पानीपत जिले के सनौली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण आंचल में पारंपरिक खेलों के प्रति युवाओं का उत्साह एक बार फिर सिर चढ़कर बोला। गांव अधमी में स्थित ऐतिहासिक मां शाकंभरी देवी मंदिर के प्रांगण में आयोजित वार्षिक मेले के अवसर पर एक भव्य इनामी दंगल का आयोजन किया गया। दोपहर के सत्र में शुरू हुए इस खेल आयोजन में आसपास के जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचे नामी और प्रतिभावान पहलवानों ने शिरकत की। अखाड़े की मिट्टी पर उतरकर पहलवानों ने अपने दांव-पेच और शारीरिक कौशल का ऐसा प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। इस खेल आयोजन में लगभग एक लाख रुपये की कुल इनामी राशि बांटी गई, जिसे जीतने के लिए अखाड़े में घंटों तक कड़ा मुकाबला चलता रहा।
इस दंगल का मुख्य आकर्षण और केंद्र बिंदु मनदीप जलमाना और कमल सोनीपत के बीच हुआ कड़ा मुकाबला रहा। दोनों ही पहलवानों ने एक-दूसरे को मात देने के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ तकनीकी कौशल का परिचय दिया, लेकिन अंततः मनदीप जलमाना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कमल सोनीपत को पराजित कर 11 हजार रुपये का प्रतिष्ठित दंगल अपने नाम कर लिया। इसके अलावा, आयोजन की दूसरी सबसे बड़ी और आकर्षक कुश्ती 21 हजार रुपये के इनाम के लिए अतुल रिसालू और साहिल बांध के बीच हुई। इन दोनों के बीच हुए मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिली और अंत तक कोई भी पहलवान हार मानने को तैयार नहीं था, जिसके बाद यह मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। अन्य मुकाबलों में कैराना (यूपी) के नसीम पहलवान ने रोहतक के दिनेश को मात देकर 5,100 रुपये का नकद पुरस्कार जीता, जबकि दीपक जलमाना, राजा मुजफ्फरनगर, समीर गोयला खेड़ा और रितिक बापौली सहित दर्जनों अन्य पहलवानों ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर नकद इनाम हासिल किए।
ग्रामीण संस्कृति का प्रतीक और पारंपरिक खेलों का संरक्षण
दंगल जैसे पारंपरिक खेल हमारी सदियों पुरानी संस्कृति और लोक परंपराओं का एक अनिवार्य हिस्सा रहे हैं। आधुनिक दौर में जहां युवा वर्ग आधुनिक वीडियो गेम्स और डिजिटल स्क्रीन की तरफ आकर्षित हो रहा है, वहीं इस तरह के आयोजनों का होना ग्रामीण अंचल में खेल संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का काम करता है। आयोजकों और स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि पारंपरिक कुश्ती केवल शारीरिक बल का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, धैर्य और संयम सीखने का एक बेहतरीन माध्यम है। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल क्षेत्रीय मेलजोल बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी मिलती है। पारंपरिक अखाड़ों की महत्ता को बनाए रखने के लिए इस प्रकार के दंगल अब मेलों के दौरान एक अनिवार्य परंपरा का रूप ले चुके हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में खेलप्रेमी पहुंचते हैं।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति और युवाओं को प्रेरणा
इस भव्य खेल आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग बतौर अतिथि शामिल हुए। कैराना आश्रम के महंत योगी गौतमनाथ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर समाजसेवी एवं यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट रत्तन सिंह रावल, समाजसेवी राजू उर्फ राजपाल रावल और सरपंच दलबीर रंगा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी अतिथियों ने अखाड़े में उतरने वाले विजेता और उपविजेता सभी पहलवानों को अपनी प्रेरणादायक उपस्थिति से सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान रेफरी की भूमिका ओमपाल ने बेहद निष्पक्षता और कुशलता के साथ निभाई, जिससे सभी मुकाबले शांतिपूर्ण और नियमानुसार संपन्न हुए।
| मुकाबला / वर्ग | विजेता पहलवान | उपविजेता / प्रतिद्वंद्वी | इनाम राशि |
|---|---|---|---|
| मुख्य मुकाबला | मनदीप जलमाना | कमल सोनीपत | ₹ 11,000 |
| दूसरी बड़ी कुश्ती | अतुल रिसालू (बराबरी) | साहिल बांध (बराबरी) | ₹ 21,000 |
| विशेष मुकाबला | नसीम (कैराना, यूपी) | दिनेश (रोहतक) | ₹ 5,100 |
खेलों के माध्यम से आपसी भाईचारा और सामाजिक संदेश
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने अपने संबोधन में युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का कड़ा संदेश दिया। मुख्य अतिथि महंत योगी गौतमनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि दंगल गांवों की पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय खेल शैली है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण बिना किसी आमंत्रण के खींचे चले आते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि खेलों को हमेशा सच्ची खेल भावना के साथ खेला जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारा मजबूत होता है। विशिष्ट अतिथि एडवोकेट रत्तन सिंह रावल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह कुश्ती संस्कृति हमारी करीब पांच सौ साल पुरानी प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य हिस्सा है। इसे जीवित और संरक्षित रखने के लिए क्षेत्र में वर्ष में दो बार इस तरह के दंगल आयोजित किए जाते हैं ताकि युवा पीढ़ी शारीरिक फिटनेस की तरफ आकर्षित हो सके।
"दंगल हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा है। युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर खेलकूद में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए और कड़ी मेहनत से अपना लक्ष्य तय करना चाहिए तभी वे राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं।" - राजू रावल, समाजसेवी
समाजसेवी राजू रावल ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को नशे जैसी खतरनाक और लाइलाज सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह तौबा कर लेनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और खेलकूद प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। जब युवा कड़ी मेहनत, अनुशासन और पक्के इरादे के साथ अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तभी वे राष्ट्र के प्रति अपने सच्चे कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वास्तविक सफलता हासिल कर पाते हैं। इस सफल आयोजन के दौरान ओमपाल, सद्दाम, वाजिद, महिपाल, जयकिशन, रामधन, रमेश, राजेंद्र, नवीन, सुनील और रोहतास सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और खेल प्रेमी मौजूद रहे, जिन्होंने व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में अपना पूरा योगदान दिया।
ग्रामीण अंचल में खेल आयोजनों का भविष्य और प्रशासनिक अपेक्षाएं
सनौली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के दंगल और पारंपरिक खेल मेलों का आयोजन युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत साबित हो रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण स्तर पर इस प्रकार की खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा मिलता रहे, तो देश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खिलाड़ी मिल सकते हैं। हालांकि, इन आयोजनों के सफल संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और खेल के मैदानों के रख-रखाव की भी आवश्यकता होती है ताकि खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को और अधिक निखार सकें। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण भारत की रग-रग में पारंपरिक खेल रमे हुए हैं और जब भी इस तरह के मंच सजते हैं, तो पूरा ग्रामीण समाज एकजुट होकर खेलों के प्रति अपने प्रेम का इजहार करता है।


