पानीपत के औद्योगिक क्षेत्र में छोटी दिवाली का उल्लास उस समय फीका पड़ गया, जब पसीना रोड स्थित एक प्रमुख टेक्सटाइल इकाई भीषण आग की चपेट में आ गई। ओम बालाजी टेक्सटाइल फैक्टरी में शनिवार दोपहर अचानक लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। धुएं के काले गुबार और ऊंची लपटों ने पूरे इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया। गनीमत यह रही कि फैक्टरी में मौजूद सभी श्रमिकों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ी मानवीय त्रासदी टल गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग दोपहर करीब 1:40 बजे लगी थी। उस समय फैक्टरी में काम चल रहा था। जैसे ही आग की सूचना मिली, परिसर में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन प्रबंधन और श्रमिकों की सूझबूझ से निकासी प्रक्रिया को तुरंत पूरा किया गया। आग इतनी भीषण थी कि इसकी तपिश और धुएं के कारण फैक्टरी की दीवारें और छत के कुछ हिस्सों में दरारें आ गईं और ढांचागत क्षति भी हुई है।
अग्निकांड का घटनाक्रम और राहत कार्य की चुनौतियां
आग लगने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। शुरुआत में पानीपत दमकल केंद्र से सात गाड़ियां मौके पर भेजी गईं, लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी। इसके बाद तत्काल प्रभाव से समालखा और एनएफएल (NFL) से अतिरिक्त दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। कुल 9 गाड़ियों ने मोर्चेबंदी की।
दमकल कर्मियों को आग बुझाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फैक्टरी के भीतर भारी मात्रा में ज्वलनशील टेक्सटाइल कच्चा माल और तैयार कंबल-धागा होने के कारण लपटें बार-बार भड़क रही थीं। पानी की बौछार को फैक्टरी के आंतरिक हिस्सों तक पहुंचाने के लिए दमकल विभाग को जेसीबी की मदद से फैक्टरी की दीवार के कुछ हिस्सों को तोड़ना पड़ा। लगभग पांच घंटे के निरंतर संघर्ष के बाद शाम को आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका, जिसके बाद कूलिंग प्रक्रिया शुरू की गई।
| तारीख | फैक्टरी/स्थान | नुकसान का विवरण |
|---|---|---|
| 9 नवंबर | ओम बालाजी टेक्सटाइल, पसीना रोड | करोड़ों का माल व मशीनरी स्वाहा |
| 3 नवंबर | ज्योति कॉट्स यार्न, इंडस्ट्रियल एरिया | मशीनरी और कच्चा माल जला |
| 28 अक्तूबर | सीआरजी धागा फैक्टरी, शिवनगर | भीषण आग, एक श्रमिक की मृत्यु |
| 26 मार्च | गुप्ता इंटरनेशनल, डाडोला रोड | लाखों का माल जलकर राख |
दमकल विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक रुख
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। जिला दमकल विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फैक्टरी के भीतर आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम थे या नहीं, इसकी गहनता से जांच की जा रही है। विशेष रूप से फायर एनओसी (No Objection Certificate) के नवीनीकरण और मौके पर मौजूद उपकरणों की कार्यक्षमता को परखा जा रहा है।
"सूचना मिलते ही हमारी टीम ने त्वरित कार्रवाई की और 9 गाड़ियों को तैनात किया गया। प्राथमिकता जानमाल की सुरक्षा थी, जिसे सफलतापूर्वक सुनिश्चित किया गया। अब फैक्टरी के अग्नि सुरक्षा रिकॉर्ड और एनओसी की जांच की जा रही है। यदि नियमों में कोई कोताही पाई गई, तो संबंधित मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" - गुरमेल सिंह, जिला दमकल अधिकारी, पानीपत
स्थानीय टेक्सटाइल उद्योग में सुरक्षा की चिंताएं
पानीपत के टेक्सटाइल हब में पिछले कुछ हफ्तों के भीतर आगजनी की यह चौथी बड़ी घटना है। बार-बार हो रहे इन हादसों ने न केवल व्यापारियों के आर्थिक हितों को चोट पहुंचाई है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। टेक्सटाइल कचरा, यार्न और सिंथेटिक कपड़े अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं, ऐसे में छोटी सी चिंगारी भी बड़े विनाश का कारण बन जाती है।
व्यापारिक संगठनों ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। जानकारों का मानना है कि त्योहारी सीजन में उत्पादन का दबाव अधिक होता है, जिसके कारण कई बार शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं पर ध्यान नहीं जा पाता। प्रशासन अब औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष फायर ऑडिट चलाने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
आगामी कदम और प्रशासन की चेतावनी
ओम बालाजी टेक्सटाइल में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीम भी दौरा कर सकती है। वहीं, दमकल विभाग ने स्पष्ट किया है कि दिवाली के मद्देनजर सभी औद्योगिक इकाइयों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। आने वाले दिनों में उन फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसा जा सकता है जिन्होंने फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन किया है। पानीपत लाइव की टीम व्यापारियों से अपील करती है कि वे अपनी इकाइयों में सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त रखें और नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल का आयोजन करें।




