सुहागिनों के सबसे बड़े और पवित्र पर्व करवा चौथ को लेकर देश भर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पंचांगीय गणना के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 28 अक्टूबर की रात 1:07 बजे हो रहा है और इसका समापन 29 अक्टूबर को रात्रि 10:11 बजे होगा। उदया तिथि और शास्त्र सम्मत विधान को ध्यान में रखते हुए इस बार सुहागिन महिलाओं द्वारा करवा चौथ का निर्जल उपवास 29 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। यह पर्व पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अटूट वैवाहिक रिश्ते की कामना का प्रतीक माना जाता है, जिसमें महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न-जल के रहकर चंद्रमा की पूजा के बाद व्रत का पारण करती हैं।
व्रत से जुड़ी परंपराओं और नियमों को लेकर इस बार कुछ विशेष बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिलाएं पहली बार यह व्रत शुरू करने जा रही हैं, उनके मन में कई तरह की शंकाएं होती हैं। कई स्थानों पर ऐसी भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं कि पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं उपवास की शुरुआत नहीं कर सकतीं, जिसे विद्वानों ने पूरी तरह खारिज किया है। जानकारों का कहना है कि जो भी महिला अपनी श्रद्धा से उपवास रखना चाहती है, वह विधिवत रूप से इसकी शुरुआत कर सकती है। हालांकि, इस बार ज्योतिषीय स्थिति के तहत शुक्र के बाल्यत्व के कारण व्रत का उद्यापन या मोख नहीं किया जाएगा। आमतौर पर महिलाएं 12 या 16 वर्ष पूरे होने पर अथवा जीवनभर व्रत रखने का संकल्प लेती हैं, लेकिन इस वर्ष उद्यापन वर्जित रहेगा।
करवा चौथ की पूजन विधि और सरगी की परंपरा का महत्व
इस पर्व की शुरुआत सूर्योदय से पहले यानी पो फटने से पूर्व खाई जाने वाली 'सरगी' के साथ होती है। सांस या बड़े बुजुर्गों द्वारा दी जाने वाली सरगी में फेनी, कतलमा, चूरमा, दूध और रबड़ी जैसे ऊर्जावान खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाता है, जो पूरे दिन बिना जल के रहने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसके बाद महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम के समय किसी मंदिर या सामूहिक स्थान पर एकत्र होकर माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ भगवान शिव की पूजा करती हैं। इस दौरान करवा कथा सुनने की प्राचीन परंपरा है, जिसमें सुहागिनें मिलकर कथा वाचन करती हैं और देश व परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।
रात्रि के समय चंद्रमा के निकलने का बेसब्री से इंतजार किया जाता है। मौसम विभाग की कुछ चेतावनियों के बीच आसमान साफ रहने की उम्मीद के साथ विभिन्न क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय निर्धारित किए गए हैं। चाँद निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण कर अपना उपवास पूरा करती हैं। इस अनुष्ठान में पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का अनूठा भाव झलकता है, जो इस लोक पर्व को बेहद खास बनाता है।
| शहराें के नाम | चाँद निकलने का समय (रात्रि) |
|---|---|
| दिल्ली | 08:17 बजे |
| गुरुग्राम | 08:18 बजे |
| चंडीगढ़ / उत्तर भारत | 08:16 बजे |
| जयपुर | 08:28 बजे |
| लखनऊ | 08:06 बजे |
| कानपुर | 08:10 बजे |
| आगरा | 08:18 बजे |
| पटना | 07:52 बजे |
| मुंबई | 09:00 बजे |
| अहमदाबाद | 08:52 बजे |
विद्वानों और आचार्यों का स्पष्ट मत है कि करवा चौथ के व्रत में विधि-विधान और नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इस वर्ष चंद्रोदय के समय को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की दुविधा का सामना न करना पड़े। उत्तर भारत के प्रमुख महानगरों और जिलों में रात आठ बजे के बाद से चंद्रमा के दीदार होने शुरू हो जाएंगे, जिसके आधार पर व्रतधारी महिलाएं अपने पूजन का समय निर्धारित कर सकती हैं। स्थानीय स्तर पर भी बाजारों में करवा, पूजन सामग्री, चलनी और श्रृंगार के सामान की दुकानों पर भारी रौनक देखने को मिल रही है।
'करवा चौथ का व्रत सनातन संस्कृति में सुहागिनों के अटूट प्रेम, समर्पण और त्याग का सबसे बड़ा उत्सव है। इस वर्ष व्रत को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं। जो महिलाएं पहली बार व्रत रख रही हैं, वे पूरी निष्ठा से इसका पालन कर सकती हैं, बस इस बार उद्यापन नहीं किया जाएगा।' - प्रमुख शास्त्रीय मत
स्थानीय बाजारों में रौनक और महिलाओं में भारी उत्साह
त्योहार के मद्देनजर हरियाणा और आसपास के सभी जिलों के बाजारों में भारी चहल-पहल और उत्साह का माहौल बना हुआ है। कपड़े की दुकानों, सौंदर्य प्रसाधन केंद्रों और मिट्टी के करवे बेचने वाले दुकानदारों के यहाँ महिलाओं की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। व्यापारी वर्ग के लिए यह सीजन कारोबार के लिहाज से भी काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी त्योहारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बाजारों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी हुई है ताकि खरीदारी करने आने वाली महिलाओं और परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
परिवारों में इस पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नवविवाहित युवतियों के लिए यह पहला करवा चौथ होने के कारण उनके मायके से भी बयाना और उपहार भेजे जा रहे हैं। बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद और पति का सहयोग इस पर्व को और अधिक आनंदमय बना देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाओं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही महिलाओं को अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखते हुए ही निर्जल उपवास का निर्णय लेना चाहिए, ताकि पर्व की खुशी और स्वास्थ्य दोनों बरकरार रह सकें।




