पानीपत जिले के गांव डिडवाड़ी के प्रगतिशील किसान एवं पद्मश्री अवार्डी नरेंद्र सिंह का मुर्रा नस्ल का झोटा 'विधायक' इन दिनों पूरे प्रदेश में पशुपालकों और आम जनता के बीच भारी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। झज्जर जिले के हसनपुर में आयोजित पशु प्रदर्शनी मेले में जब 'विधायक' को मैदान में उतारा गया, तो वहां मौजूद हर कोई उसकी कद-काठी और भव्य स्वरूप को निहारता रह गया। करीब 15 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत के साथ यह झोटा हरियाणा के समृद्ध पशुधन और मुर्रा नस्ल की वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है।
अपनी विशिष्ट पहचान और शानदार कद-काठी के चलते इस झोटे ने पशुपालन क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महज साढ़े पांच वर्ष की उम्र और साढ़े पांच फीट की ऊंचाई वाले इस झोटे को देखने के लिए हरियाणा ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में प्रगतिशील पशुपालक और आम लोग पहुंच रहे हैं। नरेंद्र सिंह द्वारा किए गए समर्पित प्रयासों की बदौलत यह पशु आज प्रदेश की शान बन चुका है।
शानदार कद-काठी और 'विधायक' की दैनिक विशेष डाइट
पद्मश्री नरेंद्र सिंह के अनुसार, 'विधायक' की देखभाल किसी अत्यंत विशिष्ट हस्ती की भांति की जाती है। उसकी दिनचर्या में संतुलित आहार, नियमित मालिश और टहलना शामिल है। पारंपरिक हरे चारे और पौष्टिक चने-बिनौले के अलावा उसकी एक समय की डाइट में उच्च गुणवत्ता वाले सूखे मेवे जैसे काजू, बादाम और अखरोट शामिल किए जाते हैं। यही कारण है कि उसकी शारीरिक चमक, गठीला बदन और फुर्ती किसी को भी पलक झपकते ही प्रभावित कर देती है।
शारीरिक मजबूती के साथ-साथ इस झोटे का स्वभाव भी बेहद शांत और सधा हुआ है। सामान्य तौर पर भारी-भरकम नर भैंसे आक्रामक हो जाते हैं, लेकिन नरेंद्र सिंह के कुशल प्रशिक्षण और निरंतर देखभाल की वजह से यह विशालकाय झोटा मेलों में दर्शकों और पशु प्रेमियों के बीच पूरी तरह शांत बना रहता है।
| विशेषता / विवरण | तथ्य एवं आंकड़े |
|---|---|
| झोटे का नाम | विधायक (मुर्रा नस्ल) |
| पशुपालक / मालिक | नरेंद्र सिंह (पद्मश्री अवार्डी, 2019) |
| गृह क्षेत्र | गांव डिडवाड़ी, जिला पानीपत (हरियाणा) |
| आयु एवं ऊंचाई | साढ़े 5 साल | साढ़े 5 फीट ऊंचाई |
| अनुमानित बाजार मूल्य | लगभग ₹15 करोड़ रुपये |
| प्रतियोगिता रिकॉर्ड | 23 बार विभिन्न चैंपियनशिप में प्रथम स्थान |
| विशेष योगदान | हर चौथे दिन 600 स्ट्रॉ सीमन, नस्ल संवर्धन में अग्रणीय |
23 राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय खिताब और नस्ल संवर्धन में भूमिका
यह मुर्रा झोटा केवल अपनी कीमत और बनावट के लिए ही नहीं, बल्कि प्रतियोगिताओं में अपने लगातार विजयी रिकॉर्ड के लिए भी जाना जाता है। अब तक इसने उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित करीब 23 प्रमुख पशु प्रतियोगिताओं में पहला स्थान हासिल कर चैंपियन का खिताब अपने नाम किया है। जूरी सदस्य हमेशा उसकी सींगों की बनावट, पीठ की सीध, खुरों की मजबूती और संपूर्ण शारीरिक अनुपात को सर्वोच्च अंक देते आए हैं।
सौंदर्य प्रतियोगिताओं में परचम लहराने के साथ-साथ यह पशुधन संवर्धन में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान और मुर्रा नस्ल के संरक्षण के उद्देश्य से यह झोटा हर चौथे दिन लगभग 600 सीमन स्ट्रॉ प्रदान करता है। इससे उच्च कोटि की दुधारू भैंसों की नई पीढ़ी तैयार की जा रही है, जिससे देश भर के किसानों की आय में इजाफा हो रहा है।
"पशुपालन हमारी संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ है। 'विधायक' को केवल एक कीमती पशु के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय मुर्रा नस्ल को विश्व पटल पर सर्वश्रेष्ठ साबित करने के संकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए।" - नरेंद्र सिंह, पद्मश्री अवार्डी पशुपालक, डिडवाड़ी (पानीपत)
कृषि और पशुपालन क्षेत्र में डिडवाड़ी का बढ़ा मान
पानीपत जिले के गांव डिडवाड़ी की पहचान नरेंद्र सिंह के अथक प्रयासों से देशभर के कृषि एवं डेयरी मानचित्र पर स्थापित हुई है। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा नरेंद्र सिंह को पशु संवर्धन और डेयरी फार्मिंग में उल्लेखनीय योगदान के लिए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा गया था। 'विधायक' की यह हालिया सफलता उनके उसी समर्पण का प्रमाण है।
स्थानीय युवाओं और किसानों के लिए यह सफलता एक प्रेरणास्रोत का काम कर रही है। परंपरागत खेती में बढ़ते खर्च और घटते मुनाफे के बीच वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन अपनाकर लाखों-करोड़ों का कारोबार खड़ा करने का यह एक जीवंत उदाहरण बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब उन्नत नस्ल के कटड़े-कटड़ियों के पालन-पोषण को लेकर उत्साह कई गुना बढ़ गया है।
उन्नत पशुधन संरक्षण और भावी कार्ययोजना
विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा की मुर्रा नस्ल जिसे 'ब्लैक गोल्ड' (काला सोना) भी कहा जाता है, की मांग पूरी दुनिया में है। ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और कई एशियाई देश भारतीय मुर्रा नस्ल के आनुवंशिक गुणों को अपनाने के लिए प्रयासरत हैं। डिडवाड़ी फार्म पर आधुनिक प्रयोगशाला मानकों के अनुसार सीमन का संग्रहण किया जाता है ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
आने वाले समय में नरेंद्र सिंह का लक्ष्य इस नस्ल के सीमन को देश के सुदूर गांवों तक रियायती और सुलभ तरीके से पहुंचाना है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली भैंसें तैयार कर सकें और भारत का डेयरी उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू सके।




