हरियाणा प्रदेश में सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने की दिशा में खाप पंचायतों ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। आधुनिक समय में बदलती जीवनशैली और लिव-इन रिलेशनशिप जैसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से रोहतक जिले के इस्माईला गांव स्थित एक सरकारी विद्यालय परिसर में रविवार को तमाम प्रमुख खापों की महापंचायत बुलाई गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता गांव के प्रबुद्ध बुजुर्ग ओमप्रकाश ने की, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए खाप प्रतिनिधियों और सामाजिक गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। पंचायत के दौरान मुख्य रूप से पारिवारिक मूल्यों के क्षरण, युवा पीढ़ी के भटकते रुझान और विवाह से जुड़े पारंपरिक संस्कारों को बचाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु आधुनिकता के दौर में तेजी से बढ़ रहे लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों पर रोक लगाना और विवाह प्रणाली में अभिभावकों की गरिमा को सुरक्षित करना रहा। प्रतिनिधियों का एक स्वर में कहना था कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का जुड़ाव होता है। ऐसे में युवक-युवतियों द्वारा पारिवारिक सहमति को दरकिनार कर अपनी इच्छा से उठाए जाने वाले कदमों से सामाजिक ताने-बाने को गहरा आघात पहुंच रहा है। पंचायत में स्पष्ट किया गया कि व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए यह आवश्यक है कि विवाह जैसे पवित्र बंधन में प्रवेश करने से पूर्व माता-पिता और परिवार की स्पष्ट रजामंदी को कानूनी और सामाजिक रूप से अनिवार्य बनाया जाए ताकि भविष्य में पारिवारिक विघटन जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
कानूनी संशोधन और उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर नए नियमों की मांग
चर्चा के दौरान खाप प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि वे लंबे समय से मौजूदा सामाजिक कानूनों में जरूरी संशोधन करने या उन्हें अधिक व्यावहारिक बनाने की मांग सरकार के समक्ष रख रहे हैं। इस सिलसिले में इससे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी प्रतिनिधिमंडल मिलकर अपनी बात रख चुका है। पंचायत में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में इस दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की गई। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि हरियाणा सरकार भी पड़ोसी राज्य की तर्ज पर समाजहित में ठोस कदम उठाएगी और विवाह संबंधी कानूनों में ऐसे प्रावधान जोड़ेगी जिससे पारिवारिक मर्यादा और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
बढ़ती सामाजिक कुरीतियों जैसे नशाखोरी और विवाह समारोहों में होने वाली बेहिसाब फिजूलखर्ची पर भी पंचायत में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों ने माना कि युवा वर्ग तेजी से नशे की गिरफ्त में जा रहा है, जो पूरे समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसके अलावा, शादियों के दौरान रात्रि के समय होने वाले बड़े आयोजनों और अनावश्यक प्रदर्शन पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया। दिन के समय विवाह समारोह संपन्न कराने की परंपरा को दोबारा अपनाने पर जोर दिया गया ताकि आर्थिक बोझ से बचा जा सके और पारंपरिक सादगी को बढ़ावा मिल सके।
| खाप पंचायत बैठक के प्रमुख बिंदु | विवरण एवं उद्देश्य |
|---|---|
| स्थान एवं अध्यक्षता | रोहतक का इस्माईला गांव, अध्यक्षता बुजुर्ग ओमप्रकाश द्वारा। |
| प्रमुख प्रस्ताव | लिव-इन रिलेशनशिप पर गहरी आपत्ति और विरोध। |
| मुख्य मांग | प्रेम विवाह में माता-पिता की सहमति और परिवार की भागीदारी अनिवार्य हो। |
| अन्य सामाजिक मुद्दे | युवाओं में बढ़ता नशा और विवाह समारोहों की फिजूलखर्ची पर रोक। |
सामूहिक जिम्मेदारी और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का आह्वान
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल कानून या प्रशासनिक पाबंदियों से समाज में सुधार लाना संभव नहीं है। इसके लिए परिवार और समाज दोनों को मिलकर सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी। आज की युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन देना माता-पिता और बुजुर्गों का कर्तव्य है ताकि वे अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहें। खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज में बढ़ती असहजता को दूर करने के लिए पारंपरिक पंचायतों की भूमिका हमेशा से सकारात्मक रही है और आगे भी वे युवाओं को सही मार्ग दिखाने के लिए ऐसे सामाजिक जागरूकता अभियान जारी रखेंगी।
पंचायत के अंत में यह निर्णय लिया गया कि इन सभी प्रस्तावों और मांगों का एक औपचारिक ज्ञापन जल्द ही राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा जाएगा। खाप प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए समाज हित में आवश्यक नीतिगत और कानूनी बदलाव करने पर गंभीरता से विचार करेगी, जिससे हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर और पारिवारिक मर्यादाओं को संबल मिल सके।
"विवाह कोई व्यक्तिगत निर्णय मात्र नहीं है, बल्कि इसमें पूरे परिवार की प्रतिष्ठा और जुड़ाव होता है। आधुनिकता की दौड़ में हम अपने संस्कारों को नहीं भूल सकते, इसलिए प्रेम विवाह में माता-पिता की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए और लिव-इन जैसी प्रथाओं पर रोक लगनी चाहिए।" - खाप पंचायत प्रतिनिधिमंडल




