पानीपत जिले के खिलाड़ियों ने एक बार फिर खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा का डंका बजाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार में 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित हुई नेशनल ग्रैपलिंग चैंपियनशिप में पानीपत जिले के तीन होनहार खिलाड़ियों ने पदक जीतकर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि ग्रैपलिंग जैसे तकनीकी खेल में ग्रामीण आंचल के युवाओं ने अपनी तकनीक और ताकत का बेहतरीन संतुलन पेश किया है।
समालखा स्थित ईगल स्पोर्ट्स एकेडमी में अभ्यास करने वाले इन खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के विभिन्न आयु वर्गों में हिस्सा लिया था। चैंपियनशिप के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी फुर्ती और दांव-पेच से विपक्षी खिलाड़ियों को मात दी। इस बड़ी सफलता के बाद समालखा क्षेत्र में खुशी की लहर है और एकेडमी में जश्न का माहौल बना हुआ है।
विजेता खिलाड़ियों का विवरण और प्रदर्शन
प्रतियोगिता के परिणामों पर नजर डालें तो अंडर-19 आयु वर्ग में गौरव ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) हासिल किया। वहीं, इसी आयु वर्ग में गौरव सहरावत ने कड़े संघर्ष के बाद कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता। इसके अलावा, कम उम्र के वर्ग यानी अंडर-15 में लविश ने अपनी तकनीक का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इन तीनों खिलाड़ियों की जीत ने यह साबित कर दिया है कि पानीपत की खेल नर्सरी अब ग्रैपलिंग जैसे खेलों में भी माहिर हो रही है।
| खिलाड़ी का नाम | आयु वर्ग | जीता गया पदक | कोच/एकेडमी |
|---|---|---|---|
| गौरव | अंडर-19 | स्वर्ण (Gold) | ईगल स्पोर्ट्स एकेडमी, समालखा |
| गौरव सहरावत | अंडर-19 | कांस्य (Bronze) | ईगल स्पोर्ट्स एकेडमी, समालखा |
| लविश | अंडर-15 | कांस्य (Bronze) | ईगल स्पोर्ट्स एकेडमी, समालखा |
कोच प्रिंस राजपूत का मार्गदर्शन और खिलाड़ियों की मेहनत
इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनके कोच प्रिंस राजपूत की कड़ी मेहनत और सटीक रणनीति का बड़ा हाथ है। कोच प्रिंस राजपूत ने बताया कि खिलाड़ी प्रतिदिन घंटों तक अपनी तकनीक को निखारने के लिए पसीना बहाते हैं। ग्रैपलिंग एक ऐसा खेल है जिसमें शारीरिक शक्ति के साथ-साथ मानसिक चतुराई और तकनीक की बहुत आवश्यकता होती है। एकेडमी में खिलाड़ियों को न केवल शारीरिक रूप से तैयार किया जाता है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दांव-पेच भी सिखाए जाते हैं।
"हमारे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर जो पदक जीते हैं, वह उनकी निरंतर साधना का परिणाम है। गौरव, गौरव सहरावत और लविश तीनों ने प्रतियोगिता के दौरान बहुत ही संयम और तकनीक के साथ मुकाबला किया। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में ये खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक लाएंगे।" - प्रिंस राजपूत, कोच, ईगल स्पोर्ट्स एकेडमी
स्थानीय जनजीवन और युवाओं पर प्रभाव
समालखा जैसे इलाके से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना अन्य ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। पानीपत जिले में कुश्ती और कबड्डी के प्रति पहले से ही गहरा लगाव रहा है, लेकिन अब ग्रैपलिंग जैसे आधुनिक खेलों में युवाओं की बढ़ती रुचि यह दर्शाती है कि जिले की खेल प्रतिभाएं अब बहुमुखी हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने खिलाड़ियों का स्वागत करने की तैयारी कर ली है और इसे पूरे समालखा क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया है।
भविष्य की योजनाएं और आगामी प्रतियोगिताएं
राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद अब इन खिलाड़ियों का लक्ष्य आगामी राज्य स्तरीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना है। कोच प्रिंस राजपूत ने बताया कि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को अब और भी उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अपनी कमियों को दूर कर सकें। जिले के खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि प्रशासन और खेल विभाग भी इन उभरती हुई प्रतिभाओं को उचित सुविधाएं और मंच प्रदान करेगा ताकि पानीपत का नाम खेलों की दुनिया में हमेशा ऊंचा रहे।




