज ठंड लगकर कंपकंपी के साथ बुखार आना, पसीने के साथ तापमान का नीचे आना, पूरे शरीर और मांसपेशियों में असहनीय दर्द, सिरदर्द, उल्टी और छाती तथा शरीर के ऊपरी हिस्सों पर लाल दाने निकलना शामिल हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए और किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

बीमारी का प्रकारकुल मामलों की संख्यामुख्य प्रभावित क्षेत्रउपलब्ध फॉगिंग मशीनें (खराब/कुल)
डेंगू62राजाखेड़ी, स्लम क्षेत्र, सेक्टर-11 व 2554 खराब / 96 कुल (ग्रामीण क्षेत्र)
मलेरिया12जिले के विभिन्न ग्रामीण व शहरी वार्डकार्यरत मशीनें: मात्र 42
चिकनगुनिया04पानीपत नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रनागरिक अस्पताल: 1 मशीन खराब

स्वास्थ्य विभाग के दावे और प्रशासनिक जवाबदेही

एक तरफ जहां फॉगिंग मशीनों की खराबी और संसाधनों की कमी के कारण मच्छरों पर नियंत्रण पाने में मुश्किलें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग की तरफ से औपचारिकताएं पूरी करने के दावे किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और सप्ताह में कम से कम एक दिन 'सूखा दिवस' (ड्राई डे) अवश्य मनाएं, ताकि कूलरों, गमलों और पानी की टंकियों में डेंगू का लार्वा पनप न सके।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित इलाकों में विशेष टीमों को भेजकर छिड़काव कराया जा रहा है। हालांकि, धरातल पर फॉगिंग न होने की शिकायतें आम जनता की परेशानियों को बयां करती हैं। जब तक खराब पड़ी मशीनों को तुरंत दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक इस महामारीनुमा स्थिति पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल साबित हो सकता है।

"पंचायतों के पास मौजूद खराब फॉगिंग मशीनों को ठीक कराने के लिए संबंधित उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। इसके साथ ही, जिन क्षेत्रों से डेंगू या मलेरिया के मरीज सामने आ रहे हैं, वहां विशेष टीमों द्वारा फॉगिंग कराई जा रही है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।" - डॉ. बिजेंद्र हुड्डा, जिला मलेरिया अधिकारी

नागरिकों की दैनिक जीवनशैली पर असर और बचाव के उपाय

फैलते डेंगू-मलेरिया के कारण पानीपत के आम जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लोग अपने घरों में शाम होते ही खिड़की-दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं और बच्चों को बाहर भेजने से कतरा रहे हैं। पानीपत लाइव की ग्राउंड पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कई ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से फॉगिंग न होने के कारण लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति गहरी नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है।

इस गंभीर स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए न केवल स्वास्थ्य विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लानी होगी, बल्कि स्थानीय निकायों को भी आपसी समन्वय बनाकर युद्ध स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाना होगा। नागरिकों को भी चाहिए कि वे अपने स्तर पर पूरी सावधानी बरतें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरदानी का उपयोग करें ताकि इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सके।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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