त्योहारों के इस पावन सीजन में आमजन की सेहत के साथ किस हद तक खिलवाड़ हो रहा है, इसकी एक बानगी पानीपत जिले में सामने आई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से बाजार से जुटाए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जब प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट सामने आई, तो उसमें मिलावटखोरी का एक बड़ा सच उजागर हुआ। पिछले दो महीनों के दौरान जिले के विभिन्न बाजारों से कुल 63 संदिग्ध नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 11 नमूनों की रिपोर्ट पूरी तरह फेल पाई गई है। इन रिपोर्टों ने एक बार फिर मिलावटखोरों के हौसलों और विभागीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेष तौर पर दीपावली और अन्य आगामी पर्वों के मद्देनजर जब बाजारों में दूध, मावे, पनीर और मिठाइयों की मांग अपने चरम पर होती है, ऐसे समय में इस प्रकार के हानिकारक तत्वों का मिलना बेहद चिंताजनक है। पानीपत लाइव ब्यूरो की ग्राउंड पड़ताल और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फेल पाए गए नमूनों में न केवल खाद्य गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की गई है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन से सीधा खिलवाड़ करने वाले रसायन और अमानक सामग्रियां मिलाई गई हैं। त्योहारों के मुहाने पर खड़ी इस स्थिति ने उपभोक्ताओं को पसोपेश में डाल दिया है कि वे बाजार से क्या खरीदें और क्या नहीं।
जांच में उजागर हुई खतरनाक मिलावट और रासायनिक खेल
प्रयोगशालाओं से प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, मावा तैयार करने की प्रक्रिया में यूरिया, स्टार्च (मैदा या अरारोट) और रिफाइंड ऑयल जैसी अस्वास्थ्यकर सामग्रियों का खुलकर उपयोग किया जा रहा है। कुछ खाद्य नमूनों में फैट की मात्रा निर्धारित मानकों से बेहद कम पाई गई, जो सीधे तौर पर उत्पाद की गुणवत्ता में भारी गिरावट को दर्शाती है। इसके अलावा, दूध को गाढ़ा दिखाने और उसमें फैट का प्रतिशत कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए लिक्विड डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, यूरिया और सिंथेटिक फैट तक के इस्तेमाल की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, मिठाइयों की सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाले चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम फॉयल और उन्हें आकर्षक रूप देने के लिए प्रतिबंधित रासायनिक रंगों का प्रयोग भी जांच के दायरे में आया है, जो मानव शरीर के अंगों के लिए अत्यंत हानिकारक है।
| खाद्य पदार्थ का प्रकार | कुल लिए गए नमूने | फेल नमूनों की संख्या | मुख्य रूप से पाई गई मिलावट |
|---|---|---|---|
| दूध और मावा उत्पाद | 63 (कुल संदिग्ध) | 11 | यूरिया, स्टार्च, सिंथेटिक फैट, रिफाइंड ऑयल |
| मिठाइयां व अन्य उत्पाद | जांच प्रक्रियाधीन | - | प्रतिबंधित रंग, एल्युमिनियम फॉयल |
प्रशासनिक कार्रवाई की सुस्त चाल और विभाग की दलीलें
हालांकि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कुछ समय पहले त्वरित कदम उठाते हुए पिछले सप्ताह करीब 600 किलोग्राम दूषित मिठाई और 400 किलोग्राम दूध को मौके पर ही नष्ट कराया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से अचानक कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ जाने से कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। त्योहारी सीजन के पीक पर जब बाजारों में मिलावटखोरों पर नकेल कसने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस दौरान औचक निरीक्षणों का ग्राफ गिरना नागरिकों के बीच रोष का कारण बन रहा है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. विक्रम पचिसिया ने इस देरी पर सफाई देते हुए बताया कि सामान्यतः रिपोर्ट आने में करीब बीस दिन का समय लगता है, लेकिन इस बार कुछ तकनीकी कारणों और कार्यभार के चलते रिपोर्ट आने में वक्त लगा है।
"विभाग की टीमें लगातार संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग और जांच कर रही हैं। जो नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं, उनके संबंधित विक्रेताओं और प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। आम नागरिकों से भी अपील है कि वे त्योहारों के दौरान मिठाइयां खरीदते वक्त उनकी स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें।" - डॉ. विक्रम पचिसिया, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
स्थानीय जनजीवन और बाजार की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
पानीपत के स्थानीय बाजारों, हलपाइयों और मिष्ठान विक्रेताओं के कारोबार पर इस मिलावटखोरी के खुलासे का नकारात्मक असर पड़ रहा है। जो ईमानदार व्यापारी अपनी गुणवत्ता के दम पर कारोबार करते हैं, उन्हें भी इन मिलावटखोरों की वजह से ग्राहकों के संदेह का सामना करना पड़ रहा है। आम नागरिक अब बाजारों में खरीदारी करते समय अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं और स्थानीय प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि केवल सैंपलिंग तक सीमित रहने के बजाय दोषियों पर कठोरतम दंडत्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यापारी जनस्वास्थ्य के साथ खिलваड़ करने का दुस्साहस न कर सके।
आगामी कदम और उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सतर्कता
जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब यह स्पष्ट किया है कि जिन 11 प्रतिष्ठानों के नमूने फेल साबित हुए हैं, उनके संचालकों को नोटिस जारी करने के साथ ही विधिक प्रक्रिया के तहत अदालत में चालान पेश किए जाएंगे और गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज होगी। पानीपत लाइव नागरिकों से यह अपील करता है कि वे किसी भी संदेहास्पद खाद्य सामग्री की खरीद से बचें और स्थानीय प्रशासन के हेल्पलाइन माध्यमों पर तुरंत इसकी सूचना दें, ताकि स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में हर नागरिक अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सके।




