पानीपत सहकारी चीनी मिल प्रबंधन ने आगामी गन्ना पेराई सत्र 2024-25 को सुचारू, सुदृढ़ और तकनीकी रूप से बाधारहित बनाने के लिए अपनी प्रशासनिक व धरातलीय गतिविधियां तेज कर दी हैं। मिल में पेराई कार्य की शुरुआत से पूर्व सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में हरियाणा शुगरफेड के मार्गदर्शन में दो महत्वपूर्ण ई-टेंडर जारी किए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पेराई के दौरान किसी भी प्रकार की यांत्रिक विफलता या प्रशासनिक अव्यवस्था से बचना है, ताकि जिले के गन्ना उत्पादक किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
स्थानीय चीनी मिल परिसर में तकनीकी और प्रयोगशाला स्तर पर होने वाली गतिविधियों को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। जारी निविदाओं में प्रयोगशाला (लैब) संचालन, केन हार्वेस्टर प्रबंधन और केन यार्ड की दैनिक व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक कुशल व अकुशल मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। मिल प्रशासन का प्रयास है कि पेराई सत्र के पहले दिन से ही गन्ने की गुणवत्ता जांच, वजन माप और यार्ड में वाहनों की आवाजाही बिना किसी जाम या रुकावट के संचालित हो सके।
पेराई सत्र 2024-25 की निविदाओं और व्यवस्थाओं का ब्यौरा
चीनी मिल प्रबंधन द्वारा जारी ई-टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से संचालित की जा रही है। इच्छुक एजेंसियां और ठेकेदार तीन नवंबर तक इसके लिए ऑनलाइन माध्यम से अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। निर्धारित अंतिम तिथि समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन शाम को मिल परिसर स्थित प्रबंध निदेशक (एमडी) कार्यालय में प्राप्त सभी तकनीकी व वित्तीय निविदाएं खोली जाएंगी। निष्पक्ष चयन के बाद चयनित एजेंसियों को तुरंत प्रभाव से कार्य सौंप दिया जाएगा ताकि सत्र शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी की जा सकें।
इसके साथ ही मिल के विभिन्न उत्पादन विभागों में स्थापित भारी-भरकम इलेक्ट्रिकल मोटरों और मशीनरी के रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पेराई के व्यस्त समय में लगातार चलने के कारण मोटरों के जलने या खराब होने की आशंका बनी रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए 'रिवाइंडिंग ऑफ बर्न मोटर' कार्य के लिए अलग से ई-टेंडर आमंत्रित किया गया है। जली हुई मोटरों की समयबद्ध मरम्मत और ओवरहालिंग से उत्पादन प्रक्रिया में अचानक आने वाले व्यवधानों पर पूर्ण रूप से अंकुश लगेगा।
| व्यवस्था का विषय | मुख्य कार्य विवरण | आवेदन की अंतिम तिथि | निविदा खोलने का स्थान |
|---|---|---|---|
| लैब व मैनपावर टेंडर | प्रयोगशाला संचालन, केन हार्वेस्टर व केन यार्ड प्रबंधन | 3 नवंबर (ऑनलाइन) | एमडी कार्यालय, पानीपत मिल |
| मोटर रिपेयर टेंडर | विभिन्न विभागों की जली/खराब मोटरों की रिवाइंडिंग | 3 नवंबर (ऑनलाइन) | एमडी कार्यालय, पानीपत मिल |
| मुख्य उद्देश्य | पेराई सत्र में निर्बाध गन्ने की आवक व त्वरित पेराई | सत्र पूर्व समय सीमा | पानीपत सहकारी चीनी मिल |
प्रबंध निदेशक की प्राथमिकता: किसान हित और निर्बाध संचालन
पानीपत सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक नवदीप सिंह ने इस संदर्भ में प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि मिल प्रबंधन का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्रीय किसानों के हितों की रक्षा करना और उन्हें सुलभ सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि पेराई सत्र के दौरान किसी भी स्तर पर मैनपावर की कमी या मशीनरी में खराबी की वजह से काम प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इसी वजह से समय से पहले ही सभी महत्वपूर्ण ठेकों की टेंडर प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है।
प्रबंध निदेशक के अनुसार, चीनी मिल में आने वाले गन्ने की आवक से लेकर उसकी शर्करा (शुगर कंटेंट) जांच और अंतिम चीनी उत्पादन प्रक्रिया तक हर चरण को डिजिटलाइज और व्यवस्थित बनाया जा रहा है। मिल परिसर में प्रयोगशाला का संचालन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी से गन्ने की रिकवरी और गुणवत्ता के मानक तय होते हैं। कुशल मैनपावर मिलने से जांच कार्य तीव्र गति से संपन्न होगा, जिससे किसानों को यार्ड में लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
blockquote>"पेराई सत्र के दौरान मिल परिसर में किसी भी तकनीकी, प्रबंधकीय या ढांचागत स्तर पर कमी न रहे, इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। किसानों का एक-एक दाना गन्ना समय पर और बिना किसी परेशानी के पेरा जाए, यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लैब, मैनपावर और मशीनरी मेंटेनेंस के काम समयसीमा के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे।" - नवदीप सिंह, प्रबंध निदेशक, पानीपत सहकारी चीनी मिलस्थानीय किसानों और आपूर्ति श्रृंखला पर सकारात्मक प्रभाव
पानीपत जिले के ग्रामीण अंचलों जैसे इसराना, मतलौडा, समालखा, सनौली और आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों किसान अपनी गन्ने की फसल की बिक्री के लिए इसी सहकारी मिल पर निर्भर हैं। पिछले सत्रों में कभी-कभी तकनीकी खराबी या यार्ड में अव्यवस्था के कारण गन्ने से भरी ट्रॉलियों की लंबी कतारें जीटी रोड व मिल के आसपास लग जाती थीं। इस बार एडवांस में मैनपावर और मशीनरी मरम्मत के टेंडर जारी होने से किसानों को समय पर टोकन मिलने और शीघ्र तुलाई की उम्मीद जगी है।
स्थानीय किसान संगठनों और गन्ना उत्पादकों ने भी मिल प्रशासन की इस अग्रिम तैयारी का स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि यदि केन यार्ड में प्रबंधन दुरुस्त रहता है और मशीनें बिना रुके चलती हैं, तो खेत से मिल तक गन्ने की ढुलाई का खर्च और समय दोनों बचते हैं। इसके अतिरिक्त, चीनी मिल में गन्ने की समय पर पेराई से किसान अगली गेहूं या अन्य रबी फसलों की बुआई भी समय पर कर सकेंगे, जिससे उनकी कुल कृषि उत्पादकता में सुधार होगा।
आगामी प्रशासनिक कदम और निरीक्षण योजना
निविदाएं खोलने के पश्चात चीनी मिल प्रबंधन द्वारा संबंधित एजेंसियों को कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) जारी कर तुरंत ग्राउंड पर काम शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद एमडी और तकनीकी विशेषज्ञों की एक संयुक्त समिति मिल के बॉयलर, टरबाइन, केन कैरियर और पेराई रोलर्स का भौतिक निरीक्षण करेगी। सत्र शुरू होने से ठीक पहले एक ट्रायल रन भी आयोजित किया जाएगा ताकि संपूर्ण प्रणाली का परीक्षण किया जा सके और किसी भी बची हुई खामी को समय रहते दूर किया जा सके।




