पानीपत लाइव (ब्यूरो): यमुना की पावन लहरों के समीप बसे पानीपत के सीमावर्ती गांव राणा माजरा में शनिवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक और सामाजिक सुधार समागम 'तब्लीगी इज्तिमा' का विधिवत शुभारंभ हुआ। तड़के चार बजे फज्र की नमाज के साथ शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन ने पूरे क्षेत्र को एक विशेष धार्मिक रंग में रंग दिया है। पानीपत जिले में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित हो रहे इस इज्तिमा में न केवल हरियाणा, बल्कि देश-विदेश से हजारों अकीदतमंद अपनी आस्था और अनुशासन की मिसाल पेश करने पहुंचे हैं।
समागम के पहले दिन का मुख्य आकर्षण दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद का संबोधन रहा। उन्होंने अपने प्रभावशाली प्रवचन में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। आयोजन स्थल पर बने विशाल पंडाल में चारों ओर आध्यात्मिक शांति और अनुशासन का माहौल नजर आया, जहां पांच वक्त की नमाज सामूहिक रूप से अदा की जा रही है।
मानवीय सौहार्द और संवैधानिक मर्यादा पर विशेष जोर
मौलाना साद ने अपने संबोधन में वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम की शिक्षाएं नफरत के लिए कोई स्थान नहीं छोड़तीं। उन्होंने कहा, "अगर समाज में कहीं नफरत दिखती है, तो उसका जवाब केवल मोहब्बत, धैर्य और समझदारी से दिया जाना चाहिए।" उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे किसी भी परिस्थिति में उत्तेजित होकर कानून को अपने हाथ में न लें।
मौलाना ने जोर देकर कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां के नागरिकों को हर विवाद या समस्या का समाधान देश के संविधान और कानूनी ढांचे के भीतर रहकर ही खोजना चाहिए। यह संदेश न केवल धार्मिक था, बल्कि सामाजिक स्थिरता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
| विशेष विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| आयोजन स्थल | गांव राणा माजरा (यमुना खादर क्षेत्र), पानीपत |
| कुल क्षेत्रफल | 180 एकड़ (60 एकड़ में मुख्य पंडाल) |
| प्रमुख वक्ता | मौलाना साद (निजामुद्दीन मरकज) |
| आयोजन की अवधि | 31 अक्टूबर से 02 नवंबर तक |
| स्वयंसेवक | सनौली ब्लॉक के 6 गांवों के ग्रामीण |
| सुरक्षा व्यवस्था | पानीपत पुलिस, पीसीआर और डायल-112 |
शिक्षा और व्यापारिक नैतिकता का पाठ
तब्लीगी इज्तिमा के मंच से केवल आध्यात्मिक चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि व्यावहारिक जीवन को बेहतर बनाने के सूत्र भी साझा किए गए। वक्ताओं ने 'दीनी' (धार्मिक) तालीम के साथ-साथ आधुनिक और उच्च शिक्षा को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उनका तर्क था कि बिना ज्ञान और शिक्षा के कोई भी समाज तरक्की नहीं कर सकता। युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि वे देश की सेवा कर सकें।
"सच्चा मुसलमान वही है जिसकी जुबान और हाथ से दूसरे सुरक्षित रहें। हमें अपने व्यापार में ईमानदारी बरतनी चाहिए और हलाल रोजी कमाकर एक स्वस्थ समाज की नींव रखनी चाहिए।" - मौलाना साद
इसके अलावा, व्यापारिक जगत में गिरते नैतिक मूल्यों पर चिंता जताते हुए मौलाना ने कहा कि सच्चाई और ईमानदारी से किया गया कारोबार ही बरकत लाता है। उन्होंने मिलावटखोरी, झूठ और धोखाधड़ी से बचने की सख्त हिदायत दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने पूरी गंभीरता से सुना और आत्मसात करने का संकल्प लिया।
180 एकड़ में अभूतपूर्व व्यवस्था और स्थानीय सहयोग
इस विशाल समागम के लिए व्यवस्थाएं किसी चुनौती से कम नहीं थीं, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने इसे सेवा का अवसर मानकर बखूबी अंजाम दिया। राणा माजरा और सनौली ब्लॉक के करीब छह गांवों के लोग दिन-रात सेवा में जुटे हैं। 180 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस आयोजन स्थल पर 60 एकड़ में वॉटरप्रूफ टेंट लगाया गया है। दूर-दराज से आए मेहमानों के लिए वजूखाना, शुद्ध पेयजल और खानपान की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा के मोर्चे पर पानीपत जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। आयोजन स्थल के चारों ओर पुलिस नाके बनाए गए हैं और पीसीआर वाहनों के जरिए लगातार गश्त की जा रही है। एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी आपात स्थिति के लिए तैनात की गई हैं।
आगामी कार्यक्रम और सामूहिक दुआ
तीन दिनों तक चलने वाले इस इज्तिमा में इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों, जीवन की सादगी और आपसी भाईचारे पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। आयोजन के अंतिम दिन, यानी 2 नवंबर को, एक विशेष सामूहिक दुआ (प्रार्थना) का आयोजन होगा। इस दुआ में देश में अमन-चैन, खुशहाली, आपसी भाईचारे की मजबूती और पूरी इंसानियत की भलाई के लिए प्रार्थना की जाएगी। प्रशासन को उम्मीद है कि समापन के दिन भीड़ और बढ़ सकती है, जिसके लिए अतिरिक्त यातायात प्रबंधन की योजना बनाई गई है।




