पानीपत जिले के समालखा क्षेत्र में लगातार पैर पसार रही नशा रूपी कुप्रथा के खिलाफ अब प्रबुद्ध वर्ग ने सड़क से लेकर समाज तक आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शनिवार को ताऊ देवी लाल मेमोरियल कॉलेज ऑफ एजुकेशन के परिसर में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को मादक पदार्थों के दलदल से बाहर निकालना और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना रहा। विभिन्न सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक जगत से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने इसमें शिरकत की और एक स्वर में इस सामाजिक संकट से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे जाट धर्मार्थ सभा के जिला प्रधान हिटलर जौरासी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वस्थ समाज की रीढ़ को अंदर से खोखला कर रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि किस प्रकार यह दीमक युवाओं के शारीरिक स्वास्थ्य, पारिवारिक आर्थिकी और सामाजिक ताने-बाने को तबाह कर रही है। गहन विचार-विमर्श के बाद यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर एक विशाल मशाल यात्रा का आयोजन किया जाएगा, जो समालखा और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों से गुजरते हुए लोगों को जागरूक करेगी।
युवाओं को खेलों और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम
आयोजित इस विशेष बैठक में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल पाबंदियों या प्रशासनिक कार्रवाइयों से इस बुराई को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए सामाजिक स्तर पर एक मजबूत जन-आंदोलन खड़ा करना बेहद जरूरी है। बैठक में यह तय किया गया कि जागरूकता अभियानों के तहत युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों, खेलकूद प्रतियोगिताओं और शैक्षणिक उन्नयन की ओर प्रेरित किया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकिशोभा और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने वाली युवा पीढ़ी को नशे के दुष्परिणामों से समय रहते अवगत कराया जा सके।
इसके अलावा, स्थानीय पुलिस प्रशासन के नशा विरोधी अभियानों और हेल्पलाइनों का भी भरपूर समर्थन करने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज का हर नागरिक अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए पुलिस और प्रशासन का सहयोग करे, तो तस्करों के मंसूबों को आसानी से नाकाम किया जा सकता है। आगामी मशाल यात्रा की रूपरेखा तैयार करने के लिए विभिन्न समितियों का गठन भी कर दिया गया है जो इस अभियान को सफल बनाने के लिए रूपरेखा को अमलीजामा पहनाएंगी।
| अभियान का पहलू | विवरण व रूपरेखा |
|---|---|
| प्रमुख आयोजन स्थल | ताऊ देवी लाल मेमोरियल कॉलेज ऑफ एजुकेशन, समालखा |
| मुख्य उद्देश्य | युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रखना व जागरूक करना |
| प्रस्तावित गतिविधि | क्षेत्र में विशाल मशाल यात्रा का आयोजन |
| प्रमुख उपस्थिति | हितलर जौरासी, सुभाष कुहाड़, चांद मनाना, कविता राणा व अन्य |
शिक्षाविदों और प्रबुद्ध नागरिकों की सक्रिय भागीदारी
इस बैठक में समालखा क्षेत्र के कई जाने-माने शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बैठक में शामिल प्रिंसिपल कविता राणा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि माताओं और शिक्षकों की भूमिका इस दिशा में सबसे अहम है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों में बचपन से ही नैतिक मूल्यों और मानसिक दृढ़ता के बीज बोए जाने चाहिए ताकि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या गलत संगत में न पड़ें। इसी प्रकार सुभाष कुहाड़, चांद मनाना, कंवल सिंह, सूरजभान, धर्मवीर सोनीपत और मुकेश राठी जैसे प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए और इस महती अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
उपस्थित सभी गणमान्य जनों ने एकमत होकर यह प्रण लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं की काउंसलिंग करेंगे और उन्हें रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखने के लिए प्रेरित करेंगे। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस प्रकार के अभियानों से न केवल युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में बहेगी, बल्कि असामाजिक तत्वों और नशा तस्करों में भी कानून व समाज का भय उत्पन्न होगा।
"नशा हमारी युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य, आर्थिक सुदृढ़ता और सामाजिक व्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहा है। इस लाइलाज होती बीमारी से समाज को बचाने के लिए अब हर नागरिक को आगे आना होगा। हमारी प्राथमिकता युवाओं को खेल और शिक्षा से जोड़कर एक नया सवेरा लाना है।" - हिटलर जौरासी, जिला प्रधान, जाट धर्मार्थ सभा
प्रशासनिक सहयोग और आगामी प्रशासनिक रणनीति
नशा मुक्ति के इस सिलसिलेवार अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए अब स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के साथ भी समन्वय बैठकें की जाएंगी। सामाजिक संगठनों की योजना है कि पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त जागरूकता शिविर लगाए जाएं, जिनमें नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधानों और उससे बचने के उपायों की जानकारी दी जाए। प्रशासनिक अमले को भी इन अभियानों में शामिल कर ग्रामीण अंचल के हर कोने तक चेतना संदेश प्रसारित करने की योजना पर काम चल रहा है।
आगामी दिनों में निकलने वाली इस विशाल मशाल यात्रा को लेकर युवाओं और स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तरह के जन-अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं, तो समालखा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों से नशे के काले साए को काफी हद तक दूर किया जा सकता है, जो कि स्वस्थ और प्रगतिशील समाज के निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।




