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हरियाणा के गेस्ट टीचर्स नहीं होंगे पक्के: शिक्षा विभाग ने खारिज किया दावा, जारी हुए स्पीकिंग ऑर्डर

हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के लगभग 12 हजार अतिथि अध्यापकों की सेवाएं नियमित करने के दावे को कानूनी पेचीदगियों के कारण निरस्त कर दिया है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
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28 अक्टूबर 2026 को 08:26 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा के गेस्ट टीचर्स नहीं होंगे पक्के: शिक्षा विभाग ने खारिज किया दावा, जारी हुए स्पीकिंग ऑर्डर
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा शिक्षा विभाग ने 12 हजार गेस्ट टीचर्स को पक्का करने का दावा खारिज कर दिया है।
  • •पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत विभाग द्वारा विस्तृत स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए गए हैं।
  • •वर्ष 2005 में हुई नियुक्तियों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया व आरक्षण मानकों की अनदेखी को मुख्य आधार बनाया गया।
  • •नियमित भर्ती प्रक्रिया के बिना रखे गए अध्यापकों पर 2014 की नियमितीकरण नीतियां लागू नहीं होंगी।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बीते दो दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे लगभग 12 हजार अतिथि अध्यापकों (गेस्ट टीचर्स) को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा झटका लगा है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी पेचीदगियों और प्राथमिक नियुक्ति प्रक्रिया की खामियों का हवाला देते हुए गेस्ट टीचर्स की सेवाएं नियमित करने के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। त्योहारों के इस सीजन में आए इस फैसले से वर्षों से पक्का होने की आस लगाए बैठे हजारों शिक्षकों में मायूसी छा गई है।

शिक्षा विभाग की ओर से इस संदर्भ में औपचारिक स्पीकिंग ऑर्डर (विस्तृत लिखित आदेश) जारी कर दिए गए हैं। इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि गेस्ट टीचर्स की शुरुआती भर्ती नियमित सेवा नियमों के अनुरूप नहीं हुई थी, इसलिए उन्हें पक्का किया जाना संवैधानिक और कानूनी दृष्टिकोण से संभव नहीं है। अदालत से मिले दिशानिर्देशों के बाद विभाग ने तथ्यों की समीक्षा कर यह अंतिम निर्णय लिया है।

मामले का कानूनी घटनाक्रम और उच्च न्यायालय का निर्देश

गेस्ट टीचर्स को नियमित करने का मुद्दा पिछले कई वर्षों से न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था। शिक्षकों का तर्क था कि वे लंबे समय से नियमित अध्यापकों की भांति पूर्णकालिक शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, अतः 2014 की नियमितीकरण नीतियों के तहत उन्हें स्थाई किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसी वर्ष 6 अगस्त को स्पष्ट व्यवस्था दी थी।

अदालत ने निर्देश दिया था कि राज्य सरकार उपलब्ध रिकॉर्ड, भर्ती के आधार और स्थापित कानूनी सिद्धांतों का पुनर्मूल्यांकन करे। यदि सरकार गेस्ट टीचर्स की सेवाएं नियमित करने में सक्षम नहीं है, तो उसे कारण बताते हुए एक स्पष्ट स्पीकिंग आर्डर जारी करने की स्वतंत्रता दी गई थी। इसी न्यायिक छूट का पालन करते हुए शिक्षा विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट और दलीलों के साथ पक्का न करने का आदेश जारी किया है।

मुख्य पहलूप्रशासनिक स्थिति एवं विवरण
प्रभावित शिक्षक श्रेणीहरियाणा के लगभग 12,000 गेस्ट टीचर्स
प्रारंभिक नियुक्ति का वर्षवर्ष 2005 (पीरियड-वार / मानदेय आधार)
विभाग का अंतिम फैसलानियमितीकरण की मांग पूर्णतः निरस्त
निर्णय का स्वरूपशिक्षा विभाग द्वारा जारी स्पीकिंग ऑर्डर
अस्वीकृति का प्रमुख कारणनियमित भर्ती मानकों, मेरिट व आरक्षण का अभाव

भर्ती प्रक्रिया की खामियां बनी पक्का होने में सबसे बड़ी रुकावट

शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्पीकिंग ऑर्डर में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2005 के दौरान इन शिक्षकों का चयन किस प्रकार हुआ था। उस समय प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की भारी कमी को देखते हुए तात्कालिक व्यवस्था के तहत स्थानीय स्तर पर प्राचार्य, मुख्याध्यापक और संबंधित अधिकारियों को जरूरत के हिसाब से शिक्षकों को प्रति पीरियड के आधार पर रखने का अधिकार दिया गया था।

विभाग ने अपनी दलील में स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था किसी भी तरह से स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती का हिस्सा नहीं थी। नियुक्ति के दौरान न तो कोई प्रतिस्पर्धात्मक चयन परीक्षा आयोजित की गई, ना ही राज्य स्तरीय मेरिट सूची तैयार हुई और ना ही इसमें संवैधानिक आरक्षण नियमों का पालन किया गया। ऐसे में बिना पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के नियुक्त कर्मचारियों को नियमित कैडर का हिस्सा बनाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन माना गया है।

blockquote>'अतिथि अध्यापकों की प्रारंभिक नियुक्ति केवल विद्यालयों में पठन-पाठन सुचारू रखने हेतु तात्कालिक व्यवस्था के तहत हुई थी। चूंकि इसमें नियमित भर्ती के अनिवार्य मानकों का पालन नहीं हुआ था, इसलिए इन्हें 2014 की नियमितीकरण नीतियों का लाभ देना कानूनी रूप से संभव नहीं है।' - स्कूल शिक्षा विभाग, हरियाणा

शिक्षकों के भविष्य और शिक्षा तंत्र पर फैसले का प्रभाव

इस फैसले के बाद पिछले 21 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने अनिश्चितता का माहौल बन गया है। कई शिक्षक अपनी आयु सीमा पार कर चुके हैं और वे केवल इस उम्मीद में टिके थे कि सरकार कभी न कभी उन्हें नियमित कर्मचारियों का दर्जा अवश्य देगी। हालांकि, राज्य सरकार ने पहले ही हरियाणा अतिथि अध्यापक सेवा सुरक्षित अधिनियम के जरिए इनकी नौकरी को 58 वर्ष की आयु तक के लिए सेवा सुरक्षा प्रदान कर रखी है, लेकिन वे नियमित वेतनमान और अन्य भत्तों से वंचित ही रहेंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से हरियाणा के प्रशासनिक तंत्र में यह संदेश स्पष्ट गया है कि तदर्थ या संविदात्मक आधार पर हुई नियुक्तियों को सीधे तौर पर पक्का करना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। वहीं दूसरी ओर, शिक्षक संघों का कहना है कि दो दशकों तक सेवाएं लेने के बाद प्रक्रियात्मक कमियों का हवाला देकर पक्का न करना शिक्षकों के प्रति अन्याय है।

भावी कदम और संभावित कानूनी विकल्प

शिक्षा विभाग द्वारा स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए जाने के बाद अब गेंद एक बार फिर शिक्षक संगठनों के पाले में है। यद्यपि विभाग ने अपनी ओर से पक्का करने का अध्याय बंद कर दिया है, परंतु संभावना जताई जा रही है कि गेस्ट टीचर एसोसिएशन इस प्रशासनिक आदेश को पुनः उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है। फिलहाल, प्रदेश सरकार का ध्यान नियमित कैडर में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के माध्यम से पारदर्शी स्थायी भर्तियां करने पर केंद्रित है।

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