पानीपत जिले के स्वास्थ्य महकमे ने पीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों की धज्जियां उड़ाने वाले निजी चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ एक बहुत बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निगरानी टीमों ने जिले के विभिन्न हिस्सों में औचक निरीक्षण अभियान चलाया, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करने वाले पांच निजी अस्पतालों को चिन्हित किया गया। विभाग की इस अचानक हुई दबिश से जिले के निजी चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है और गैर-कानूनी तरीके से काम करने वाले संचालकों में खलबली साफ तौर पर देखी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विशेष औचक निरीक्षण अभियान की कमान खुद नोडल अधिकारियों ने संभाल रखी थी। पानीपत शहर के भीतर तीन बड़े निजी अस्पतालों में जब रिकॉर्ड खंगाले गए, तो भारी अनियमितताएं सामने आईं। इसके अलावा, ग्रामीण और अर्ध-नगरीय क्षेत्रों की कमान संभालते हुए इसराना और समालखा क्षेत्र के एक-एक अस्पताल में भी नियमों की गंभीर अनदेखी पकड़ी गई। विभाग की इस सख्त कार्रवाई से यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लिंगानुपात संतुलित रखने वाले कड़े कानूनों के पालन में लापरवाही बरतने वालों को अब किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
अनियमितताओं का सिलसिलेवार ब्योरा और औचक निरीक्षण की प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग को पिछले कुछ दिनों से लगातार यह गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं कि जिले के कई निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पीएनडीटी अधिनियम के नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के पानीपत शहर, इसराना और समालखा के चुनिंदा अस्पतालों और क्लीनिकों पर एक साथ औचक दबिश दी। निरीक्षण के दौरान जब इन संस्थानों के पिछले रिकॉर्ड और गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण रजिस्टरों की गहन जांच की गई, तो सारा सच सामने आ गया।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई मामलों में बिना एएनसी (एंटीनेटल केयर) कार्ड के ही गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड स्कैन किए जा रहे थे। नियमानुसार किसी भी गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की निगरानी और उचित दस्तावेजों के बिना स्कैन करना कानूनन जुर्म है। पीएनडीटी नोडल अधिकारी ने मौके पर ही सभी अधूरे रिकॉर्ड और संदेहास्पद प्रविष्टियों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद नियमों का पालन न करने वाले कुल पांचों निजी संस्थानों की अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील करने की कठोर प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की गई।
| क्षेत्र / ब्लॉक | कार्रवाई का प्रकार | उल्लंघन का मुख्य कारण | वर्तमान प्रशासनिक स्थिति |
|---|---|---|---|
| पानीपत शहर | अल्ट्रासाउंड मशीन सील | अधूरा रिकॉर्ड और बिना एएनसी कार्ड जांच | स्पष्टीकरण तलब, नोटिस जारी |
| इसराना ब्लॉक | अल्ट्रासाउंड मशीन सील | पीएनडीटी नियमों की अनदेखी | रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी गई |
| समालखा क्षेत्र | अल्ट्रासाउंड मशीन सील | निर्धारित दस्तावेजों का अभाव | कार्रवाई जारी, जवाब का इंतजार |
अधिकारियों की दो टूक: भविष्य में भी जारी रहेगा ताबड़तोड़ निरीक्षण अभियान
इस पूरी कार्रवाई के संबंध में पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. अभिनंदन वत्स ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य जिले में कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुप्रथा को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि औचक निरीक्षण के दौरान पानीपत शहरी क्षेत्र के तीन और इसराना तथा समालखा के एक-एक अस्पताल में जो रिकॉर्ड हाथ लगे, वे बेहद असंतोषजनक और नियम विरुद्ध थे। टीम ने अपनी विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंप दी है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय मलिक ने मीडिया से बातचीत में दो टूक शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अस्पताल या डॉक्टर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन पांच अस्पतालों की मशीनें सील की गई हैं, उनके संचालकों को औपचारिक नोटिस भेजकर लिखित जवाब मांगा गया है। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ स्वास्थ्य अधिनियम और पीएनडीटी एक्ट के तहत अदालती कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश जैसी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
"जिले में पीएनडीटी एक्ट का सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाया जा रहा है। जिन पांच अस्पतालों में बिना एएनसी कार्ड और अधूरा रिकॉर्ड रख कर अल्ट्रासाउंड किए जा रहे थे, उनकी मशीनें सील कर दी गई हैं। यदि संचालकों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" - डॉ. विजय मलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पानीपत
पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती का स्थानीय व्यवस्था पर असर
स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी कार्रवाई का असर अब पानीपत जिले के अन्य निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई क्लीनिक संचालकों ने अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं और दस्तावेजों को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है ताकि वे किसी भी औचक निरीक्षण के दौरान कानूनी शिकंजे में न फंस सकें। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के इस कदम की भरपूर सराहना की है। उनका मानना है कि इस तरह की नियमित और निष्पक्ष छापेमारी से लिंगानुपात में सुधार होगा और अवैध गर्भधारण परीक्षण करने वाले तत्वों पर लगाम लगेगी।
प्रशासन की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि यह अभियान केवल एक बार की औपचारिकता नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में जिले के कोने-कोने में इस तरह की औचक जांचों का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा। पानीपत के नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उनके संज्ञान में कोई भी संस्थान नियमों के विरुद्ध कार्य करता हुआ पाया जाता है, तो वे तुरंत स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दें ताकि भ्रूण हत्या मुक्त हरियाणा के सपने को पूरी ईमानदारी के साथ धरातल पर उतारा जा सके।




