हरियाणा में सड़क ढांचे को मजबूत करने और यातायात को सुगम बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य के प्रमुख शहरों में कंजेशन कम करने और भारी वाहनों को शहर के बाहर से ही निकालने के लिए रिंग रोड व बाईपास नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में भिवानी जिले में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से आकार ले रहे महत्वपूर्ण फोरलेन बाईपास प्रोजेक्ट की अवार्ड प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस विकास योजना के तहत अब प्रभावित भूस्वामियों और किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
रिंग रोड कनेक्टिविटी के इस वृहद अभियान के तहत हांसी रोड से लोहारू रोड के बीच के 11 किलोमीटर लंबे अंतिम और शेष हिस्से के लिए भूमि चिह्नीकरण का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया जा चुका है। इस मार्ग को राजस्व विभाग की तरफ से भी आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इस महत्वकांक्षी परियोजना को हरी झंडी मिलने के बाद एनएचएआई ने टेंडर प्रक्रिया को तीव्र गति दे दी है। प्रशासनिक सूत्रों और विभागीय तैयारियों के अनुसार, आगामी कुछ हफ्तों में गजट नोटिफिकेशन की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सीधे किसानों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिसके तुरंत बाद जमीनी स्तर पर निर्माण मशीनरी उतर जाएगी।
विस्तृत परियोजना और बाईपास का रणनीतिक ढांचा
इस बहुप्रतीक्षित फोरलेन प्रोजेक्ट के अंतर्गत शहर के विभिन्न हिस्सों में नए बाईपास बनाए जाने हैं, जिनमें लोहानी बाईपास (2.7 किलोमीटर), जुई बाईपास (5.5 किलोमीटर) और लोहारू बाईपास (10.8 किलोमीटर) का निर्माण शामिल है। वर्ष 2025 के दौरान ही इन सभी खंडों की अलाइनमेंट और केंद्र सरकार से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी थी। एनएचएआई और जिला राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने भूमि अधिग्रहण के लिए डेटा तैयार कर ड्राफ्ट संबंधित विभागों को सौंप दिया है। इन तीनों बाईपासों के पूर्ण होने के बाद भिवानी से लोहारू तक लगभग 62 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन मानक के अनुरूप उन्नत किया जाएगा, जो आगे चलकर दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709ई और राष्ट्रीय राजमार्ग 709 एक्सटेंशन के साथ जुड़ेगी।
| परियोजना का विवरण | निर्धारित आंकड़े व तथ्य |
|---|---|
| कुल प्रोजेक्ट लागत | लगभग 800 करोड़ रुपये |
| शेष निर्माणाधीन हिस्सा | हांसी रोड से लोहारू रोड (11 किलोमीटर) |
| रिंग रोड की कुल लंबाई | 41 किलोमीटर (फोरलेन) |
| मुख्य बाईपास खंड | लोहानी (2.7 किमी), जुई (5.5 किमी), लोहारू (10.8 किमी) |
| प्रमुख मार्ग कनेक्शन | एनएच-709 एक्सटेंशन और पिलानी-राजगढ़ रूट |
अधिकारियों की देखरेख और प्रशासनिक मुस्तैदी
परियोजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को दूर करते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाया गया है। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुआवजा वितरण की फाइलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है, ताकि किसी भी स्तर पर विलंब न हो। राजस्व विभाग और एनएचएआई के समन्वय से किसानों के दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से किया जा रहा है ताकि तय समयसीमा के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
"भिवानी बाईपास प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण और अवार्ड प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राजस्व विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद अब जल्द ही संबंधित किसानों के बैंक खातों में मुआवजा राशि का प्रत्यक्ष हस्तांतरण शुरू कर दिया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य में अभूतपूर्व तेजी आएगी।" - हिमेंद्रा सिंह, परियोजना निदेशक (पीडी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
यातायात सुगमता और स्थानीय जनजीवन पर प्रभाव
इस फोरलेन बाईपास के निर्माण से न केवल क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि स्थानीय नागरिकों और सुदूर क्षेत्रों से आने वाले राहगीरों को भी भारी राहत मिलेगी। राजस्थान, गुजरात, दिल्ली के साथ-साथ हिसार, जींद और रोहतक की ओर आने-जाने वाले भारी वाहन चालकों को अब शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। हांसी रोड से लोहारू रोड के बीच रिंग रोड के जुड़ने से दोनों रूटों के कमर्शियल वाहन सीधे बाईपास के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे सफर के दौरान करीब 45 मिनट के समय की बचत होगी और वाहन चालकों को 41 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटने के बजाय मात्र 11 किलोमीटर के सफर में ही वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। इसके अलावा, हाईवे के दायरे में आने वाली जमीनों के कमर्शियल मूल्य में बढ़ोतरी से स्थानीय किसानों और भूस्वामियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की प्रबल संभावना है।




