पानीपत के प्रतिष्ठित आर्य पीजी कॉलेज में भारतीय संस्कृति और पर्वों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन किया गया। आगामी करवाचौथ के पावन पर्व के उपलक्ष्य में कॉलेज की कॉमर्स एसोसिएशन की तरफ से परिसर में भव्य मेहंदी रचाओ प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस रचनात्मक कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं ने पूरे उत्साह और बढ़-चढ़कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। विभिन्न कक्षाओं की छात्राओं द्वारा हाथों पर उकेरी गई पारंपरिक और आधुनिक मेहंदी की कलाकृतियां हर किसी का मन मोह रही थीं। प्रतियोगिता के दौरान पूरे कॉलेज परिसर में एक फेस्टिव माहौल नजर आया, जहां विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया।
प्रतिस्पर्धा के कड़े दौर में विभिन्न संकायों की छात्राओं ने अपनी बेहतरीन प्रतिभा का परिचय दिया, जिसका मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष निर्णायक मंडल का गठन किया गया था। कड़े मुकाबले के बाद परिणाम घोषित किए गए जिसमें बीए प्रथम वर्ष की मेधावी छात्रा प्राची ने अपनी उत्कृष्ट कला के दम पर पहला स्थान अपने नाम किया। वहीं, बीकॉम ऑनर्स चतुर्थ वर्ष की छात्रा खुशी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया और बीकॉम प्रथम वर्ष की हर्षिता ने तीसरा स्थान हासिल करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अतिरिक्त, बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा मीनाक्षी को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया। सभी विजेताओं के चेहरों पर जीत की खुशी साफ झलक रही थी।
प्रतिभाशाली छात्राओं की कला और निर्णायकों की भूमिका
इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के भीतर छिपी हुई कलात्मक प्रतिभा को बाहर निकालने का एक बेहतरीन माध्यम होती हैं। आर्य पीजी कॉलेज में आयोजित इस मेहंदी उत्सव में छात्राओं ने एक से बढ़कर एक बेहतरीन डिजाइन तैयार किए, जिनमें राजस्थानी, अरेबिक और पारंपरिक भारतीय शैलियों का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। निर्णायकों के लिए विजेता का चयन करना बेहद कठिन कार्य था, क्योंकि हर प्रतिभागी ने अपनी कला में पूरी मेहनत और बारीकी दिखाई थी।
इस संपूर्ण प्रतियोगिता की निष्पक्षता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कॉलेज की प्रतिष्ठित फैकल्टी सदस्यों को निर्णायक मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निर्णायक मंडल में उपप्राचार्या डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. गीतांजलि धवन और डॉ. मधु गाबा जैसी वरिष्ठ शिक्षाविद् शामिल रहीं। उन्होंने बड़ी बारीकी से छात्राओं द्वारा रची गई मेहंदी के डिजाइनों, सफाई, नक्काशी और पारंपरिक टच का मूल्यांकन किया और उसके आधार पर ही सर्वश्रेष्ठ प्रतियोगियों का चयन किया।
| क्रम संख्या | विजेता का नाम | कक्षा व संकाय | स्थान / पुरस्कार |
|---|---|---|---|
| 1 | प्राची | बीए प्रथम वर्ष | प्रथम स्थान |
| 2 | खुशी | बीकॉम ऑनर्स चतुर्थ वर्ष | द्वितीय स्थान |
| 3 | हर्षिता | बीकॉम प्रथम वर्ष | तृतीय स्थान |
| 4 | मीनाक्षी | बीकॉम द्वितीय वर्ष | सांत्वना पुरस्कार |
प्रशासनिक प्रोत्साहन और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार
कार्यक्रम के समापन समारोह में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता और उपप्राचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और सभी विजेता छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ इस तरह की सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारे प्राचीन त्योहारों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से युवा पीढ़ी को जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि किताबी ज्ञान के अलावा इस प्रकार की सह-शैक्षणिक गतिविधियां छात्राओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य करती हैं। कॉलेज प्रबंधन और कॉमर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने इस सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान कॉलेज के अन्य शिक्षकगण और भारी संख्या में विद्यार्थी भी मौजूद रहे, जिन्होंने तालियां बजाकर सभी विजेता छात्राओं का हौसला बढ़ाया।
"शिक्षा का असली उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मकता को बाहर लाना है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी पारंपरिक संस्कृति को जीवित रखने के साथ-साथ युवाओं में आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं।" - डॉ. जगदीश गुप्ता, प्राचार्य, आर्य पीजी कॉलेज
पानीपत के शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती सांस्कृतिक गतिविधियां
पानीपत जिले के शैक्षणिक संस्थानों में इन दिनों पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों की धूम देखने को मिल रही है। आर्य पीजी कॉलेज का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आज के युवा अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और आधुनिकता के साथ परंपराओं का निर्वहन करना बखूबी जानते हैं। त्योहारों के मौसम से ठीक पहले इस तरह की प्रतियोगिताओं के आयोजन से विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वे पढ़ाई के तनाव से दूर रचनात्मकता की ओर अग्रसर होते हैं।
आने वाले दिनों में भी कॉलेज प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों के कौशल विकास और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के कई अन्य आयोजनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस प्रकार की गतिविधियों से न केवल कॉलेज का शैक्षणिक माहौल जीवंत रहता है, बल्कि छात्राओं को अपनी कला को एक बड़ा मंच मिलने का अवसर भी प्राप्त होता है, जो उनके भविष्य के लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होता है।




