हरियाणा के पानीपत जिले में इस बार धान के सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन प्रशासनिक और एजेंसियों की लचर व्यवस्था के कारण अन्नदाताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंडियों में दिन-प्रतिदिन किसानों की फसल भारी मात्रा में पहुंच रही है, जिसके चलते खरीद कार्य में तेजी तो आई है, परंतु सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा समय पर धान का उठान न किए जाने के कारण गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। इस व्यवस्थागत सुस्ती के कारण किसानों का करीब 2.65 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी अटका हुआ है, जिससे आगामी रबी फसल की बुआई और त्योहारों की तैयारियों में जुटे किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
पानीपत लाइव ब्यूरो की धरातल पर की गई पड़ताल के अनुसार, जिले की तमाम मंडियों में अब तक कुल 2,38,726 मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है। इसमें बासमती और 1509 किस्मों की आवक सबसे अधिक है। नियमानुसार मंडियों में पहुंची इस उपज की खरीद तो कर ली गई है, लेकिन जब बात गोदामों या मिलों तक इसके परिवहन यानी उठान की आती है, तो सरकारी एजेंसियां काफी पिछड़ती नजर आ रही हैं। अब तक केवल 11,502.7 मीट्रिक टन धान का ही वास्तविक उठान हो पाया है, जबकि लगभग 4,944.5 मीट्रिक टन धान अभी भी खुले आसमान के नीचे या मंडियों में शेड के सहारे अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
खरीद एजेंसियों की धीमी रफ्तार और बकाया भुगतान का पूरा गणित
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में धान उठान की मौजूदा दर महज 69.93 प्रतिशत दर्ज की गई है। सरकारी नियमों के मुताबिक खरीद एजेंसियों का यह दायित्व बनता है कि वे तय समयसीमा के भीतर उठान प्रक्रिया को पूरा करें ताकि किसानों को उनकी फसल का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में बिना किसी अड़चन के मिल सके। कुल उठान और खरीद के आधार पर एजेंसियों की ओर से किसानों को कुल 28.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। इसमें प्रमुख रूप से हैफेड एजेंसी की देय राशि 10.05 करोड़ रुपये और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (एचडब्ल्यूसी) की देय राशि करीब 18.03 करोड़ रुपये बनती है।
हालांकि एजेंसियों ने अब तक कुल 25.43 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों के खातों में जारी कर दिया है, लेकिन उठान में हो रही देरी की तकनीकी बाधाओं के चलते लगभग 2.65 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी रुका हुआ है। अन्नदाताओं का कहना है कि वे सरकार के डिजिटल और समयबद्ध भुगतान के दावों के बीच कागजी औपचारिकताओं और बैंक-मंडी के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
| एजेंसी का नाम | कुल देय भुगतान (करोड़ में) | अब तक हुआ भुगतान (करोड़ में) | अटका हुआ भुगतान (करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| हैफेड (HAFED) | ₹10.05 करोड़ | - | - |
| हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (HWC) | ₹18.03 करोड़ | - | - |
| कुल योग | ₹28.08 करोड़ | ₹25.43 करोड़ | ₹2.65 करोड़ |
अन्नदाताओं का दर्द: बुआई के संकट और त्योहार के बीच पिसता किसान
इसराना ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बुआना लाखू गांव के प्रगतिशील किसान राममेहर सिंह ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने करीब एक सप्ताह पहले ही अपनी धान की फसल मंडी में बेची थी। सरकारी प्रावधानों के अनुसार किसानों को फसल बेचने के 72 घंटे के भीतर सीधा बैंक भुगतान मिलना चाहिए था। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। राममेहर ने बताया कि उन्हें अब खेतों में अगली फसल यानी गेहूं की बिजाई के लिए खाद, उन्नत बीज और डीजल का प्रबंध करना है, जिसके लिए उन्हें नगद पैसों की सख्त जरूरत है। भुगतान न मिलने के कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे कृषि कार्यों को कैसे आगे बढ़ाएं।
इसी प्रकार मांडी गांव के किसान कुलदीप सिंह ने प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंडियों में समय पर धान का उठान न होने से उनकी बिक चुकी फसल भी कई दिनों से खुले में पड़ी है। कुलदीप का कहना है कि सिर पर दिवाली का पावन पर्व नजदीक है, और ऐसे समय में जब हर परिवार अपने बच्चों के साथ उत्सव की तैयारियां करना चाहता है, तब फसल का पैसा अटक जाने के कारण उनके घरों में मायूसी का माहौल बनता जा रहा है। किसान परिवार अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए मंडियों और आढ़तियों के चक्कर काटने को अभिशप्त हैं।
"धान की आवक के साथ खरीद का कार्य लगातार जारी है। सभी संबंधित सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे उठान प्रक्रिया में तेजी लाएं और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी किसान का भुगतान लंबित न रहे। लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।" - डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त, पानीपत
प्रशासनिक सख्ती और आगामी सुधारात्मक कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन अब हरकत में आ गया है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने सभी खरीद एजेंसियों के जिला प्रभारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट हिदायतें दी हैं कि मंडियों से धान का उठान युद्धस्तर पर किया जाए। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंडियों में स्पेस की कमी न हो और आने वाले दिनों में किसानों को भुगतान के लिए जरा भी इंतजार न करना पड़े। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दो-तीन दिनों में उठान की गति को दोगुना नहीं किया गया, तो मंडियों में जगह की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। 'पानीपत लाइव' इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और प्रशासन की अगली कार्रवाई का अपडेट जल्द पाठकों तक पहुंचाएगा।




