शिक्षा केवल किताबी ज्ञान का नाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर छिपी रचनात्मकता और संस्कारों को सींचने का एक माध्यम है। पानीपत जिले के ग्रामीण आंचल में स्थित शिक्षण संस्थानों में बच्चों के भीतर संस्था के प्रति अपनत्व और सम्मान की भावना जगाने के लिए लगातार सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की एक अनूठी पहल देखने को मिली, जहां विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक प्रांगण को प्रकाशमान कर एक मिसाल पेश की है।
शनिवार को जिले के अंतर्गत आने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों ने 'एक दीया विद्यालय के नाम' अभियान के तहत बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। बच्चों ने अपने स्कूल परिसर में दीप प्रज्वलित कर न केवल एक सांस्कृतिक माहौल का सृजन किया, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और संस्था के प्रति अपनी गहरी निष्ठा व कृतज्ञता का भी परिचय दिया। इस अनूठी पहल ने पूरे विद्यालय परिसर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर दिया।
ज्ञान के प्रकाश से दूर होगा अज्ञान का अंधकार
कार्यक्रम के दौरान अध्यापकों ने बच्चों को शिक्षा के वास्तविक अर्थ और जीवन में संस्कारों के महत्व से अवगत कराया। विद्यालय के ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक और शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता (डीपीई) उमेद सिंह ने इस अभियान की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की इस प्रेरणादायक पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर अपने विद्यालय के प्रति आदर भाव, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और अनुशासन की नींव को मजबूत करना है।
ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक रात के सन्नाटे और अंधकार को चीरकर चारों तरफ प्रकाश फैला देता है, ठीक उसी प्रकार शिक्षा के माध्यम से किया गया एक छोटा प्रयास भी किसी भी विद्यार्थी के जीवन को रोशन कर सकता है। यह ज्ञान का प्रकाश ही है जो आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उज्ज्वल भविष्य के मार्ग को प्रशस्त करता है। इस अवसर पर मौजूद सभी बच्चों ने अंधकार रूपी बुराइयों और अज्ञान को त्यागकर प्रकाश रूपी ज्ञान को अपनाने का संकल्प लिया।
| कार्यक्रम विवरण | मुख्य तथ्य व जानकारी |
|---|---|
| स्थान | राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बड़ौली (पानीपत) |
| अभियान | एक दीया विद्यालय के नाम |
| प्रमुख वक्ता | प्रदीप मलिक (ललित कला प्राध्यापक) एवं उमेद सिंह (डीपीई) |
| मुख्य उद्देश्य | विद्यार्थियों में शिक्षा, संस्कार और विद्यालय के प्रति अपनत्व की भावना |
विद्यार्थियों में दिखा भारी उत्साह और अपनत्व
इस अनूठे आयोजन में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। बच्चों के चेहरों पर अपने स्कूल के प्रति प्रेम और सम्मान साफ झलक रहा था। दीप प्रज्वलित करने के इस पवित्र अनुष्ठान में खुशी, राधिका, साक्षी, अंकुश, अजय, माही, सुमित, समा रानी, अशोक कुमार और अंजलि सहित कई विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि एक विद्यार्थी की पहचान केवल उसके अंकों से नहीं, बल्कि अपनी मातृ संस्था और गुरुजनों के प्रति उसके सम्मान से भी होती है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में जब बच्चे नैतिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे आयोजनों से उनमें अपनेपन की भावना जागृत होती है। विद्यालय को अपना दूसरा घर मानने की यह सोच भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी। पानीपत लाइव ब्यूरो की टीम मानती है कि इस प्रकार के रचनात्मक आयोजन अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनने चाहिए।
"जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार शिक्षा का प्रयास बच्चों के जीवन में ज्ञान और उज्ज्वल भविष्य का प्रकाश लाता है।" - प्रदीप मलिक, ललित कला प्राध्यापक
भविष्य के लिए प्रेरणा और सकारात्मक बदलाव
इस आयोजन का समापन सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ। स्कूल प्रबंधन समिति का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों का मानसिक विकास तो होता ही है, साथ ही वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहते हैं। पानीपत जिले के बड़ौली गांव के इस विद्यालय की यह पहल अब आसपास के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी चर्चा का विषय बन चुकी है, जहां से अन्य स्कूलों को भी सीख लेने की आवश्यकता है।




