पानीपत के ऐतिहासिक भगतसिंह स्मारक परिसर में स्थित टीकाराम सखुन सभागार में शनिवार को महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति दिवस के अवसर पर एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी का उद्देश्य इतिहास के उन महत्वपूर्ण अध्यायों पर चर्चा करना था, जिन्होंने पूरी दुनिया की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को एक नई दिशा दी थी। कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित सभी गणमान्य वक्ताओं और बुद्धिजीवियों ने महान शहीदों और विचारकों को नमन करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
विचार गोष्ठी की अध्यक्षता संयुक्त रूप से राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला सह सचिव एडवोकेट रामरतन और हरियाणा राज्य सचिव कामरेड दरियाव सिंह कश्यप द्वारा की गई। वहीं, कार्यक्रम का कुशल संचालन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के जिला सचिव एडवोकेट पवन सैनी ने किया। संगोष्ठी के प्रारंभ में देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और विचारकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का विशेष सत्र रखा गया, जिसमें सभी ने शहीद-ए-आजम भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव के साथ-साथ महान क्रांतिकारी और विचारक व्लादिमीर इलिच लेनिन की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी गहरी संवेदना और सम्मान प्रकट किया।
रूसी क्रांति के ऐतिहासिक महत्व और वैचारिक पृष्ठभूमि पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए हरियाणा राज्य सचिव कामरेड दरियाव सिंह कश्यप ने सात नवंबर 1917 के ऐतिहासिक घटनाक्रम को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उस दिन रूसी जनता ने व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में क्रूर जारशाही तानाशाही का पूरी तरह से खात्मा कर दिया था और देश की बागडोर मजदूरों तथा किसानों के हाथों में सौंपी थी। इस महान क्रांति के परिणामस्वरुप उत्पादन के सभी प्रमुख साधनों पर व्यक्तिगत या पूंजीवादी आधिपत्य के स्थान पर सामूहिक अधिकार स्थापित किए गए।
कामरेड दरियाव सिंह कश्यप ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि सोवियत संघ के गठन के बाद उस व्यवस्था ने बहुत कम समय में ही देश से अशिक्षा, गंभीर बेरोजगारी और गहरी सामाजिक असमानता का सफलतापूर्वक सफाया कर दिया था। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को समझाया कि आज के दौर में जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक नीतियां बदल रही हैं, तब इस ऐतिहासिक क्रांति के मूल सिद्धांतों को समझना और उनका अध्ययन करना और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| आयोजन स्थल | टीकाराम सखुन सभागार, भगतसिंह स्मारक, पानीपत |
| अध्यक्षता | एडवोकेट रामरतन एवं कामरेड दरियाव सिंह कश्यप |
| मंच संचालन | एडवोकेट पवन सैनी (जिला सचिव, सीपीआई) |
| मुख्य विषय | महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति दिवस और शोषणमुक्त समाज |
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य, नव-उदारवाद और जनविरोधी नीतियों पर चिंता
सीपीआई के जिला सचिव एडवोकेट पवन सैनी ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में नव-उदारवाद, अनियंत्रित भूमंडलीकरण और तमाम जनविरोधी नीतियों के कारण आम आदमी का जीवन लगातार कठिन होता जा रहा है। महंगाई अपने चरम पर है, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं और समाज में सांप्रदायिकता जैसी ताकतों का प्रभाव विकराल रूप धारण करता जा रहा है।
एडवोकेट पवन सैनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा दौर की इन गंभीर चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए अक्तूबर क्रांति का इतिहास हमें नए सिरे से पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ एक मजबूत और संगठित संघर्ष तेज करने का स्पष्ट आह्वान करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक आम जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होगी और व्यवस्थागत बदलाव के लिए सामूहिक प्रयास नहीं करेगी, तब तक वास्तविक न्याय की कल्पना नहीं की जा सकती।
"मजदूरों और किसानों की आपसी एकजुटता से ही एक ऐसी शोषणमुक्त दुनिया का सपना साकार हो सकता है, जहाँ हर व्यक्ति को उसकी मेहनत का पूरा हक और सम्मान मिले। आज के समय में वैचारिक एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।" - एडवोकेट रामरतन, राज्य कार्यकारिणी सदस्य
मजदूर-किसान एकता और आगामी सामाजिक बदलाव की दिशा
गोष्ठी के अंत में समापन वक्तव्य देते हुए एडवोकेट रामरतन ने कहा कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को उसका अधिकार दिलाए बिना किसी भी सभ्य समाज की परिकल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि देश के मेहनतकश वर्ग—चाहे वे खेतों में पसीना बहाने वाले किसान हों या फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर—यदि वे अपनी वैचारिक और संगठनात्मक ताकत को पहचान लें, तो वे किसी भी अन्यायपूर्ण व्यवस्था को बदलने की क्षमता रखते हैं।
कार्यक्रम के दौरान पानीपत जिले के कई प्रमुख प्रगतिशील विचारक, कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इस सूची में सूरत सिंह देशवाल, भूपेंद्र कुमार, सतीश कुमार, ओम सिंह, शमीम, विजय, नईम, इंद्र सिंह, जुनैद राणा और नवल किशोर जैसे नाम प्रमुख रूप से शामिल थे, जिन्होंने गोष्ठी के अंत तक बैठकर वक्ताओं के विचारों को सुना और अपने अनुभव साझा किए।
बदलाव की बयार और भविष्य की रूपरेखा
इस विचार गोष्ठी ने पानीपत के वैचारिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दिया है। स्थानीय नागरिकों और युवाओं के बीच इस बात पर व्यापक चर्चा हुई कि कैसे स्थानीय स्तर पर जनमुद्दों को उठाकर एक मजबूत जनांदोलन खड़ा किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एकजुट होकर समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने और एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए निरंतर वैचारिक और धरातलीय संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।




