पानीपत शहर के प्रतिष्ठित दयाल सिंह पब्लिक स्कूल में शनिवार को विद्यालय परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया। पर्यावरण अध्ययन विभाग (EVS Department) की ओर से आयोजित 'सद्भावना उत्सव : विविधता में एकता' प्रतियोगिता के दौरान कक्षा चौथी और पांचवीं के विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और नृत्यों से नन्हे विद्यार्थियों को अवगत कराना तथा उनके भीतर राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करना था।
सद्भावना उत्सव के दौरान स्कूली बच्चों की ऊर्जा, पारंपरिक वेशभूषा और अनुशासित तालमेल ने उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों व साथी विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चौथी और पांचवीं कक्षा के नन्हे कलाकारों ने मंच पर अपनी नृत्य प्रस्तुतियों के जरिए भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से लेकर पश्चिमी और उत्तरी राज्यों तक की सांस्कृतिक छटा बिखेरी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुई भारत की विविध लोककलाएं
प्रतियोगिता के अंतर्गत विभिन्न कक्षाओं के लिए अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक थीम निर्धारित की गई थी। कक्षा चौथी के विद्यार्थियों को राजस्थान की मरुस्थलीय कला, गुजरात के डांडिया व गरबा, महाराष्ट्र की लावणी और हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी लोकसंस्कृति पर आधारित नृत्य प्रस्तुत करने का अवसर मिला। बच्चों ने इन राज्यों की पारंपरिक पोशाक पहनकर अत्यंत लयबद्ध ढंग से अपनी कला प्रदर्शित की।
वहीं कक्षा पांचवीं के नन्हे प्रतिभागियों को असम की बिहू नृत्य शैली, गुजरात के लोकनृत्य, पश्चिम बंगाल की पारंपरिक नृत्य परंपरा और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध लोकनृत्यों की शैलियां आवंटित की गई थीं। असमिया बिहू की चंचल लय और बंगाल के भावपूर्ण नृत्यों को देखकर पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विद्यार्थियों के भाव-भंगिमा और वस्त्र-विन्यास में गजब की परिपक्वता देखने को मिली।
| कक्षा | आवंटित राज्य व संस्कृति थीम | प्रथम स्थान | द्वितीय स्थान | तृतीय स्थान | सांत्वना पुरस्कार |
|---|---|---|---|---|---|
| कक्षा 4ठी | राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश | बानी | जीवा | मेहर | आस्था और कृतिका |
| कक्षा 5वीं | असम, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश | ध्रुविका | शौर्य | परिशा | हीरल और सानवी |
प्रतियोगिता परिणाम एवं विजेताओं का सम्मान
सांस्कृतिक प्रतियोगिता के समापन के उपरांत निर्णायक मंडल ने बच्चों के प्रदर्शन, वेशभूषा, तालमेल और प्रस्तुति के आधार पर विजेताओं की घोषणा की। कक्षा चौथी की प्रतिस्पर्धा में छात्रा बानी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं जीवा ने द्वितीय तथा मेहर ने तृतीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। इसी वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आस्था और कृतिका को सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया।
कक्षा पांचवीं के कड़े मुकाबले में ध्रुविका ने अपनी शानदार प्रस्तुति से प्रथम स्थान पर कब्जा जमाया। शौर्य को दूसरा तथा परिशा को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। पांचवीं कक्षा की हीरल और सानवी को उनकी सराहनीय कोशिश के लिए सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। सभी विजेता प्रतिभागियों को विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
"इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। जब बच्चे कम उम्र में देश के विभिन्न राज्यों की विविध परंपराओं और कला रूपों को समझते हैं, तो उनके भीतर भारत की अखंडता और अन्य संस्कृतियों के प्रति आदर व सम्मान की भावना स्वतः ही बलवती होती है।"
- डॉ. नीलम वत्स, मुख्याध्यापिका, दयाल सिंह पब्लिक स्कूल, पानीपत
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सह-शैक्षणिक गतिविधियों का योगदान
विद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग का मानना है कि केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को समाज और देश के विविधतापूर्ण परिवेश से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। 'सद्भावना उत्सव' के माध्यम से बच्चों ने न केवल नृत्य सीखा, बल्कि विभिन्न प्रदेशों की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं।
शिक्षकों ने बच्चों की इस सामूहिक मेहनत की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के मंच से बच्चों का झिझक मिटता है और उनकी बहुमुखी प्रतिभा निखरकर सामने आती है। अभिभावकों ने भी दयाल सिंह पब्लिक स्कूल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताओं से बच्चों का मानसिक और व्यावहारिक विकास तेजी से होता है।
प्रशासनिक संदेश और आगामी योजनाएं
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रशासन ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में भी इस तरह के अंतर-कक्षा और अंतर-सदन प्रतियोगिताओं का निरंतर आयोजन किया जाएगा। विद्यालय का उद्देश्य छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ कला, साहित्य और खेलकूद के क्षेत्र में भी अव्वल बनाना है। इस सफल आयोजन के साथ ही सद्भावना उत्सव राष्ट्रगान और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ संपन्न हुआ।




