त्योहारी सीजन के ठीक बीच हरियाणा के आम नागरिकों और गृहणियों की रसोई का बजट एक बार फिर गड़बड़ा गया है। प्रदेश के सबसे भरोसेमंद डेयरी ब्रांड 'वीटा' ने अपने देसी घी और पनीर की बाजार दरों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। पिछले 30 दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है जब वीटा घी के दाम बढ़ाए गए हैं। इस ताजा संशोधन के बाद वीटा घी का 1 लीटर का डिब्बा अब 720 रुपये से बढ़कर 730 रुपये का हो गया है। इसी तरह 200 ग्राम पनीर के पैकेट पर भी 5 रुपये का सीधा इजाफा दर्ज किया गया है।
बाजार विशेषज्ञों और स्थानीय वितरकों का मानना है कि करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली और गोवर्धन पूजा जैसे बड़े पर्वों से ठीक पहले डेयरी उत्पादों के महंगे होने का सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ेगा। त्योहारों पर मिठाइयों और व्यंजनों के निर्माण में देसी घी तथा पनीर की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में ऐन वक्त पर हुई यह मूल्य वृद्धि मध्यमवर्गीय और निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो रही है।
वीटा घी और पनीर की संशोधित दरों का पूरा विवरण
वीटा डेयरी प्रबंधन द्वारा जारी की गई नई दर सूची के अनुसार, विभिन्न पैकिंग साइज में घी की कीमतें अनुपातिक रूप से बढ़ाई गई हैं। 1 लीटर के टिन और पीपी पैक दोनों की कीमतें अब समान रूप से 730 रुपये निर्धारित कर दी गई हैं। थोक खरीदारी करने वाले हलवाइयों और बड़े परिवारों के लिए 15 लीटर और 5 लीटर के टिन की कीमतों में भी तदनुसार बढ़ोतरी की गई है।
| उत्पाद व पैकिंग साइज | पुरानी अनुमानित दर (₹) | नई संशोधित दर (₹) | कुल बढ़ोतरी (₹) |
|---|---|---|---|
| वीटा घी 1 लीटर (टिन / PP) | 720 | 730 | 10 रुपये |
| वीटा घी 2 लीटर टिन | 1,430 | 1,450 | 20 रुपये |
| वीटा घी 5 लीटर टिन | 3,450 | 3,500 | 50 रुपये |
| वीटा घी 15 लीटर टिन | 9,950 | 10,100 | 150 रुपये |
| वीटा पनीर (200 ग्राम पैक) | 85 | 90 | 5 रुपये |
एक ही महीने में दूसरी बार क्यों बढ़ाने पड़े दाम?
उल्लेखनीय है कि वीटा ने इससे पहले 8 अक्टूबर को भी घी की दरों में 30 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी। उस समय 1 लीटर घी की कीमत 690 रुपये से बढ़ाकर 720 रुपये की गई थी। अब 10 रुपये की ताजा बढ़ोतरी के साथ महज तीन हफ्तों के भीतर वीटा घी कुल 40 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। पनीर के दामों में भी 5 रुपये का इजाफा कर 200 ग्राम के पैक को 85 रुपये से बढ़ाकर 90 रुपये कर दिया गया है।
संयंत्र के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि खुले बाजार में कच्चे दूध की कीमतों में निरंतर तेजी बनी हुई है। डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट्स को दूध का संकलन करने के लिए अधिक लागत चुकानी पड़ रही है। जब कच्चे माल (दूध) की खरीद दरें बढ़ती हैं, तो उससे तैयार होने वाले बाय-प्रोडक्ट्स जैसे मक्खन, घी और पनीर का उत्पादन मूल्य अपने आप ऊपर चला जाता है। यही मुख्य कारण है कि संस्था को थोड़े-थोड़े अंतराल पर दरों का पुनरीक्षण करना पड़ा है।
"कच्चे दूध की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते प्रसंस्करण लागत बढ़ गई है। वीटा अपने उपभोक्ताओं को सर्वोत्तम गुणवत्ता का दूध और दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और हम गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते। लागत संतुलन बनाए रखने के लिए ही घी और पनीर के रेट में यह मामूली बढ़ोतरी की गई है। त्योहारी सीजन में वीटा घी की मांग काफी अधिक है और आपूर्ति सुचारू रखी जा रही है।"
- नरेंद्र धानिया, सीईओ, वीटा प्लांट
किसानों से दूध खरीद की स्थिति और डेयरी तंत्र का अर्थशास्त्र
एक तरफ जहां उपभोक्ताओं के लिए वीटा के उत्पाद महंगे हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुग्ध उत्पादक किसानों को दिए जाने वाले फैट रेट्स का गणित भी चर्चा में है। वीटा प्लांट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 10 फैट वाले दूध के लिए किसानों को 88 रुपये प्रति लीटर की दर से भुगतान किया जा रहा है। हालांकि सितंबर महीने में यही भुगतान दर 90 रुपये प्रति लीटर थी। किसानों का कहना है कि पशु चारे, खल और देखभाल की बढ़ती लागत को देखते हुए उन्हें दूध का और बेहतर दाम मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, वीटा संघ के प्रतिनिधियों का तर्क है कि त्योहारी सीजन में ग्रामीण इलाकों से दूध का संकलन बनाए रखने और निजी डेयरियों से प्रतिस्पर्धा के कारण प्लांट की परिचालन लागत बढ़ी है। प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के खर्चों में हुई वृद्धि का असर अंततः अंतिम उत्पाद की बिक्री दर पर पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों, हलवाइयों और बाजार पर असर
घी और पनीर के दाम बढ़ने का सीधा प्रभाव स्थानीय मिष्ठान विक्रेताओं, कैटरर्स और आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिल रहा है। पानीपत शहर और आसपास के क्षेत्रों में मिष्ठान व्यवसायियों का कहना है कि दीवाली के लिए पहले से बुक किए गए ऑर्डर की लागत अब बढ़ जाएगी। शुद्ध देसी घी की मिठाइयों के रेट में भी 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम का उछाल आ सकता है।
स्थानीय गृहिणियों ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि त्योहारी बजट में पहले से ही सूखे मेवे, चीनी और खाद्य तेल महंगे चल रहे थे। अब वीटा जैसी सहकारी संस्था द्वारा महीने में दो बार रेट बढ़ाए जाने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि आने वाले दिनों में कच्चे दूध की आवक और लागत में सुधार नहीं हुआ, तो घी की दरों में और भी आंशिक बढ़ोतरी संभव है।




