पानीपत जिले में आयोजित राज्यस्तरीय अंडर-11 स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता के शुरुआती दिन ही प्रबंधन की कमियां खुलकर सामने आ गईं। स्थानीय आर्य पीजी कॉलेज के खेल मैदान पर चल रहे इन मुकाबलों के दौरान दूर-दूर तक न तो कोई चिकित्सक नजर आया और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। प्रतियोगिता जैसे ही शुरू हुई, कुछ बच्चों को खेल के दौरान चोटें लग गईं, जिसके बाद मौके पर मौजूद खेल प्रशिक्षकों ने खुद ही आगे बढ़कर प्राथमिक उपचार किया। इस स्थिति ने खेल आयोजनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रबंधन की खामियां केवल चिकित्सा तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का भी भारी टोटा देखने को मिला। मैदान पर खिलाड़ियों और दर्शकों की प्यास बुझाने के लिए लगाए गए वाटर कूलर, टंकियां और पानी के कैंपर महज दो घंटे के भीतर ही खाली हो गए। भीषण गर्मी और खेल के दौरान पानी समाप्त होने के कारण छोटे-छोटे खिलाड़ियों को अपनी जेब से पैसे खर्च करके बाजार से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ीं। इसके अलावा, भोजन की व्यवस्था आर्य पीजी कॉलेज से करीब एक किलोमीटर दूर राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में की गई थी, जिसके कारण छोटे खिलाड़ियों और महिला शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लंबी दूरी और ठहरने की व्यवस्था को लेकर कोचों में असमंजस
खेल मैदान और भोजन स्थल के बीच की लंबी दूरी ने स्थिति को और अधिक पेचीदा बना दिया। छोटे बच्चों को जीटी रोड जैसी व्यस्त सड़क को पार करके भोजन के लिए दूर स्थित स्कूल तक ले जाना पड़ा, जिससे हर वक्त दुर्घटना की आशंका बनी रही। इसके साथ ही, विभिन्न जिलों से पहुंची टीमों के प्रबंधकों और कोचों के सामने ठहरने के ठिकानों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रही। कई जिलों के प्रतिनिधि अपने खिलाड़ियों के साथ शहर में भटकते नजर आए। फरीदाबाद से आए एक खेल कोच ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि यदि करनाल के एक अन्य साथी कोच से उन्हें सही समय पर भोजन और आवास की जानकारी न मिलती, तो उन्हें मजबूरन अपने खिलाड़ियों को महंगे होटलों में ठहराना पड़ता।
दूसरी ओर, इस पूरी व्यवस्था को लेकर सभी जिलों के विचार एक जैसे नहीं थे। कैथल और चरखी दादरी सहित कुछ अन्य जिलों के खेल शिक्षकों ने पानीपत जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना भी की। उनका मानना था कि अधिकांश खेल स्थल और ठहरने के ठिकाने एक-दूसरे के नजदीक ही स्थित थे, और कई टीमों के पास अपने निजी वाहन होने के कारण आवागमन सुगम रहा। इसके अलावा, खेल स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों के माध्यम से लगातार घोषणाएं करके भोजन और आवास संबंधी जरूरी निर्देश प्रसारित किए जा रहे थे, जिससे कुछ हद तक भ्रम की स्थिति दूर हुई।
| व्यवस्था का क्षेत्र | धरातल पर वास्तविक स्थिति | खिलाड़ियों और टीमों को हुई परेशानी |
|---|---|---|
| चिकित्सा सहायता | मैदान पर चिकित्सक और एंबुलेंस नदारद | खिलाड़ी चोटिल होने पर कोचों के भरोसे रहे |
| पेयजल प्रबंधन | दो घंटे में पानी खत्म, कैंपर खाली | खिलाड़ियों को अपने खर्च पर बोतलें खरीदनी पड़ीं |
| भोजन व्यवस्था | मैदान से 1 किमी दूर स्थित स्कूल में प्रबंध | जी.टी. रोड पार करके बच्चों को ले जाना पड़ा |
| आवास और ठहरना | कई टीमों को शुरुआती समय में सही जानकारी नहीं मिली | कोचों को ठिकाना तलाशने के लिए भटकना पड़ा |
प्रशासनिक पक्ष और अधिकारियों के दावे
इन तमाम व्यवस्थागत कमियों और आलोचनाओं के बीच शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपने स्तर पर सभी प्रबंधों को दुरुस्त और संतोषजनक बताया है। पानीपत के सहायक शिक्षा अधिकारी रविंद्र अंतिल ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि सभी भाग लेने वाली टीमों को खेल मैदान, ठहरने के स्थान और भोजन व्यवस्था की पूरी जानकारी प्रतियोगिता शुरू होने से काफी पहले ही भेज दी गई थी। उन्होंने बताया कि मैदान पर लगातार माइक के माध्यम से घोषणाएं भी की जा रही थीं ताकि किसी भी जिले के खिलाड़ी या शिक्षक को असमंजस की स्थिति का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का दावा है कि बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है और किसी भी प्रतिभागी को असुविधा नहीं होने दी गई।
हालांकि धरातल पर सामने आई तस्वीरें प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आई हैं। खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब राज्यस्तर पर इतने बड़े पैमाने पर बाल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, तो उसमें बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। खासकर चिकित्सा सेवाओं और पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। खेल जानकारों का मानना है कि यदि शुरुआती दिन की इन कमियों से सबक नहीं लिया गया, तो आगामी दिनों में व्यवस्थाएं और अधिक चरमरा सकती हैं, जिसका सीधा असर छोटे खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ेगा।
"प्रतियोगिता से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां टीमों को पहले ही साझा कर दी गई थीं और लाउडस्पीकर के माध्यम से भी लगातार निर्देश दिए जा रहे थे। किसी भी बच्चे को असुविधा का सामना नहीं करने दिया गया है।" - रविंद्र अंतिल, सहायक शिक्षा अधिकारी, पानीपत
खेल आयोजनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल
पानीपत में आयोजित इस राज्यस्तरीय प्रतियोगिता के पहले दिन की व्यवस्थाओं ने जिला स्तर पर होने वाले खेल आयोजनों के खोखले दावों को उजागर कर दिया है। जब अंडर-11 जैसे कम उम्र के बच्चे मैदान पर पसीना बहा रहे हों, तब वहां एंबुलेंस और डॉक्टर का मौजूद न होना सीधे तौर पर बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ माना जा सकता है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की चूक दोबारा न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को एक मजबूत और पारदर्शी एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार करनी चाहिए। मैदान पर आपातकालीन चिकित्सा किट और डॉक्टर की स्थायी तैनाती को अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से तुरंत निपटा जा सके।
स्थानीय अभिभावकों और खेल प्रेमियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि भोजन और ठहरने के स्थलों के चयन में बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी जाए। व्यस्त सड़कों के पास स्थित भोजन स्थलों के कारण बच्चों की जान जोखिम में डालना कतई उचित नहीं है। प्रतियोगिता के आगामी दिनों में यदि प्रशासनिक अमले ने इन गंभीर कमियों में सुधार नहीं किया, तो मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। 'पानीपत लाइव' की ग्राउंड टीम इस पूरे आयोजन की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और पल-पल की अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाती रहेगी।




