हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेशभर की 6230 ग्राम पंचायतों के विकास के लिए राज्य वित्त आयोग (एसएफसी) के अंतर्गत 579 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सीधे पंचायतों के बैंक खातों में अंतरित कर दी है। इस वित्तीय अनुदान के मिलने से गांवों में रुके हुए विकास कार्यों को तीव्र गति मिलेगी और ग्रामीण आंचल में जनहित से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा। प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण निकाय आत्मनिर्भर बनें और धरातल पर विकास योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता तथा प्रभावशीलता के साथ किया जा सके।
इस बीच, ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सफाई कर्मचारियों के लिए भी सरकार की ओर से बड़ी राहत भरी घोषणाएं सामने आई हैं। स्थानीय विश्राम गृह में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान विभिन्न ग्रामीण सफाई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत मंत्रणा की गई। इस बैठक में कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सभी 17 मांगों पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक सहमति बन गई है, जिनमें से अधिकांश मांगों के संबंध में प्रशासनिक पत्र भी पहले ही जारी किए जा चुके हैं। सरकार के इस दोतरफा कदम से एक ओर जहां पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर मेहनतकश कर्मचारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की मांगों पर मुहर और वित्तीय लाभ
पंचायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद कर्मचारियों के हितों में कई बड़े फैसले लिए गए। विभाग के निदेशक सुशील सारवान द्वारा पूर्व में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के तहत सफाई कर्मचारियों के मानदेय के बकाया एरियर और अक्टूबर 2023 के दौरान हुई हड़ताल अवधि का पात्र कर्मियों को नियमानुसार बकाया मानदेय देने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसके अलावा, यदि किसी कर्मचारी की ड्यूटी उसके मूल गांव से बाहर लगाई जाती है, तो उसे अब प्रतिदिन के हिसाब से 200 रुपये का विशेष भत्ता प्रदान किया जाएगा।
कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को संबल देने के उद्देश्य से उनके वार्षिक वर्दी भत्ते को 4 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधा 6 हजार रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही, धुलाई भत्ते की राशि को भी 1 हजार रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि प्रदेश के सभी ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को हर महीने की निश्चित 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से उनका मानदेय जारी कर दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
| प्रमुख श्रेणी / लाभ | संशोधित प्रावधान / विवरण |
|---|---|
| कुल ग्राम पंचायतें लाभान्वित | प्रदेश की 6230 पंचायतें |
| जारी कुल विकास राशि | 579 करोड़ रुपये (राज्य वित्त आयोग) |
| वार्षिक वर्दी भत्ता | 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये |
| मासिक धुलाई भत्ता | 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये |
| बाहरी ड्यूटी भत्ता | प्रतिदिन 200 रुपये अतिरिक्त |
| मानदेय वितरण तिथि | प्रत्येक माह की 7 तारीख तक अनिवार्य |
प्रशासनिक अधिकारियों और यूनियन प्रतिनिधियों की उपस्थिति
इस उच्चस्तरीय बैठक और विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय नजर आया। विश्राम गृह पहुंचने पर अतिरिक्त उपायुक्त ने उच्चाधिकारियों का स्वागत किया। इस अवसर पर जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विभिन्न उपमंडलों के एसडीएम, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) तथा पंचायत विभाग के अन्य प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के तमाम पदाधिकारी और सदस्य भी बैठक में शामिल रहे, जिन्होंने सरकार के इन निर्णयों पर संतोष व्यक्त किया और आभार जताया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि यदि दुर्भाग्यवश किसी ग्रामीण सफाई कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के एक योग्य सदस्य को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, मृतक कर्मचारी के आश्रित परिवार को भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) से जुड़े मृत्यु दावों के निस्तारण में बीडीपीओ कार्यालय द्वारा पूरी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया जाएगा, ताकि पीड़ित परिवार को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
"प्रदेश सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास और ग्रामीण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पंचायतों को जारी की गई 579 करोड़ रुपये की राशि से गांवों का कायाकल्प होगा और सफाई कर्मचारियों की मांगों पर सहमति से जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार आएगा।"
ग्रामीण विकास और व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव
सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों का सीधा सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ेगा। पंचायतों के खातों में सीधे फंड आने से गांवों में गलियों के निर्माण, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी और स्वच्छता जैसी प्राथमिक समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा। दूसरी ओर, सफाई कर्मचारियों की सेवाएं बेहतर होने से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और स्वच्छता के मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी आर्थिक रूप से सुरक्षित और संतुष्ट होते हैं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक अधिक पारदर्शिता के साथ पहुंचता है। आने वाले दिनों में पंचायत विभाग इन सभी विकास कार्यों और कर्मचारी कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन की कड़ी निगरानी रखेगा, ताकि किसी भी स्तर पर धन के दुरुपयोग या प्रशासनिक देरी की गुंजाइश न बचे।




