हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में बीते लंबे समय से अपनी निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे हजारों अतिथि अध्यापकों (गेस्ट टीचर्स) के स्थायीकरण की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। राजधानी चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश कुमार खुल्लर के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कोई सकारात्मक सहमति नहीं बन सकी। महज आधा घंटा चली इस बातचीत के बेनतीजा खत्म होने के बाद प्रदेशभर के गेस्ट टीचर्स में भारी निराशा और आक्रोश की लहर है। प्रशासनिक स्तर पर वार्ता विफल रहने के पश्चात अब गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने राज्यव्यापी आंदोलन को पुनः धार देने की व्यापक रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
राज्य के शिक्षा ढांचे में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले इन शिक्षकों का तर्क है कि वे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से अपने हक में फैसला प्राप्त कर चुके हैं। इसके बावजूद राज्य प्रशासन द्वारा उन्हें पक्का करने के बजाय खारिज करने वाले 'स्पीकिंग ऑर्डर' थमाए जा रहे हैं। सोमवार, 2 नवंबर को संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक पर प्रदेश के कोने-कोने से जुड़े 10 हजार से अधिक अतिथि अध्यापकों की निगाहें टिकी थीं, लेकिन समाधान न निकलने से सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच का टकराव अब और ज्यादा बढ़ने के आसार बन गए हैं।
हरियाणा में अतिथि अध्यापकों की नियमितीकरण वार्ता बेनतीजा: सिलसिलेवार विवरण
अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण का मुद्दा हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में वर्षों से संवेदनशील बना हुआ है। संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 2014 की तीन साल वाली नीति के आधार पर पात्र गेस्ट टीचर्स को स्थायी सेवा का लाभ दिया जाना चाहिए। हालांकि, शासन स्तर पर खुल्लर के साथ हुई आधा घंटे की चर्चा में प्रशासनिक अधिकारियों ने पूर्व में जारी स्पीकिंग ऑर्डर का हवाला देते हुए तुरंत पक्का करने में असमर्थता जताई, जिससे बातचीत गतिरोध के साथ समाप्त हो गई।
शिक्षकों का कहना है कि जब उच्च न्यायालय से विधिक राहत मिलने के बावजूद विभागीय स्तर पर ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है, तो उनके पास लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। 26 अक्टूबर को गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के आश्वासन के बाद 2 नवंबर की यह बैठक तय हुई थी, जिसके चलते अध्यापकों ने अपनी प्रस्तावित 'न्याय यात्रा' को अस्थायी तौर पर स्थगित किया था। परंतु वार्ता विफल होने से शिक्षकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है।
| प्रमुख बिंदु / आंकड़े | विस्तृत विवरण |
|---|---|
| कुल प्रभावित गेस्ट टीचर्स | 10,757 (मौलिक शिक्षा निदेशालय के अनुसार) |
| दिवंगत शिक्षकों की संख्या | 400 से अधिक (सेवा के दौरान निधन) |
| 2029 तक संभावित सेवानिवृत्ति | 50% से अधिक शिक्षक रिटायर्ड हो जाएंगे |
| 2031 तक संभाविता | लगभग 90% शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे |
| मुख्य मांग | 2014 नीति व अदालती फैसले के तहत नियमितीकरण |
अन्य विभागों और कॉलेज लेक्चरर की तर्ज पर पक्का करने की उठ रही मांग
गेस्ट टीचर्स यूनियन ने प्रशासनिक दोहरे रवैये पर कड़ा एतराज व्यक्त करते हुए आंकड़ों के साथ अपनी मांग रखी है। शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 की नीति के अंतर्गत हरट्रॉन के माध्यम से नियुक्त 58 कर्मचारियों को पक्का किया है। इसी तरह, उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत सरकारी कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट लेक्चररों और विज्ञापनों के जरिए पारदर्शी प्रक्रिया से आए शिक्षकों को भी नियमित सेवा का लाभ प्रदान किया जा चुका है। ऐसे में केवल स्कूल शिक्षा विभाग के अतिथि अध्यापकों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
शिक्षक नेताओं के मुताबिक, पूर्व में कॉलेज लेक्चरर और स्कूल गेस्ट टीचर्स दोनों के लिए अलग-अलग उच्चस्तरीय कमेटियों का गठन हुआ था। कॉलेज कमेटी की सिफारिशों के आधार पर वहां के गेस्ट लेक्चररों के नियमितीकरण का मार्ग प्रशस्त हो गया, जबकि स्कूली शिक्षकों के मामले में विभागीय उदासीनता के कारण रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यही कारण है कि आज हजारों योग्य और अनुभवी अध्यापक अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
blockquote>"हम बीते डेढ़ दशक से अधिक समय से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ग्रामीण व शहरी बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। जब अन्य विभागों के संविदा कर्मचारियों और कॉलेजों के गेस्ट लेक्चररों को नियमित किया जा सकता है, तो 10,000 से अधिक गेस्ट टीचर्स को उनके न्यायसंगत अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है? यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो संयुक्त संघर्ष मोर्चा पूरे हरियाणा में बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।" - गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चासरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के भविष्य पर गहराता संकट
मौलिक शिक्षा विभाग (DSE) से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए यूनियन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में 10,757 गेस्ट टीचर्स अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 400 से ज्यादा शिक्षक ऐसे हैं, जो अपनी पूरी जवानी शिक्षा विभाग को सौंपने के बाद नियमितीकरण की उम्मीद दिल में लिए इस दुनिया से रुखसत हो गए। उनके परिवारों को भी कोई सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल सका, जो अत्यंत पीड़ादायक स्थिति को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, अध्यापकों की आयु सीमा को लेकर भी गंभीर संकट खड़ा हो चुका है। विभागीय सांख्यिकी के अनुसार, वर्ष 2029 तक प्रदेश के लगभग 50 प्रतिशत से अधिक गेस्ट टीचर्स अपनी 60 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। वहीं, वर्ष 2031 तक यह आंकड़ा 90 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा। यदि राज्य सरकार नीतिगत निर्णय लेने में इसी तरह बिलंब करती रही, तो बहुसंख्यक शिक्षक बिना किसी पेंशन या स्थायी सेवा लाभ के ही सेवानिवृत्त होने को मजबूर हो जाएंगे।
भावी रणनीति और प्रशासनिक रुख: न्याय यात्रा और आंदोलन का अगला चरण
चंडीगढ़ में वार्ता विफल होने के बाद गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा की कोर कमेटी ने आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के प्रतिनिधियों को शामिल कर अगले आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। शिक्षकों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक सरकार 2014 की नीति और अदालती दिशा-निर्देशों के अनुरूप पक्का करने की अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष विराम नहीं लेगा।
स्थानीय स्तर पर पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, रोहतक, हिसार और अंबाला समेत राज्य के सभी जिलों में शिक्षक संघ की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पूर्व में स्थगित की गई 'न्याय यात्रा' को पुनः नए कलेवर और विशाल जनसमर्थन के साथ चंडीगढ़ की ओर कूच कराने की तैयारी की जा रही है। अब गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पाले में है कि वे इस संवेदनशील मानवीय व प्रशासनिक समस्या का समाधान वार्ता से निकालते हैं या प्रदेश को एक नए शिक्षक आंदोलन की ओर धकेलते हैं।




