पानीपत जिले के मतलौडा गांव में इन दिनों खुशियों का माहौल गम में तब्दील हो गया है। गांव के एक जांबाज सैनिक, विकास देशवाल (29), जो देश की सेवा में पटियाला में तैनात थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस घर में महज 8 दिन पहले एक नन्हीं बेटी के जन्म पर मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां अब चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा है। रविवार सुबह जब सेना के विशेष वाहन में जवान का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई।
विकास देशवाल भारतीय सेना की 501 बटालियन में कार्यरत थे और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग पंजाब के पटियाला में थी। जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर की सुबह जब वे नियमित परेड और सैन्य अभ्यास में हिस्सा ले रहे थे, तभी उनके सीने में तेज दर्द उठा। उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन अगले दिन यानी 24 अक्टूबर की सुबह उन्हें फिर से तीव्र दर्द हुआ और उपचार के दौरान उनकी सांसें थम गईं।
घटनाक्रम और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
विकास देशवाल के निधन की सूचना मिलते ही मतलौडा गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार सुबह सेना की टुकड़ी उनके पार्थिव शरीर को लेकर पैतृक गांव पहुंची। गांव के श्मशान घाट पर राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान 'विकास देशवाल अमर रहे' के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। ग्रामीणों ने बताया कि विकास न केवल एक अनुशासित सैनिक थे, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी थे।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | विकास देशवाल |
| आयु | 29 वर्ष |
| गांव | मतलौडा, जिला पानीपत |
| सैन्य यूनिट | 501 बटालियन |
| भर्ती वर्ष | 14 जून 2014 |
| परिवार | पत्नी, 6 वर्षीय बेटा, 8 दिन की बेटी |
मासूम बेटे की विदाई ने सबको रुलाया
अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य तब सामने आया जब विकास के 6 साल के बेटे विवान ने अपने पिता के पार्थिव शरीर के सामने हाथ जोड़े। मासूम विवान को शायद यह भी नहीं पता था कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे, लेकिन उसने पिता के चरणों में फूल अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। वहीं, विकास की 8 दिन की बेटी, जिसने अभी अपने पिता की गोद का सुख भी नहीं पाया था, घर में अपनी मां की गोद में थी, जो बेसुध हालत में अपने पति के जाने का शोक मना रही थी।
"विकास देशवाल एक जांबाज सैनिक और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उनके जाने से न केवल देश ने एक रक्षक खोया है, बल्कि मतलौडा गांव ने अपना एक हीरा खो दिया है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, क्योंकि 8 महीने पहले ही विकास के पिता वेद सिंह का भी निधन हुआ था।" - स्थानीय ग्रामीण
गांव और परिवार पर दुखों का दोहरा प्रहार
विकास के परिवार के लिए पिछला एक साल बेहद कष्टकारी रहा है। करीब 8 महीने पहले ही उनके पिता वेद सिंह देशवाल का देहांत हुआ था। परिवार अभी उस सदमे से उबरने की कोशिश कर ही रहा था और घर में बेटी के जन्म से खुशियां लौटी ही थीं कि विकास की मौत ने परिवार को गहरे अंधेरे में धकेल दिया। विकास 2014 में सेना में भर्ती हुए थे और उनका स्वभाव बेहद हंसमुख था। गांव के लोगों का कहना है कि वे जब भी छुट्टी पर आते थे, सभी से बड़े प्रेम से मिलते थे।
प्रशासनिक और सामाजिक संवेदनाएं
जवान के निधन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। सेना की ओर से कमांडर एस. सचिन ने परिवार को इस दुखद समाचार की आधिकारिक जानकारी दी थी। रविवार को अंतिम यात्रा में भारी संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक और युवा शामिल हुए। सभी ने एक सुर में परिवार को इस कठिन समय में संबल देने की बात कही।
विकास देशवाल का जाना मतलौडा और पूरे पानीपत जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति है। एक सैनिक जो सीमा पर तैनात रहकर देश की रक्षा करता है, उसका इस तरह आकस्मिक चले जाना समाज को झकझोर देता है। अब परिवार की जिम्मेदारी और बच्चों का भविष्य एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए ग्रामीणों ने सरकार से उचित आर्थिक सहायता और सम्मान की मांग की है।



